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जीवन में इन 7 जगहों की यात्रा जरूर करें

हमने आपको पहले बताया था कि ये 10 चमत्कारिक वस्तुएं यदि मिल जाएं तो? लेकिन अब हम आपको बता रहे इससे कुछ भिन्न बातें। यदि आप अपने जीवन में चमत्कार और रोमांच पर भरोसा करते हैं तो ऐसा माना जाता है कि निश्‍चित ही आपके साथ ऐसा होगा। इसके लिए आप यात्राओं को अपना साथी बनाएं।
जादू, चमत्कार और रहस्य की दुनिया भी बड़ी निराली होती है। आपका भाग्य कब, कहां और कैसे आपको ले जाए, आप इसके बारे में अंदाजा भी नहीं लगा सकते। हालांकि हम यहां जो जानकारी लिख रहे हैं, वह आपकी यात्राओं से जुड़ी हुई है। हो सकता है कि इन 7 जगहों की यात्रा करते वक्त आपके साथ कुछ ऐसा घटे, जो कल्पना से परे हो। जीवन रहस्यों से भरा है। कब किसके साथ क्या घटित हो, यह कोई नहीं जानता। 
  
रेगिस्तान की यात्रा : प्राचीनकाल से ही रेगिस्तान, निर्जन, कठिन व निष्ठुर स्थान के रूप में जाने जाते हैं। हम में से केवल कुछ अतिउत्साही लोगों को छोड़कर रेगिस्तानी क्षेत्र यात्रा तथा व्यापार हेतु अवरोधक स्थल रहे हैं। रेगिस्तान को भारत में 'मरुस्थल' और 'मरुभूमि' कहा जाता है।

विश्व में सबसे बड़ा सहारा रेगिस्तान है। दुनिया के सबसे बड़े मरुस्थल सहारा के जैसा दुनिया में दूसरा कोई मरुस्थल नहीं है। यह मरुस्थल इतना बड़ा है कि यह कई देशों जैसे कि मोरक्को, मॉरिटानिया, माली, अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, लीबिया, नाइजर, चाड, सूडान एवं मिस्र तक फैला हुआ है।
भारत में राजस्थान एवं गुजरात में रेगिस्तान है। यह भी दुनिया के विशालकाय रेगिस्तानों में से एक है। भारत के रेगिस्तान या मरुस्थल को 'थार' कहते हैं। थार मरुस्थल लहरदार रेतीले पहाड़ों का विस्तार है, जो विशाल भारतीय मरुस्थल भी कहलाता है। इसका कुछ भाग भारत के गुजरात एवं राजस्थान में और कुछ पाकिस्तान में स्थित है। 2,00,000 वर्ग किमी में फैले इस क्षेत्र के पश्चिम में सिन्धु द्वारा सिंचित क्षेत्र है, इसके दक्षिण-पूर्व में अरावली का विस्तार है और दक्षिण में कच्छ का रेगिस्तान है, तो पूर्वोत्तर में पंजाब का भू-भाग है।
रेगिस्तान धरती पर अति गर्म स्थान है, लेकिन रात में यहां की रेत सबसे ठंडी होती है जिस पर सोना बहुत ही आनंददायक होता है। दिन में तो आपका नंगे पैर पैदल चलना भी मुश्किल है। मीलों दूर तक फैले रेगिस्तान में भटकने वाले या तो प्यास से मर जाते हैं या रेत की आंधी से। रेगिस्तान के किनारे पर ही मानव आबादी रहती है जबकि रेगिस्तान में कोई नहीं रहता।
खानाबदोश जातियां इन रेगिस्तान को अच्छी तरह जानती हैं, लेकिन यदि आप इन रेगिस्तान में भले ही कुछ लोगों के साथ चले गए हैं और आपको रेगिस्तान की प्रकृति का कोई अनुभव नहीं है, तो आप कब तक खुद को जिंदा रख पाएंगे?

जंगल की यात्रा : ऐसे बहुत से लोग रहे हैं, जो भारत के अबूझमाड़, काजीरंगा, कान्हा या अफ्रीका के कालाहारी रेगिस्तान के जंगल या अमेजन में रास्ता भटककर घूम गए और उनमें से कुछ तो लौटे नहीं लेकिन कुछ एक माह और कुछ पूरे 1 साल बाद लौटे। जंगल में सबसे ज्यादा खतरा रहता है किसी जंगली जानवर से आपका सामना होना।

