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मोहेनजो दारो या रुस्तम क्या देखें

बॉलीवुड की रीत रही है कि अक्सर छुट्टी के मौके को भुनाने की कोशिश की जाती है. शनिवार, रविवार और फिर 15 अगस्त. एक लंबे वीकेंड को भुनाने के लिए बॉलीवुड के दो बड़े सितारे अक्षय कुमार और ऋतिक रोशन अपनी-अपनी फ़िल्मों के साथ सिनेमाघरों में हैं.

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 Mohanjodaro Vs Rustom In Hindi
जहां ‘रुस्तम’ एक नौसैनिक की देशभक्ति और ख़ून के आरोप से निकलने की लड़ाई है वहीं मोहेनजो दारो प्राचीन सिंधु सभ्यता की कहानी है.
इस साल अक्षय कुमार की यह तीसरी फ़िल्म है (एयरलिफ़्ट, हाउसफ़ुल 3, रुस्तम). वहीं ऋतिक 2 साल के बाद (बैंग बैंग) वापसी कर रहे हैं.
अक्षय कुमार एक पारसी नौसैनिक रुस्तम पावरी के क़िरदार में हैं जो बीवी (इलियाना) के अपने दोस्त विक्रम (अर्जुन बाजवा) से अवैध संबंधों के चलते विक्रम को गोली मारने के आरोप में क़ैद में है.
रुस्तम के ख़िलाफ़ कई गवाह और सबूत मौजूद हैं लेकिन वो अपनी वक़ालत खुद करता है और कैसे ख़ुद को बचाता है, यही फ़िल्म का सस्पेंस है.
मुंबई के एक रेडियो जॉकी आलोक कहते हैं, “फ़िल्म अच्छी है, थोड़ी लंबी है लेकिन अक्षय को देखकर मज़ा आता है.”
वही एक दर्शक संजय इस फ़िल्म को देखकर कहते हैं, “लंबी फ़िल्म है और अक्षय काफ़ी अजीब दिख रहे हैं, वो मूछों में अच्छे नहीं लग रहे.”
15 अगस्त के मौके को भुनाने के लिए फ़िल्म में एक देशभक्ति ट्विस्ट भी है, लेकिन वह आपको फ़िल्म देखने के बाद ही पता चलेगा.
इस शुक्रवार आई दूसरी फ़िल्म ‘मोहेनजो दारों’ ऋतिक के फ़ैंस को तो बेहद पसंद आ रही है, लेकिन सुबह के शो में हॉल खाली दिखे.
देखिए मोहेनजो दारो की फ़र्स्ट डे फ़र्स्ट शो रिपोर्ट
21 साल के एक दर्शक मौलिक कहते हैं, “मैं पीरियड फ़िल्मों का बड़ा फ़ैन हूं और मुझे तो यह फ़िल्म बहुत दिलचस्प लगी. ग़लतियां थी भी तो फ़िल्मकार को थोड़ी आज़ादी तो मिलनी चाहिए.”
वहीं 20 साल की एक अन्य दर्शक सुकीर्ति कहती हैं, “मैं तो भई ऋतिक को देखने आई थी और उन्होंने निराश नहीं किया, वो कमाल के दिखे हैं.”
फ़िल्म मोहेनजो दारो रिलीज़ से पहले कहानी चोरी करने और ग़लत इतिहास दिखाने के आरोपो से घिरी, लेकिन फ़िल्म रिलीज़ होते-होते सबकुछ ठीक हो गया.
अक्षय और ऋतिक दोनों को ही देखने वाले दर्शकों का एक बड़ा वर्ग है और दोनों ही फ़िल्में अलग-अलग टेस्ट की हैं, ऐसे में लंबे वीकेंड का फ़ायदा शायद इन्हें मिले.
लेकिन हमारी आपको सलाह है कि आप यह बात पहले से सोच कर जाए कि दोनों ही फ़िल्में ढाई घंटे लंबी हैं और जहां रुस्तम एक कोर्टरूम ड्रामा और रोमांटिक थ्रिलर है, वहीं मोहेनजो दारो एक अनदेखे दौर की प्रेम और बदले की कहानी है.

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