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नेपाल भूकम्प में पतंजलि योगपीठ का अमूल्य योगदान - Nepal Bhukamp Me Patanjali Yogpeeth Ka Amulya Yogdan

Nepal Bhukamp Me Patanjali Yogpeeth Ka Amulya Yogdan : 25 अप्रैल 2015 को नेपाल में आए जोरदार भूकंप ने करीब 9 हजार लोगों की जिंदगी छीन ली। इसमें लगभग 22,309 लोग घायल हुए थे।  भूकंप से 19वीं सदी के धरहरा टावर, बुद्धनाथ के स्तूप और दरबार चौक समेत 133 ऐतिहासिक इमारतें ध्वस्त हो गई थीं। 95 इमारतें आंशिक रूप से ध्वस्त हुई थीं और 515 ऐतिहासिक इमारतों को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचा था।नेपाल के 14 जिलों में 25 अप्रैल और 12 मई 2015 को आए 2 जबर्दस्त भूकंप से करीब 8 लाख घर ध्वस्त हो गए थे।

नेपाल भूकंप के लिए चित्र परिणाम    

 Nepal Bhukamp Sampurn Jankari
योग गुरु रामदेव  24 से 29 अप्रैल के बीच योग शिविर के लिए अपने सहयोगी आचार्य बालकृष्ण के साथ नेपाल की राजधानी में ही थे । ‘दुखी होकर घटना के बारे में बताते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि मेरी आंखों के सामने एक पुरानी बहुमंजिला इमारत ढह गई और कई लोग इसके अंदर फंस गए।’तुंडी खेल मैदान में दो लाख से अधिक लोग एकत्र हुए थे जो योग शिविर का आयोजन स्थल था। यह काठमांडू का सबसे बड़ा खुला क्षेत्र भी है। सब लोगों ने वहां शरण ली। वे सभी पतंजलि योगपीठ की देख - रेख में थे। ‘नेपाल में पतंजलि योगपीठ ने चिकित्सकों और स्वयंसेवियों के जरिए हर संभव आपात एवं राहत अभियान शुरू किया था । मैदान में एकत्र लोगों के लिए भोजन पकाने का कार्य बड़े पैमाने पर शुरू किया गया है। सभी कार्य बाबा रामदेव के ट्रस्ट patanjali yogpeeth nepal और  patanjali rahat kosh’ की देख रेख में किया गया। 


नेपाल में आये भूकंप से हजारों की संख्या में लोग बेघर और बच्चे अनाथ हो गये हैं। इसलिए अब योग गुरू बाबा रामदेव के पंतजलि योगपीठ ने भूकंप में अनाथ हुए 500 बच्चों को गोद ले लिया है।
बाबा रामदेव सोमवार को दिल्ली लौट आये हैं लेकिन उनके करीबी सहयोगी आचार्य बालकृष्ण फिलहाल नेपाल में ही रहेंगे और वहां पतंजलि द्वारा गोद लिये बच्चों की व्यवस्था और अन्य राहत कार्यों में मदद करेंगे।

गोद लिए गये अनाथ बच्चों को नेपाल में काठमांडू में पतंजलि योगपीठ के चिकित्सालय और योगपीठ में ही रखा जायेगा और इन सभी बच्चों को पांचवीं तक शिक्षा, भोजन, रहने की व्यवस्था, देखरेख और चिकित्सा की व्यवस्था बाबा रामदेव का योगपीठ ही करेगा।

गौरतलब है कि शनिवार को जिस वक्त भूकंप आया था, उस समय बाबा रामदेव खुद ही वहां थे। जिस पंडाल से वो पांच मिनट पहले योग शिक्षा देकर बाहर निकले थे वो पंडाल भूकंप में तार-तार हो गया था।

खुद बाबा ने कहा था कि उन्होंने इससे पहले इस तरह की त्रासदी पहले नहीं देखी थी। उन्होंने भारत आने से उस दिन तुरंत मना कर दिया था और वहां के पीड़ितों के लिए राहत कार्यों में लग गये थे।

रामदेव ने इस मुश्किल घड़ी में नेपाल के लोगों के साथ एकजुटता जाहिर की। उन्होंने भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से वरीयता आधार पर पीड़ितों की मदद करने की अपील की। उन्होंने प्रथम पतंजलि आयुर्वेद कॉलेज एंड हॉस्पिटल के उद्घाटन का कार्यक्रम और नेपाल में प्रथम आचार्याकुलम का शिलान्यास टाल दिया। और अपना पूरा ध्यान सभी की सेवा में लगा दिया। नेपाल में पतंजलि योगपीठ का एक बहुमूल्य योगदान रहा है। और जानकारी के लिए आप बाबा रामदेव की वेबसाइट पतंजलि योगपीठ नेपाल की वेबसाइट चेक कर सकते हो।  

धन्यवाद !
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