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मॉरीशस : अफ्रीका का एक देश जहा कण - कण में है भारतीयता की खुशबू | Janiye Mauritius City Ke Bare Me

पिछले कुछ दिनों से Madhushala.info वेबसाइट एक देश में बहुत ज्यादा Open हो रही थी। मेने पहले इतना ध्यान नहीं दिया पर आज मेने सोचा क्यों न इस देश के बारे में नेट पर देखा जाएँ।  तब मेने सर्च किया मॉरिशस के बारे में तब मुझे पता चला की यहाँ से यह साइट इतनी ज्यादा कैसे ओपन हो रही है।  बात यह है की वैसे तो मॉरिशस अफ्रीका का एक शहर है परन्तु यहाँ हिन्दी को चाहने वाले भारत से कम नहीं है यहाँ तक की इस देश के प्रधानमंत्री भी भारतीय मूल के नागरिक है : "अनिरुद्ध जगन्नाथ " अनिरुद्ध जगन्नाथ मॉरिशस के राजनीतिज्ञ और वर्तमान प्रधानमंत्री हैं। वो वर्ष 2003 से 2012 तक देश के राष्ट्रपति थे। इससे पहले भी वो देश के प्रधानमन्त्री भी रह चुके हैं। जगन्नथ भारतीय मूल के हैं। टीवी पर न्यूज़ में पहले भी मेने कई बार इस देश का नाम सुना था पर इस के बारे में इतनी ज्यादा जानकारी नहीं थी जो आज मुझे है तब मेने सोचा क्यों न में मेरे प्यारे विजिटरों के साथ इस जानकारी को शेयर करू।  अभी कुछ दिनों पहले भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी  ने भी इस देश की यात्रा की थी वाकई में बहुत सुंदर और प्यारा देश है मॉरिशस।
 

 चारों ओर समुद्र से घिरे मॉरीशस  का मौसम रहता है सुहाना. मोती के समान सुंदर तथा सफेद मारीशस के चारों तरफ 100 मील का समुद्री तट और मीलों तक फैली रूपहली रेत ही इसका मुख्य आकर्षण हैं। 


 



मॉरीशस में हिंदी भाषा का इतिहास लगभग डेढ़ सौ वर्षों का है। स्वतंत्रतापूर्व काल में यह भाषा बीज रूप में थी। भोजपुरी बोली के माध्यम से हिंदी विकसित भाषा को करने में भो तो का विशेष योगदान रहा है। खेतों में कड़ी धूप में गूँजने वाले लोक गीतों में, शाम की "संध्या" में, रामायण-गान में, त्योहारों में, हर कही यह भाषा अबाध्य रूप से बढ़ती चली गई। बैठकाओं में हिंदी भाषा का अध्ययन-अध्यापन होने लगा। 

मीडिया के क्षेत्र में भी मॉरीशस में हिंदी भाषा का एक अलग स्थान है। रेडियो से लेकर टीवी तथा इंटरनेट में भी हिंदी का प्रचार-प्रसार ज़ोर-शोर से हो रहा है। एम.बी.सी. के रेडियो तथा टीवी चैनलों में हिंदी समाचार प्रस्तुत किए जाते हैं। साथ ही साथ मनोरंजन, संस्कृति, धर्म, समाज, शिक्षा आदि विषयों पर भी हिंदी कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं। हिंदी को वैश्विक स्तर पर एक महान भाषा के रूप में स्थान दिलाने के लिए बॉलिवुड का भी मुख्य स्थान है। इसी कारण अहिंदी भाषियों की रूची हिंदी सीखने की ओर बढ़ रही है।मॉरीशस में भी हिंदी गानों, फ़िल्मों,धारावाहिकों तथा अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से हिंदी भाषा के प्रति लोगों की रूचि बढ़ती जा रही है।                     

हिंदी भाषा के संवर्धन में मॉरीशस की अनेक संस्थाओं की अहम भूमिका रही है। ये संस्थाएँ हिंदी को बढ़ावा देने हेतु अनेक कार्यक्रम आयोजित करती है। कुछ संस्थाओं के नाम इस प्रकार है हिंदी संगठन, विश्व हिंदी सचिवालय, हिंदी प्रचारिणी सभा, महात्मा गाँधी संस्थान, आर्य सभा मॉरीशस, इंिदरा गाँधी सांस्कृतिक केंद्र, हिंदी लेखक संध आदि। इन संस्थाओं ने हिंदी भाषा को शैक्षणिक, सांस्कृतिक तथा धार्मिक रूप से प्रचारित किया है। हिंदी संगोष्ठियों तथा अंतराष्ट्रय कार्यक्रमों के आयोजन के साथ ही हिंदी पत्र-पत्रिकाओं के प्रकाशन भी इनके द्वारा होते आए हैं। सुमन, विश्व हिंदी समाचार, विश्व हिंदी पत्रीका, आर्योदय, दर्पण, वसंत, पंकज, भाल-सखा आदि पत्रिकाओं में हिंदी से संवंिधत रचनाएँ प्रकाशित की जाती हैं।
                     

मॉरीशस में पिछले डेढ़ सौ वर्षों के अपने इतिहास में जिस प्रकार से हिंदी भाषा ने प्रगति की है उससे यह निश्चित ही है कि इसका प्रचार-प्रसार भविष्य में भी होता रहेगा। मॉरिशस में रोज़गार के लिए भी हिंदी के क्षेत्र में अनेक उपक्षेत्र हैं जैसे शिक्षा, मीडिया, प्रशासन आदि। स्कूलों और कॉलेजों के साथ ही विश्वविधालय में हिंदी पढ़ने वाले छात्रों की संख्या में हर वर्ष वृद्वि होती जा रही है। हिंदी से संबंिधत गतिविधियों में भाग लेने वाले प्रतिभागियों की संख्या भी संतोषजनक है। छात्र गण हिंदी-टंकन कार्य में भी रूचि दिखा रहे हैं। अनेक मॉरीशसीय हिंदी ब्लॉग भी उपलब्ध कराए गए हैं जिनके माध्यम से शिक्षक, छात्र गण एवं हिंदी प्रेमी एक ही मंच पर अपने विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं और अपनी रचनाओं को भेजकर हिंदी साहित्य में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।           
                                              
        

मुझे यह जान कर बहुत ख़ुशी है की भारत के आलावा और भी देश है जहा हिन्दी को इतना महत्व दिया जाता है।


 धन्यवाद मॉरिशस !

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