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आचार्य चाणक्य की मृत्यु कैसे हुई | Acharya Chanakya Ki Mrityu Kaise Hui In Hindi

Acharya Chanakya Jivan Parichay, Mrityu , Itihas Or Anmol Vachan : आज कौन नही जानता आचार्य चाणक्य को उन्होंने अपने ग्रन्थों से राजनीती और कूटनीति को एक नई दिशा दी है।  इतिहास की बात करें, तो कुछ जगहों पर कौटिल्य के नाम से विख्यात आचार्य चाणक्य ने ही नंदवंश का नाश करके चन्द्रगुप्त मौर्य को राजा बनाया। चन्द्रगुप्त मौर्य को सीख प्रदान की, एक महान राजा बनने के उपदेश दिए और मौर्य समाज के झंडे को स्वतंत्र हवा में लहरा सकने की सक्षमता प्रदान की।

 आचार्य चाणक्य की मृत्यु कैसे हुई के लिए चित्र परिणाम 
आचार्य चाणक्य जीवन परिचय एवं इतिहास

 आचार्य चाणक्य जीवन - Biography Of Chanakya In Hindi

चाणक्य का जन्म एक घोर निर्धन परिवार में हुआ था. अपने उग्र और गूढ़ स्वभाव के कारण वे ‘कौटिल्य’ भी कहलाये. उनका एक नाम संभवत: ‘विष्णुगुप्त’ भी था. चाणक्य ने उस समय के महान शिक्षा केंद्र ‘तक्षशिला’ में शिक्षा पाई थी. 14 वर्ष के अध्ययन के बाद 26 वर्ष की आयु में उन्होंने अपनी समाजशास्त्र, राजनीती और अर्थशास्त्र की शिक्षा पूर्ण की और नालंदा में उन्होंने शिक्षण कार्य भी किया. वे राजतंत्र के प्रबल समर्थक थे. उन्हें ‘भारत का मेकियावली’ के नाम से भी जाना जाता है.
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ऐसी किंवदन्ती है कि एक बार मगध के राजदरबार में किसी कारण से उनका अपमान किया गया था, तभी उन्होंने नंद – वंश के विनाश का बीड़ा उठाया था. उन्होंने चन्द्रगुप्त मौर्य / Chandragupta Maurya को राजगद्दी पर बैठा कर वास्तव में अपनी प्रतिज्ञा पूरी कर ली तथा नंद – वंश को मिटाकर मौर्य वंश की स्थापना की. चाणक्य देश की अखण्डता के भी अभिलाषी थे, इसलिये उन्होंने चंद्रगुप्त व्दारा यूनानी आक्रमणकारियों को भारत से बाहर निकलवा दिया और नंद – वंश के अत्याचारों से पीड़ित प्रजा को भी मुक्ति दिलाई.

आचार्य चाणक्य भारतीय इतिहास के सर्वाधिक प्रखर कुटनीतिज्ञ माने जाते है. उन्होंने ‘अर्थशास्त्र’ नामक पुस्तक में अपने राजनैतिक सिध्दांतों का प्रतिपादन किया है, जिनका महत्त्व आज भी स्वीकार किया जाता है. कई विश्वविद्यालयों ने कौटिल्य (चाणक्य) के ‘अर्थशास्त्र’ को अपने पाठ्यक्रम में निर्धारित भी किया है.
महान मौर्य वंश की स्थापना का वास्तविक श्रेय अप्रतिम कूटनीतिज्ञ चाणक्य को ही जाता है. चाणक्य एक विव्दान, दूरदर्शी तथा दृढसंकल्पी व्यक्ति थे और अर्थशास्त्र, राजनीति और कूटनीति के आचार्य थे.
चाणक्य का नाम राजनीती, राष्ट्रभक्ति एवं जन कार्यों के लिए इतिहास में सदैव अमर रहेगा. लगभग 2300 वर्ष बीत जाने पर भी उनकी गौरवगाथा धूमिल नहीं हुई है. चाणक्य भारत के इतिहास के एक अत्यन्त सबल और अदभुत व्यक्तित्व हैं. उनकी कूटनीति को आधार बनाकर संस्कृत में एक अत्यन्त प्रसिध्द ‘मुद्राराक्षस’ नामक नाटक भी लिखा गया है.
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 आचार्य चाणक्य की मृत्यु -  Kese Hui Thi Acharya Chanakya Ki Death

