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फ्लिप्कार्ट का इतिहास - Flipkart Ka Itihas

E-Commerce Company Flipkart History : व्यस्तता के इस दौर मे जहा हर पल व्यक्ति को समय की कमी का एहसास होता है, उसी के साथ उसे अपनी आवश्यकताओं को भी पूरा करना होता है, अकेले व्यक्ति को यह सब करना बहुत ही विकट समस्या है.

जिस तरह आम ज़िन्दगी मे हर छोटी-बड़ी वस्तु खरीदने के लिये व्यक्ति बाजार की तरफ दौड़ लगाता है. जिसमे भी उसे कई कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है . जैसे- समय की समस्या, जाने-आने की समस्या, रुपयों से संबंधित समस्या इस प्रकार की अनेक समस्या का सामना हर व्यक्ति को करना पड़ता है.
चीजों को आसान करना आज के समय मे हर किसी के बस की बात नही है, उसके लिये सोच और उस सोच को एक आम इंसान की सुविधा के अनुसार कर दिखाना बहुत ही बड़ी बात है . बदलते समय के साथ टेक्नोलॉजी ने इतना विशाल रूप धारण कर लिया है, जिससे व्यक्ति सुई से लेकर जहाज तक घर बैठे खरीद सकता है. e-commerce की दुनिया मे, बहु-प्रसिद्ध और चर्चित एक ऐसी वेबसाइट जिसने, अपनी सेवाओ के माध्यम से,घर बैठे एक क्लिक पर, अपने जरुरत का सामान उपलब्ध कराया है. Flipkart के नाम से तो, हर कोई परिचित है. Flipkart का उपयोग भी सभी करते है पर, इसकी स्थापना कैसे हुई, और यह सफलता पर कैसे पहुचा, ये हर कोई नही जानता . हम अपने इस अंक मे, इसकी बहुत ही खुबसूरत सी journey को देखेंगे जोकि शुरूवात से अब तक की है

फ्लिप्कार्ट का इतिहास (Flipkart History)

इंडस्ट्रीज प्राइवेट कम्पनी
उत्पत्ति   2007
जनक   सचिन बंसल व बिन्नी बंसल
मुख्यालय बैंगलोर,कर्नाटक, इंडिया
सेवाए   ई-कॉमर्स (ऑनलाइन सर्विसेज)
स्लोगन   “अब हर Wish होगी पूरी .”
परिचय (Introduction)
Flipkart 2007 मे बंसल ब्रदर्स के द्वारा चालू गई एक e-commerce कंपनी की शुरूवात थी और उन्होंने सफलता भी हासिल की. जिसे मुख्य रूप से सिंगापुर मे रजिस्टर्ड किया गया है तथा इंडिया के बैंगलोर (कर्नाटक) मे इसका मुख्यालय है.
flipkart 

बंसल ब्रदर्स ने भारतीय प्रोद्योगिक संस्थान, दिल्ली द्वारा अपनी शिक्षा पूरी की है. शिक्षा पूरी करने के बाद अमेज़न (Amazon) पर काम करके अनुभव प्राप्त किया. अपने सपनोँ को सच करने के लिये अपने बुलंद होसलों के साथ मात्र 4 लाख रुपयों से अपनी e-commerce कंपनी की शुरूवात की. जिसमे आज लगभग तैतीस हजार (33000) कर्मचारी कार्यरत है. बहुत ही कम समय में कामयाबी हासिल कर पुरे विश्व की सफल कंपनियों मे से एक बनी. सबसे पहली वस्तु किताबे थी, जिससे अपनी वेबसाइट पर लाया गया था. धीरे-धीरे सभी चीजों की शुरूवात की गई.
अनुमानित लाभ
किसी भी कम्पनी के बारे मे बिल्कुल सही लाभ की जानकारी देना मुश्किल ही नही असंभव है. हम सिर्फ अनुमानित आकड़े ही बता सकते है, जो कम्पनी ने राजस्व के रूप मे हासिल किया है.
  • 2008 मे, 4 करोड़ लगभग .
  • 2009 मे, 20 करोड़ लगभग .
  • 2010 मे, 75 करोड़ लगभग .
  • 2011 से, 31 मार्च 2012 तक, 500 करोड़ लगभग कहा जाता है.
  • 2015 मे, लगभग 5000 करोड़ का टारगेट था कम्पनी का.
Flipkart की सफलता का मंत्र
सफलता व असफलता एक ही सिक्के के दो पहलु है. हर व्यक्ति को अपने जीवन मे, दोनों का सामना करना होता है. असफलताओ के समय, डट कर उसका सामना करना, अपने आप मे, भविष्य की बहुत बड़ी सफलता की घोषणा करना है. Flipkart भी बिल्कुल उसी तरह है. इसकी सफलता के अपने ही मूल मंत्र है. जैसे-
  • आसान सेवा देना – Flipkart ने शुरूवात से अपने ग्राहकों को बहुत ही आसान सेवाओ का लाभ दिया है. जिससे सामान बुलाने मे कोई भी परेशानी नही होती है.
  • आसान वेबसाइट – वेबसाइट का आसानी से कोई भी उपयोग कर सकता है.
  • सेवाए – घर पहुच बेहतर सेवाए देकर अपने ग्राहकों को सन्तुष्ट किया है.
  • भुगतान के कई तरीके – Cash on Delivery (COD) तथा सभी प्रकार के कार्ड की सुविधाओ को चालू कर भुगतान की प्रकिया को आसान कर दिया है.
इस प्रकार Flipkart ने 2007 से अब तक समय-समय पर बदलाव कर ग्राहकों को अच्छी सेवाए देकर बहुत अच्छे लाभ के साथ वैश्वीकरण के युग मे खुद की साख को बरकरार रखा है.

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