रणथंभौर गणेश मंदिर का इतिहास – Ranthambore Ganesh Temple History in Hindi

Ranthambore Ganesh Temple History in Hindi – भगवान गणेश जी का प्रमुख मंदिर राजस्थान के सवाईमधोपुर जिले में रणथंभौर किले में स्थित हैं। यह मंदिर बहुत साल पुराना हैं। इस मंदिर को रणथंभौर के राजा हमीर ने बनवाया था। युद्ध के दौरान राजा के सपने में भगवान गणेश जी आए और उन्हें आशीर्वाद दिया। राजा की युद्ध में विजय हुई और उन्होंने किले में मंदिर का निर्माण करवाया। दुनियाभर में यह एक ऐसा मंदिर है जहां भगवान गणेश अपने पुरे परिवार, दो पत्नी -रिद्धि और सिद्धि और दो पुत्र – शुभ और लाभ, के साथ विराजमान हैं।

रणथंभौर किले में स्थित गणेश मंदिर का इतिहास – Ranthambore Ganesh Temple History in Hindi

कहा जाता है कि राजा हमीर और अलाउद्दीन खिलजी के बीच में युद्ध हुआ था । युद्ध शुरू हुआ तो हम्मीर ने प्रजा और सेना की जरूरतों को देखते हुए बहुतसा खाद्यान और जरूरत की वस्तुओं को सुरक्षित रखवा लिया था। पर युद्ध लंबे अरसे तक चलने की वजह से हर चीज की कमी होने लगी थी। राजा, जो गणेश जी के परम भक्त थे। बहुत ज्यादा परेशान हो गए थे। तभी राजा हमीर के सपने में भगवान गणेश जी ने आकर विश्वास दिलाया की वे उनकी तमाम परेशानियो को दूर कर देंगे । अगली सुबह सभी को किले की दीवार पर भगवान गणेश जी की मूर्ति नजर आयी । जल्द ही युद्ध ख़त्म हो गया। इसके बाद हमीर राजा ने रणथंभौर किले में त्रिनेत्र गणेश मंदिर का निर्माण करवाया।

यहां पर भगवान गणेश की जो मूर्ति में भगवान की तीन आंखें हैं। यहां भगवान अपनी पत्नी के साथ विराजित हैं। भगवान गणेश के वाहन मूषक (चूहा) भी मंदिर में है। गणेश चतुर्थी पर किले के मंदिर में भव्य आयोजन किया जाता है। और विशेष पूजा अर्चना की जाती है।

इस गणेश मंदिर में रोज आते हैं हजारों की संख्या में पत्र :-

लोग आकर यहां अपनी शादियों का न्योता पहले गणेश जी को देकर जाते है। आजकल कार्ड देते हैं नहीं तो कुछ साल पहले पीले चावल न्यौता के रूप में दिए जाते थे। यहीं नहीं उन्हें भगवान तक पहुंचाने के लिए कठिन चढाई चढनी पड़ती थी |

यहां आने वाले सभी पत्रों को पुजारी भगवान गणेश को पढकर सुनाते है :-

यहां पहुंचते ही सभी पत्रों को पुजारी जी उसे पढ़ कर गणेश जी को सुनाते हैं पर यदि किसी और अन्य भाषा में पत्र लिखा गया हो तो उसे खोल कर गणेश जी के आगे चढ़ा दिया जाता है।

भगवान गणेश के वरदान पर खड़ा हो सका यह किला :-

भगवान गणेश के इस मंदिर के बारे में एक और मान्यता यह भी है कि एक समय ऐसा आया जब रणथंभौर किले का निर्माण कराया जा रहा था और तब हर रात उसकी दीवार गिर जाती थी। एक दिन श्री गणेश ने राजा को दर्शन दिया और कहा कि तुम पहले मेरा मंदिर बनवाओ फिर किले का निर्माण करो। इसके बाद राजा ने गणेश भगवान की बात मान ली और और बाद में किले का निर्माण पूरा हो सका।

रणथंभौर किले तक पहुंचने का रास्ता :-

त्रिनेत्र गणेश मंदिर दक्षिण पूर्व राजस्थान के सवाई माधोपुर मे स्थित रणथंभौर किले में है। यह कोटा से उत्तर पूर्व में और जयपुर, जो कि सबसे नजदीकि हवाई अड्डा है, उसे दक्षिण पूर्व में स्थित है।

हवाई मार्ग- रणथंभौर जयपुर एयरपोर्ट सब से नजदीक है। वहां तक हवाई मार्ग के आकर रेल या बस से रणथंभौर गणेश मंदिर पहुंचा जा सकता हैं।

रेल मार्ग-रणथंभौर किले सी सवाई माधोपुर रेल्वे स्टेशन है। वहां तक रेल से आकर सड़क मार्ग से रणथंभौर किले तक पहुंचा जा सकता | राजस्थान के लगभग सभी बड़े शहरों से रणथंभौर के लिए बसें चलती हैं।

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