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दुष्प्रभाव सुरक्षित गर्भ-निरोधक का - Side effects of safe contraception

आजकल हर वर्ग की महिलाए और लड़कियां निश्चिंत होकर कंडोम का उपयोग करती है कंपनियों द्वारा प्रचरित क्या जाने वाला कंडोम आपके लिए क्यों सुरक्षित नहीं क्या ये जानने का प्रयास किया है- शायद आपने जरुरत ही नहीं समझा है -


हर वर्ग के लोग चूँकि ये मानते है कि कंडोम गर्भनिरोधक के रूप में आसान और सुरक्षित उपाय है लेकिन ये स्त्रियों में लम्बे समय तक प्रयोग से इसका दुष्प्रभाव देखने को मिलता है -लेकिन इसके बावजूद भी लड़कियॉं और महिलाए धड़ल्ले से कंडोम का उपयोग करने में कोई संकोच नहीं कर रही हैं-

अनेक डॉक्टर और क्लिनिकल सर्वेक्षण के बाद कई दुष्परिणाम सामने आये है जिनके परिणाम स्वरूप अनेक स्त्रियों का सेक्स-जीवन समाप्त हो रहा है जो आने वाले समय में स्त्रियों और पुरुषो दोनों के लिए ही चिंता का विषय है- अध्ययनों से जो दुष्परिणाम निकल कर सामने आये है वो निम्न-लिखित रूप से गौर करने लायक है -


होने वाले दुष्परिणाम-

गर्भ-निरोधक के रूप में मिली मान्यता के अनुसार कंडोम को सुरक्षित माना जाता है- ये गर्भ-निरोधक गोलियों की अपेक्षा सस्ता भी है और किसी भी साइड इफेक्ट का डर भी नहीं है लेकिन इसके सबसे जादा घातक परिणाम महिलाओं में ही देखने को मिलते  है -
लगातार यदि सप्ताह में दो या उससे अधिक बार कंडोम का उपयोग किया जाता है तो महिलाओं की योनी की आंतरिक परत और झिल्ली में होने वाली संवेदन -शीलता  समाप्त हो जाती है अर्थात काम -उत्तेजना का दिनों-दिन अभाव होने लगता है -प्राक्रतिक रूप से स्खलित होने वाला स्राव धीरे-धीरे कम होता जाता है और जननांग में  चिकनाई की कमी होती जाती है कुछ समय बाद कुछ लोगो में बिलकुल भी नहीं रह जाती है - जिसके चलते बार -बार कंडोम का प्रयोग आंतरिक परत के सूखेपन के कारण दर्द और खराश ,जलन ,खुजली जैसे रोग उत्पन्न होते है -



जो महिलाए कंडोम का अत्यधिक ही प्रयोग करती है कुछ समय बाद उनकी योनि में यौनेच्छा तथा रोमांच पैदा करने वाली स्वाभाविक चिकनाई और पुरुष के स्पर्श की सुखद अनुभूति कम या समाप्त ही हो जाती है-जिससे उनके मन में सेक्स के प्रति रुचि और संवेदना तो कम या समाप्त होती देखी ही गयी है-इस प्रकार की स्त्रियों के जीवन में सेक्स क्रिया भी दु:खदायी शारीरिक श्रम की भांति ही पीड़ादायक अनुभव में बदल जाती है-इस कारण ऐसी स्त्रियॉं बिना कंडोम सेक्स करने से कतराने लगती हैं। ऐसी सूरत में उनके लिए कंडोम का उपयोग अपरिहार्य हो जाता है-



प्रकृति ने स्त्री जननांगों को खुद ही अपनी प्रतिरक्षा की जन्मजात शक्ति प्रदान की है लेकिन यदि सप्ताह में दो बार से अधिक कंडोम का उपयोग किया जाता है तो कंडोम योनि की प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचा सकता है-इसके उपयोग से योनि की अम्लीय वातावरण में उथल-पुथल पैदा हो जाती है-


कंडोम का प्रयोग योनी-ग्रीवा में छीलन और कटाव जैसी स्थिति उत्पन्न होने पर दर्दनाक घाव भी होते देखे गए है और सुजन आ जाता तो बार-बार क्रीड़ारत होने पर जख्म फिर हरे हो जाते है और रक्त स्राव जैसी स्थिति हो जाती है कुछ महिलाओं को ये लगता है कि उनको असमय मासिक चक्र आ गया है और लापरवाही से उनको गर्भाशय में और जननांगों में संक्रमण फैल सकता है -कभी कभी जादा लापरवाही कैंसर का कारण भी बन जाती है -
अच्छी कम्पनियों के लेटेक्स कंडोम आपको यौन-रोगों से तो बचा लेते है परन्तु स्त्री से की गई प्रतिक्रिया को स्वाभाविक रूप से कम करते है इसका खराब दुष्प्रभाव जननांगों दाने या घाव  के  रूप में होता है -
पुरुष को लगातार कंडोम के उपयोग से स्त्री की योनी की चिकनाई या नाजुकता समाप्त होने पर और रूखापन आ जाने से कामक्रीड़ा में परेशानी होती है उसका स्वयं का जननांग कट और छिलने लगता है जिससे  छाले और जख्म की संभावना बढ़ जाती है -

अत : जीवन आपका है इसे किस तरह जीना है इस पर विचार करे और सुरक्षित जीवन जीने के लिए सुरक्षित तरीके अपनाए मगर आगे आपको कष्ट हो येसे तरीको से बचे -

मज़बूरी है तो फिर बहुत अच्छी और प्रमाणिक कम्पनियों द्वारा उपलब्ध कराई गई उम्दा लेटेक्स की बनी हुई कंडोम का प्रयोग माह में एक या दो बार ही प्रयोग करे -
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