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हिंदी में कृषि की जानकारी Hindi mein kheti ki jankari




भारत में लगभग 40  करोड़ लोग अपनी आजीविका के लिए अब भी खेती पर निर्भर हैं। लेकिन महंगाई और आवश्यकता के अनुसार पैदावार बहुत कम है। अब जरुरत है वैज्ञानिक तरीके से खेती करके पैदावार बढ़ाने की। आज मैंने इंटरनेट पर सर्च करके कुछ ऐसी वेबसाइटों को खोजा है जो किसानो को खेती के लिए प्रोत्साहित करती है और कुछ ऐसी साइटें भी है जो हमे खेती करने के बेहतर तरीके सिखाती है। खेती को लाभदायक बनाने के लिए दो ही उपाय हैं- उत्पादन को बढ़ाएँ व लागत खर्च को कम करें। कृषि में लगने वाले मुख्य आदान हैं बीज, पौध पोषण के लिए उर्वरक व पौध संरक्षण, रसायन और सिंचाई। खेत की तैयारी, फसल काल में निंदाई-गुड़ाई, सिंचाई व फसल की कटाई-गहाई-उड़ावनी आदि कृषि कार्यों में लगने वाली ऊर्जा की इकाइयों का भी कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण स्थान है। More

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नुजिवीडू सीड्स जिन बीजों का उत्पादन करती है, वह उनकी बेहतर गुणवत्ता के लिए पारंपरिक उत्पा‍दन कार्यक्रमों के अलावा, जैव तकनीक पर काफी निर्भर है। आज किसान नुजिवीडू सीड्स को इसकी बेहतरीन गुणवत्ता‍ नियंत्रण प्रक्रियाओं के साथ-साथ गहन एवं सख्त अनुसंधान तथा विकासात्मक प्रयासों के कारण भारत में एक सर्वाधिक विश्वासनीय कम्पनी मानते हैं। यहाँ पर खेती करने के कुछ तरीके भी बताये गए है। More

संपूर्ण विश्व में बढ़ती हुई जनसंख्या एक गंभीर समस्या है, बढ़ती हुई जनसंख्या के साथ भोजन की आपूर्ति के लिए मानव द्वारा खाद्य उत्पादन की होड़ में अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए तरह-तरह की रासायनिक खादों, जहरीले कीटनाशकों का उपयोग, प्रकृति के जैविक और अजैविक पदार्थो के बीच आदान-प्रदान के चक्र को (इकालाजी सिस्टम) प्रभावित करता है, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति खराब हो जाती है, साथ ही वातावरण प्रदूषित होता है तथा मनुष्य के स्वास्थ्य में गिरावट आती है। More

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ग्रामीण प्रौद्योगिकी का प्रमुख बल समाज के उन ग्रामीण क्षेत्रों में दिया जाता है जहां नवीन विकास तकनीकी के लाभ से लोग वंचित हैं। कपार्ट ऐसे विकासाधीन ग्रामीण प्रौद्योगिकी के कार्यक्रमों में पूर्ण सहयोग देता है, जैसे कि लाभहीन तथा प्रयोगशाला से निरीक्षित नवीन तकनीकी के प्रसार को पहुंचाना, जो अन्‍य संगठनों द्वारा नहीं दी जाती है।  More एक अच्छी गुणवत्ता मातम रोगज़नक़ों, और पोषक तत्वों से समृद्ध से मुक्त खाद जैविक खेती अभ्यास अपनाने के लिए एक शर्त है. खेत के कचरे से खाद की गुणवत्ता की तैयारी के लिए अलग अलग तरीकों को विकसित किया गया है. प्रकृति और किसान के साथ उपलब्ध कच्चे माल की मात्रा पर निर्भर करता है. किसी एक या निम्न विधियों में से एक संयोजन खाद के उत्पादन के लिए अपनाया जा सकता है. More

खेती से सालाना कमाई डेढ़ करोड़ :- रामशरण बताते है, शुरूआत धन, गेंहूँ की खेती से की| लेकिन उसमें भी प्रयोगों को जारी रखा| खेती में कुछ नया करने की चाह हमेश ही बनी रही| फिर एक मैगज़ीन से केले की खेती के बारे में जानकारी मिली और केली की खेती करने की ठान ली|” More 

कृषि – 2.5 एकड़ जमीन से दस-बारह लाख रु. की सालाना आमदनी! :- हरियाणा के सोनीपत जिले का अकबरपुर बरोटा गांव। यहां आने के पहले आपके मस्तिष्क में गांव और खेती का कोई और चित्र भले ही हो, परंतु यहां आते ही खेत, खेती एवं किसान के बारे में आपकी धारणा पूरी तरह बदल जाएगी। इस गांव में स्थित है श्री रमेश डागर का माडल कृषि फार्म जो उनके अथक प्रयासों एवं प्रयोगधर्मिता की कहानी खुद सुनाता प्रतीत होता है। उनकी किसानी के कई ऐसे पहलू हैं, जिनके बारे में आम किसान सोचता ही नहीं। आइए जानते हैं, ऐसे कुछ पहलुओं के बारे में उन्हीं के शब्दों में… More

 

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आवश्यक हो गया है खेती के तरीकों में बदलाव :- अगर बढ़ती जनसंख्या के लिए खाद्यान्न की पूर्ति निश्चित करना चाहते हैं तो हमें डॉ. शटर की इस चेतावनी को याद रखना होगा कि अगर हम विश्व के अरबों कुपोषित लोगों को भरपेट अन्न देना चाहते हैं तो हमें पूरे विश्व की खाद्य प्रणाली में क्रान्तिकारी परिर्वतन करने होंगे, उसे जैविक खेती पर आधारित करना होगा। More



आलू की खेती की उन्‍नत विधि :- आलू भारत की सबसे महत्‍वपूर्ण फसल है। तमिलनाडु एवं केरल को छोडकर आलू सारे देश में उगाया जाता है। भारत में आलू की औसत उपज 152 क्विंटल प्रति हैक्‍टेयर है जो विश्‍व औसत से काफी कम है। अन्‍य फसलों की तरह आलू की अच्‍छी पैदावार के लिए उन्‍नत किस्‍मों के रोग रहित बीजो की उपलब्‍धता बहुत आवश्‍यक है। इसके अलावा उर्वरकों का उपयोग, सिंचाई की व्‍यवस्‍था, तथा रोग नियंत्रण के लिए दवा के प्रयोग का भी उपज पर गहरा प्रभाव पडता है। More

 

सरसों एवं राई की गिनती भारत की प्रमुख तीन तिलहनी फसलों (सोयाबीन, मूंगफली एवं सरसो) में होती है जो देष में आई , पीली क्रान्ति के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है। इसके कारण भारत के द्वारा तेलों के आयात में न केवल आषातीत कटोती हुई बल्कि निर्यात की संभावनाए भी बढी है। राजस्थान में प्रमुख रूप से भरतपुर सवाई माधोपुर, अलवर करौली, कोटा, जयपुर आदि जिलो में सरसों की खेती की जाती है। सरसों में कम लागत लगाकर अधिक आय प्राप्त की जा सकती है। इसके हरे पौधों का प्रयोग जानवरों के हरे चारे के रूप में लिया जा सकता है। More 

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