कहानी : संस्कार क्या है

Best Moral Story in Hindi – संस्कार क्या है – संस्कार क्या होते है जैसे हमारे संस्कार होते है वैसा ही हमारा परिवेश होता है हर बात पर संस्कारो की ही चर्चा होती है आज हम आपको संस्कारो की एक कहानी सुनाने जा रहे है जिसे अप्पको पता लग जायगा क्या होते है संस्कार क्यों हमे अच्छे  संस्कार अपनाने चाहिए।
तो सुनते है कहानी –

कहानी : संस्कार क्या है – Inspiring Moral Stories in Hindi for Kids

एक  राजा के पास सुन्दर घोड़ी थी। कई बार युद्ध में इस घोड़ी ने राजा के प्राण बचाये और घोड़ी राजा के लिए पूरी वफादार थी कुछ दिनों के बाद इस घोड़ी ने एक बच्चे को जन्म दिया , बच्चा काना पैदा हुआ ,पर शरीर से हष्ट पुष्ट व सुडोल था।

बच्चा बड़ा हुआ , बच्चे ने अपनी माँ से पूछा :माँ में बहुत बलवान हूँ पर काना हूँ… यह कैसे हो गया ,इस पर घोड़ी बोली : बेटा जब में गर्भवती थी ,तू पेट में था  तब राजा ने  ऊपर सवारी करते समय मुझे एक कोड़ा मारा था  जिसके कारण तू काना गया। यह  बात सुन कर बच्चे को बहुत गुस्सा आया राजा पर और माँ से बोला -माँ में इसका बदला जरूर लूंगा।

माँ ने कहा राजा ने हमारा पालन पोषण किया है तू जो आज स्वस्थ है.. सुन्दर है उन्ही  पोषण से है राजा को एक बार गुस्सा आ गया  तो क्या इसका अर्थ ये नहीं की हम राजा को शती पहुँचाये। ,पर उस बच्चे के समझ में कुछ नहीं आया। उसने मन ही मन राजा से बदला लेने की सोच ली। एक दिन घोड़े को  ये मौका मिल गया. राजा उसे युद्ध पर ले गया।  युद्ध में लड़ते लड़ते राजा एक जगह घायल हो गया। घोड़े ने राजा को तुरंत उठाया और महल ले आया।

इस पर घोड़े को ताज्जुब हुआ और उसने अपनी माँ से पूछा -माँ आज राजा से बदला लेने का अच्छा मौका था ,पर युद्ध के मैदान में बदला लेने का ख्याल ही नहीं आया और न ही ले पाया ,मन ने गवाही नहीं दी.. इस पर घोड़ी हंस कर  बोली बेटा तेरे खून में और तेरे संस्कार में धोखा हे ही नहीं ,तू जानकर तो धोखा दे ही नहीं सकता है। तुझसे नमक  हरामी हो ही नहीं सकती ,क्योकि तेरी नस्ल में तेरी माँ का ही तो अंश है

वाकई यह सत्य है की जैसे हमारे संस्कार होते है ,वैसा ही हमारे मन का व्यवहार होता है हमारे पारिवारिक – संस्कार अवचेतन मस्तिषक में गहरे बैठ जाते है , माता -पिता जिस संस्कार के होते है उनके बच्चे भी उसी संस्कारो को लेकर पैदा होते है
हमारे कर्म ही ‘संस्कार’ बनते है  और संस्कार ही प्रारब्धो का रूप लेते है यदि हम कर्म सही करते है तो हमे प्राबध भी सही मिलते है और हम सफलता की और सही मार्ग पर होते है  और कर्मो का फल भी मीठा होता है

अतः  हमे प्रतिदिन कोशिश करनी होगी की हमसे जानबूझकर कोई धोखा ना हो और कोई गलत काम भी ना हो और हम किसी के साथ भी चीटिंग भी न करे बस इसी से ही हमारी जिन्दगी बेहतर होती जायेगी। जो भी परिस्थति हो  हमे ईश्वर पर छोड़ देनी चाहिये

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