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नवरात्रि स्पेशल : श्री दुर्गा आरती । जय अम्बे गौरी - Navratri Special : Shri Durga Mata Ki Aarti

Jai Ambe Gauri Aarti In Hindi : 'नवरात्र' शब्द से नव अहोरात्रों (विशेष रात्रियों) का बोध होता है। इस समय शक्ति के नवरूपों की उपासना की जाती है। 'रात्रि' शब्द सिद्धि का प्रतीक है।

दोस्तों इस वर्ष नवरात्रा 1 अक्टूबर 2016 से प्रारंभ है। इस पोस्ट के द्वारा हम आप को माता जगदम्बे की आरती बता रहे है अगली पोस्ट में हम आप को घट स्थापना के शुभ महूर्त बताएगें व बताएंगे आप को पूजा की विधि और सामग्री के बारे में , तो दोस्तों इस नवरात्रा को और ज्यादा स्पेशल कैसे बनाए और ज्यादा महत्वपूर्ण कैसे बनाए कैसे पूजा करे की आप को अधिक लाभ मिले ये सभी बाते हम आगे पोस्ट में बताएंगे कृपया अपडेट करते रहे आप की Madhushala.info 
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श्री दुर्गा माता की आरती : Shri Durga Mata Ki Aarti
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श्री दुर्गा माता की आरती : Shri Durga Mata Ki Aarti

जय अम्बे गौरी मैया जय मंगल मूर्ति ।
तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिव री ॥टेक॥

मांग सिंदूर बिराजत टीको मृगमद को ।
उज्ज्वल से दोउ नैना चंद्रबदन नीको ॥जय॥

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला कंठन पर साजै ॥जय॥

केहरि वाहन राजत खड्ग खप्परधारी ।
सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुःखहारी ॥जय॥

कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर राजत समज्योति ॥जय॥

शुम्भ निशुम्भ बिडारे महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना निशिदिन मदमाती ॥जय॥

चौंसठ योगिनि मंगल गावैं नृत्य करत भैरू।
बाजत ताल मृदंगा अरू बाजत डमरू ॥जय॥

भुजा चार अति शोभित खड्ग खप्परधारी।
मनवांछित फल पावत सेवत नर नारी ॥जय॥

कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती ।
श्री मालकेतु में राजत कोटि रतन ज्योति ॥जय॥

श्री अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावै ।
कहत शिवानंद स्वामी सुख-सम्पत्ति पावै ॥जय॥
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