जो लौट आए उनकी कहानियां सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। आप भी जंगल की रोमांचकारी सैर करने की सोचते होंगे। हालांकि जंगल देखने जाना किसी टूरिस्ट की तरह और जंगल की रोमांचक सैर करना दोनों ही बातों में जमीन-आसमान का फर्क है। यदि आप जंगल की रोमांचकारी सैर करने की सोच रहे हैं तो ध्यान रखें कि कभी भी बिना योजना और सुरक्षा के न निकलें अन्यथा आपको लेने के देने ही नहीं, बल्कि जान के लाले भी पड़ जाएंगे। जंगल में दो रात बिताना कितना मुश्किल होता, यह कोई जंगल में रहकर ही जान सकता है।
अगर आप कभी किसी ऐसे एरिया में ट्रेवल करने वाले हैं, जहां पर फोन, पुलिस और इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है तो आपके सामने खतरा और रोमांच है जिसके लिए आपको हमेशा तैयार रहना होगा। देखना होगा कि आपके पास पीने का पानी, खाने का भोजन और सुरक्षा से रहने का सामान कितना है? आपको यह भी समझना होगा कि आसपास नदी कितनी दूर है और पहाड़ी कितनी ऊंची? कौन-सी दिशा किधर और कितना भयानक है जंगल? सबसे जरूरी कि आपको जानवर और जंगल के बारे में कितना ज्ञान है? यदि ये सब हैं तो आप भटकने के बाद सकुशल घर लौट आएंगे।
हालांकि आपकी इस रोमांचकारी यात्रा में आपको जो अनुभव होगा उसको बयां तो आप ही कर सकते हैं। हो सकता है कि कोई भटकती आत्मा नजर आ जाए या किसी मांसाहारी जानवर से आपका सामना हो जाए। खासकर आपको रात में जंगल के जंगल होने का अहसास होगा।
जंगल में सबसे ज्यादा खतरा रहता है किसी जंगली जानवर से आपका सामना होना। शेर, चीते या बाघ से कहीं ज्यादा खतरनाक होते हैं जंगली कुत्ते, भेड़िये और लकड़बग्घे। दरअसल, ये बहुत तादाद में होते हैं और इनकी सूंघने की क्षमता भी अन्य जानवरों से कहीं ज्यादा होती है। ये लगभग 16 से 20 किलोमीटर दूर से ही सूंघ लेते हैं अपने शिकारी को। जंगल से बाहर निकलने, खाने-पीने या रात गुजारने से पहले जंगली जानवरों से बचने के बारे में आप सबसे पहले सोचें अन्यथा आप वक्त से पहले ही मारे जाएंगे।
समुद्री यात्रा : आप किसी द्वीप की समुद्र यात्रा पर हैं और अचानक आपको मिल जाए कोई समुद्री खजाना तो? बताया जाता है कि अनजान और सुनसान द्वीपों पर आपको कुछ भी मिल सकता है। एक यात्री को एक जहाज के टूटे हुए अवशेषों के साथ ही द्वीप के किनारे सोने से भरा एक बक्सा मिला था।
भारत में समुद्र किनारे बसे राज्यों में प्रमुख रूप से तमिलनाडु, केरल, आंध्रप्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा आते हैं। ओडिशा में जहां भगवान जगन्नाथ का प्राचीन और चमत्कारिक मंदिर है वहीं तमिलनाडु में रामेश्वरम का प्राचीन शिव मंदिर है। इसी तरह सभी तटवर्ती राज्यों में कई प्रमुख और प्रसिद्ध तीर्थस्थल हैं। 

समुद्री यात्रा के संस्मरण पर हजारों किताबें लिखी गई हैं। समुद्री लुटेरे, सिंदबाद जहाजी और समुद्र के सम्राट नाम से कई किताबें लिखी गई हैं। समुद्री यात्रा के रोचक और रोमांचक संस्मरणों को पढ़कर हर कोई आश्चर्य करेगा कि आखिर समुद्र की दुनिया एक अलग ही दुनिया है जिसका धरती की दुनिया से कोई मेल नहीं। हाल ही में एक फिल्म आई थी 'लाइफ ऑफ पाई'। निश्चित ही यह सच्ची घटना पर आधारित फिल्म न हो, लेकिन ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने समुद्र में कई दिन जिंदगी और मौत के बीच गुजारे हैं।
रोमांचक समुद्री यात्राओं के बारे में जहाजों के कप्तानों ने अपनी डायरियों में अपने दुर्लभ और रोमांचक अनुभवों को दर्ज किया है। वास्को डि गामा, कोलंबस के नाम तो समुद्री यात्रा के लिए प्रसिद्ध हैं ही, कई बार तो लोगों ने ऐसे-ऐसे जीव देखे हैं जिसके बारे में सुनकर आश्चर्य होता है कि आखिर यह चीज क्या है? यह कोई जीवधारी है या निर्जीव वस्तु? कई बार जहाज निकला कहीं और के लिए और पहुंच गया किसी अनजान द्वीप पर। कई जहाज तो आज तक वापस लौटकर नहीं आए।
भारतीय उपमहाद्वीप को घेरे हुए नीले पानी में यात्रा करना स्‍मरणीय अनुभव होता है। भारत में समुद्री यात्रा का उपयोग मौर्य और मध्यकाल में अधिक था। अधिकांशत: अरब सागर का उपयोग लक्षद्वीप पहुंचने और बंगाल की खाड़ी का उपयोग अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह पहुंचने में किया जाता है। ये दोनों द्वीप समूह भारतीय उपमहाद्वीप के हिस्‍से हैं। 
बरमूडा त्रिभुज रहस्य : अटलांटिक समुद्र में एक ऐसी जगह है जिसे 'बरमूडा त्रिभुज' कहा जाता है। पिछले 100 वर्षों में बरमूडा त्रिभुज में लोगों की मान्यताओं के अनुसार असाधारण रूप से ज्यादा संख्या में वायुयान और जलयान रहस्यमय रूप से कोई सुराग न छोड़ते हुए अदृश्य हुए हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार इस क्षेत्र में 100 के आसपास वायुयान, जलयान और लगभग 1,000 व्यक्ति लापता हुए हैं। 


