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सिकंदर की मौत का रहस्य | Sikandar Ki Maut Ka Rahasya

सिकंदर की मौत का इतिहास के सबसे आकर्षक चरित्रों में से एक है महान सिकंदर.  बचपन से विश्व विजेता बनने का ख्याब देखने वाले इस विजेता बनने का ख्वाब देखने वाले इस राजकुमार ने उसे पूरा करने के लिए बहुत ज्यादा समय नहीं लगाया. मकदूनिया के राजा फिलिप के महल में २० जुलाई ३५६ ईसा पूर्व पैदा हुए सिकन्दर में अपना राज्य फैलाने ही गहरी पिपासा थी. उसकी सैना उसे भगवान मानती थी.

उसके सपने को पूरा करने के लिए यह सेना बरसो अपने घर से दूर, उसके साथ युद्ध अभियान पर लगी रही और एक दिन जब वह थक गई, तो सिकंदर को अपना आखिरी समय बाद ही उसकी मौत हो गई. सिकंदर के जीवन के बारे में इतिहास में कई बाते दर्ज और उन पर कोई विवाद नहीं पर उसकी मौत को लेकर कभी एक राय नहीं बन पाई.
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सिकंदर की मौत का रहस्य | Sikandar Ki Maut Ka Rahasya
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जिसके कारण हुए बुखार ने उसकी जान ले ली. कुछ इतिहासकार मानते है कि वह रोग मलेरिया था. कुछ का कहना है कि टाईफाइड सिकंदर के समय के कुछ इतिहासकारों का कहना है कि उसकी मौत बुखार की वजह से हुई थी. जिस विषाणु के कारण उसकी मौत हुई थी, उसे नील नदी का विषाणु कहा जाता था.

कुछ का कहना है कि सिकंदर को उसके विश्वासपात्रों ने जहर दे दिया था. उसके बचपन के दोस्त सिपहसालारो की बगावत के कारण सिकंदर हद से ज्यादा शक्की हो गया था. अत: उन्होंने शराब में जहर मिलकर दे दिया था. सो उन्होंने जहर के कारण सिकंदर की तड़फ को बुखार की तड़प को नाम देते हुए नील नदी के विषाणुओ को दोषी ठहराया ज्यादातर अकादमिक इतिहासकारों का मानना है कि सिकंदर की मौत किसी बीमारी की वजह से हुई थी.
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जिस वक्त सिकंदर की मौत हुई. उस वक्त बेविलोन में मलेरिया और ताइफ़ाइड जैसे रोग हुआ करते थे. बेबीलोन के शाही रोजनामचे से उसकी बीमारी के जो लक्षण मिले है, उनके आधार पर कहा जा सकता है कि वह रोग ताइफ़ाइड ही रहा होगा.

सिकंदर बहुत महत्वाकांक्षी था. उसकी माँ ओलिम्पस को उससे भी ज्यादा महत्वाकांक्षी माना जाता है. ओलीम्पस को शक था कि फिलिप, जो उससे चिढ़ता था, सिकंदर को राजा नहीं बनाएगा. उसने १६ साल की उम्र में ही सिकंदर को कई महत्वपूर्ण अभियानों पर भेजा था. फिलिप की भी हत्या हो गई. फिलिप की हत्या के बाद उसके विश्वासपात्रों ने एक बार उसे जहर देने की कोशिश की. सिकंदर ने प्याले को सूंघकर ताड़ लिया. दो बार उस पर युद्ध में तीर चलाया गया, पर सिकंदर बच गया.
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ये ऐसी बाते है, जिनके कारण दो हजार साल बाद भी इस धारणा को बल मिला हुआ है. कि दरबारियों ने सिकंदर की हत्या करवाई थी. मौत की वक्त जब पूछा गया कि वह अपना उत्तराधिकारी किसे बनाना चाहता है, तो जर्जर सिकंदर कुछ नहीं बोल पाया. सिकंदर की मौत के कुछ बरसों बाद उसके पुरे परिवार को ख़त्म कर दिया गया.मरने के 14 साल बाद जिन्दा लौट आया युवक

कुछ साल पहले ब्रिटिश हिस्ट्री में एक लेख छपा था
जिसके मुताबिक, भारत से सिकंदर कुछ बन्दर ले गया था. और उन्ही में से एक ने उसे काट लिया था, जिससे उसकी मौत हुई. उस लेख पर कई विद्वानों ने सवालिया निशान लगाया है. सिकंदर की मौत की गुत्थी कभी नहीं सुलझाई जा सकती. कई विद्वानों ने लम्बे अध्ययन के बाद उसे बीमारी से हुई मौत मान लिया है.
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३३ साल की उम्र में जब सिकंदर मरा, तो उसकी दौनो बाहें फैली हुई थी. और हथेलियाँ खुली हुई. दार्शनिकों ने इसे मृत्यु के आह्वान से जोड़ा और कहाँ इस राजा से सारी उम्र जमीने जीती, पर गया तो इसके हाथ खाली थे. हर इंसान की तरह सिकंदर भी खाली हाथ ही गया, पर अपने जाने का कारण अपनी धडकनों के साथ ले गया.
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