एक ऐसा शहर जहाँ 2 महीनों तक रात नहीं होती है - Murmansk Russia

Murmansk Russia – हमारी इस धरती के ऐसे बहुत सारे कोने है जो अपने आप में हमसे कही ना कही अलग है। वहां का पहनावा, खानपान और जीवन सब अलग है। इसके साथ साथ वहां प्रकृति भी अपना अलग ही रंग दिखाती है।

ऐसी ही एक जगह है रूस (Russia) में जिसका नाम है Murmansk और यहाँ लगभग चालीस दिनों तक सर्दियों के मौसम में रात रहती है और गर्मियों के मौसम में लगातार 60 दिन तक उजाला रहता है। फिर भी यह शहर चलता है और वैसे ही काम कर रहा होता है। इसे सनलेस सिटी भी कहते है।

मूरमान्स्क लोगों की जनसंख्या – Murmansk Population

ऐसा नहीं है की इस तरह के अजीब मौसम के चलते इस जगह में लोग नहीं रहते है। इस जगह की जनसँख्या लगभग तीन लाख है और यहाँ बाकी सुविधाएँ जैसे ट्रांसपोर्ट आदि सब मौजूद है। टूरिस्ट दुनियाभर से यहाँ आते है और यहाँ रूककर इस जगह के बदलते मिजाज का मजा लेते है।
प्रथम विश्वयुद्ध के बाद जन्म हुए इस शहर को रूस के प्रमुख बंदरगाहों में भी गिना जाता है। यहाँ मौसम इतना भयावह हो जाता है की सर्दियों के मौसम में यहाँ का तापमान लगभग -34 डिग्री तक चला जाता है। ऐसे तापमान के बाद भी यहाँ सारे काम हो रहे होते है। लोग ऑफिस और बच्चे स्कूल जाते है।
इस जगह में जहाँ पर चालीस दिन सूर्य नहीं उगता और साठ दिन तक रात नहीं होती उसे अलग अलग नामो से जाना जाता है। जिन 40 दिनों यानी की सर्दियों में जब सूर्य नहीं निकलता है तो इसे पोलर नाईट – Polar Night  कहा जाता है और यह समय लगभग 2 दिसम्बर से 11 जनवरी तक का होता है। इसके अलावा लगभग 22 मई से लगभग 23 जुलाई तक यहाँ रात नहीं होती है और केवल दिन रहता है जिसे पोलर डे – Polar day कहा जाता है।
उस समय यहाँ के लोग भूल चुके होते है की रात कब हुई थी। वैसे यहाँ बाहर के लोग कम ही जाते है क्योकि बदलते मौसम और अलग माहौल की वजह से यहाँ उनका रुकना सही नहीं होता है। स्थानीय लोग तो इस माहौल में रच बस गए है लेकिन बाहर के लोग खुद को बड़ी मुश्किल से एडजेस्ट कर पाते है।
हमारे और आपके शहर में तो रोजाना सुबह सूर्य निकलता है और हमे सब सामान्य लगता है लेकिन यहाँ के लोग सूरज निकलने पर जश्न मनाते है। सर्दियों के मौसम में पहली बार 34 मिनट का सूर्य निकलता है और यहाँ के लोग सडको में आ जाते है और जश्न मनाते है। इसके बाद धीरे धीरे मौसम में बदलाव होने लगता है।
डॉक्टर्स का कहना होता है की भले ही इस इस माहौल में लोग सेट हो गए हो लेकिन सूर्य का इतने दिन ना निकलना कही ना कही इन लोगो के लिए खतरे की बात है। विटामिन डी की कमी होने की सम्भावना यहाँ के लोगो में रहती है जो की होती भी है। फिर भी आजतक कोई इस बदलाव की वजह से मरा नहीं और ना ही शहर छोड़कर गया।
बिजली का एडजेस्टमेंट-
जब सर्दियों के समय में तापमान माइनस में चला जाता है तो यहाँ के लोग बिजली बचाते है और इसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब सूरज अपने चरम पर होता है और गर्मियों के मौसम में रात नहीं होती है। तब यहाँ का तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है लेकिन फिर भी लोग इस मौसम में रह रहे होते है। सर्दियों के मौसम में बची हुई बिजली का इस्तेमाल ये गर्मियों के मौसम में करते है।

2 comments:

Powered by Blogger.