हिमालय की वादियों में सैर : हिमालय पर्वत की बर्फ से लदी ऊंची पर्वत चोटियां सदैव से ही यहां आने वाले पर्यटकों को आकर्षित एवं उत्साहित करती हैं। भारत में जम्मू एवं कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल, सिक्किम, उत्तराखंड और अरुणाचल ऐसे राज्य हैं, जहां हिमालय के साक्षात दर्शन होते हैं। हिमालय में एक और जहां दुर्गम दर्रों के दर्शन होते हैं वहीं दूसरी ओर कई तीर्थों के दर्शन भी होते हैं।

हिमालय की गोद में अमरनाथ, वैष्णोदेवी, गंगोत्री, यमुनोत्री, हरिद्वार, ऋषिकेश, सिन्धु नदी दर्शन, लामायूरू मठ, शांति स्तूप, एंचेय मठ, दुब्दी मठ, मंदिर, पेमायंगत्से, कैलाश पर्वत, कैलाश मानसरोवर आदि अनेक हिन्दू, बौद्ध, जैन और सिखों के तीर्थस्‍थल हैं।
अलौकिक प्राकृतिक सुंदरता और बर्फों से लदे पहाड़ों को देखते ही मन और मस्तिष्क में शांति एवं आध्यात्मिक अनु‍भूति का अहसास होता है, लेकिन यह नजारा दूर से जितना अच्छा लगता है उसका सामना होने पर यह उससे कहीं ज्यादा खतरनाक भी है। जिस तरह रेगिस्तान में रेतीले तूफान होते हैं उसी तरह हिमालय में बर्फीले तूफान या हिमस्खलन एक झटके में आपकी जीवनलीला समाप्त कर सकते हैं। यहां की बारिश भी उतनी ही खतरनाक है जितनी कि उत्तरी ध्रुव की ठंड। 
जब आपका सामना चारों तरफ रूई के ढेर जैसे फैले बर्फ के पहाड़ों से होता है और पूरी सड़क भी जब बर्फ से ढंकी हुई होती है तो देखते वक्त यह नजारा बहुत ही शांत और अच्छा लगता है, लेकिन इस शांति में कभी भी कुछ भी घटित हो सकता है।
भारत में हिमालयीन राज्यों की यात्रा करना जीवन का सबसे बड़ा रोमांच सिद्ध हो सकता है। यदि आप रहस्य, रोमांच और खतरों का अहसास करना चाहते हैं तो लद्दाख, सिक्किम या अरुणाचल की यात्रा पर एक बार चलें जाएं। यकीन मानिए आप जिंदगीभर नहीं भूलेंगे कि कहां गए थे।
नर्मदा या गंगा की परिक्रमा : यह एक धार्मिक यात्रा है, जो पैदल ही पूरी करना होती है। लेकिन जिसने भी नर्मदा या गंगा में से किसी एक की परिक्रमा पूरी कर ली उसने अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा काम कर लिया। उसने मरने से पहले वह सब कुछ जान लिया, जो वह यात्रा नहीं करके जिंदगी में कभी नहीं जान पाता। नर्मदा की परिक्रमा का ही ज्यादा महत्व रहा है।

नर्मदाजी की प्रदक्षिणा यात्रा में एक ओर जहां रहस्य, रोमांच और खतरे हैं वहीं अनुभवों का भंडार भी है। इस यात्रा के बाद आपकी जिंदगी बदल जाएगी। कुछ लोग कहते हैं कि ‍यदि अच्छे से नर्मदाजी की परिक्रमा की जाए तो नर्मदाजी की परिक्रमा 3 वर्ष 3 माह और 13 दिनों में पूर्ण होती है, परंतु कुछ लोग इसे 108 दिनों में भी पूरी करते हैं। परिक्रमावासी लगभग 1,312 किलोमीटर के दोनों तटों पर निरंतर पैदल चलते हुए परिक्रमा करते हैं। श्रीनर्मदा प्रदक्षिणा की जानकारी हेतु तीर्थस्थलों पर कई पुस्तिकाएं मिलती हैं।
पहाड़ों की यात्रा : वैसे तो उपरोक्त यात्रा में पहाड़ों की यात्रा हो ही जाती है, लेकिन आप ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों पर चढ़ने या उन पर यात्रा करने का शौक रखते हैं तो आप भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की यात्रा करें। उधर की यात्रा में आपको खूब ऊंचे-ऊंचे पहाड़ देखने को मिलेंगे। यदि आप पूर्वोत्तर में ही रह रहे हैं तो फिर आपसे क्या कहें, आप केरल का समुद्र या मध्यप्रदेश के जंगल देखिए।
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