 मृत्युं   –  ईसा.पूर्व. 225

 यह कोई सामान्य मौत थी या बनी बनाई साजिश? क्योंकि जाहिर है कि जिस स्तर पर आचार्य चाणक्य मौजूद थे, वहीं उनके कई दुश्मन भी मौजूद थे। उनकी मृत्यु को लेकर इतिहास के पन्नों में एक नहीं अनेक कहानियां प्रचलित हैं, लेकिन कौन सी सच है यह कोई नहीं जानता। परंतु आज हम इसी राज से पर्दा उठाने की कोशिश करने जा रहे हैं।

आचार्य चाणक्य की मौत को लेकर इतिहास के पन्नों में से दो कहानियां खोजी गई हैं, लेकिन कौन सी सही है इस सार तक कोई नहीं पहुंच पाया है। महान शोधकर्ता भी आज तक यह जान नहीं पाए कि आखिर आचार्य चाणक्य के साथ क्या हुआ था? उनकी मृत्यु का कारण क्या वे स्वयं थे या कोई और?
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जो दो कहानियां प्रचलित हैं उनमें से पहली कहानी के अनुसार शायद आचार्य चाणक्य ने तब तक अन्न और जल का त्याग किया था जब तक मृत्यु नहीं आई। परंतु दूसरे कहानी के अनुसार वे किसी दुश्मन के षड्यंत्र का शिकार हुए थे, जिसकी वजह से उनकी मौत हुई।

लेकिन दोनों में से कौन सी कहानी सत्य है इस बात को शोधकर्ता खोज पाने में असमर्थ हैं

ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार आचार्य चाणक्य ने खुद प्राण त्यागे थे या फिर वे किसी षड़यंत्र का शिकार हुए थे यह आज तक साफ नहीं हो पाया है। क्योंकि विभिन्न शोधकर्ता हर बार भिन्न-भिन्न परिणामों के साथ सामने आते हैं जो अंत में यह सवाल खड़ा कर देते हैं कि आखिर चाणक्य के साथ हुआ क्या था?
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खैर सच जो भी हो, लेकिन आचार्य चाणक्य के कारण भारतीय इतिहास एक तिजोरी के रूप में सामने आया है। जिसमें चाणक्य नीतियों से भरा खजाना है। यह खजाना आज भी लोगों के काफी काम आता है।

चाणक्य नीतियों का लोग आज भी पालन करते हैं, उन्हें मानते हैं और अपनी लाइफ पर अमल करने की पूरी कोशिश करते हैं। आचार्य चाणक्य ने जीवन के हर क्षेत्र में सफल होने के सूत्र बताए हैं। व्यक्ति अपने रिश्तों को कैसे सफल बनाए, संबंधियों के साथ कैसे बना कर रखे इस बारे में भी बताया है।
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चाणक्य के अनमोल विचार - Acharya Chanakya Quotes In Hindi

व्यक्ति अकेले पैदा होता है और अकेले मर जाता है; और वो अपने अच्छे और बुरे कर्मों का फल खुद ही भुगतता है; और वह अकेले ही नर्क या स्वर्ग जाता है.

भगवान मूर्तियों में नहीं है. आपकी अनुभूति आपका इश्वर है. आत्मा आपका मंदिर है.

अगर सांप जहरीला ना भी हो तो उसे खुद को जहरीला दिखाना चाहिए.

शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है. एक शिक्षित व्यक्ति हर जगह सम्मान पाता है. शिक्षा सौंदर्य और यौवन को परास्त कर देती है.

जैसे ही भय आपके करीब आये, उस पर आक्रमण कर उसे नष्ट कर दीजिये.

कोई व्यक्ति अपने कार्यों से महान होता है, अपने जन्म से नहीं.

सर्प, नृप, शेर, डंक मारने वाले ततैया, छोटे बच्चे, दूसरों के कुत्तों, और एक मूर्ख: इन सातों को नीद से नहीं उठाना चाहिए.

सबसे बड़ा गुरु मन्त्र है : कभी भी अपने राज़ दूसरों को मत बताएं. ये आपको बर्वाद कर देगा.
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2 comments:

  1. Star plus is starting new tv show chandra nandini on star plus about chandragupta mourya life.

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