सरदारशहर का इतिहास - Sardarshahar History in Hindi

सरदारशहर का इतिहास - Sardarshahar History in Hindi - Sardarshahar Ka Itihas

सभी को मेरा प्रणाम, में विपिन पारीक सरदारशहर का ही रहने वाला हूँ एवं जिस वेबसाइट पर आप ये सरदारशहर का इतिहास पढ़ रहे हो यह भी आज से आठ साल पहले इसी शहर में बनायी गयी थी। सरदारशहर के बारे में, में जितना भी लिखु कम ही है। क्योंकि यहाँ का इतिहास जितना सुंदर है उतने ही प्यारे यहाँ के रहने वाले लोग है। भले ही मेरा जन्म इस भूमि पर न हुआ हो पर ये मेरी कर्म भूमि है। इसीलिए में मेरे ह्रदय से इस भूमि की गाथा आपके सामने अंकित कर रहा हूँ। यह तो आप सभी जानते ही हो की "जिंदगी की हर सुबह कुछ शर्ते लेकर आती है, और जिंदगी की हर शाम कुछ तर्जुबे देकर जाती है।" में मेरे बारे में आपको फिर कभी बताऊंगा। आज में आपको मेरे प्यारे शहर के बारे में बताता हूँ।


सरदारशहर का इतिहास - Sardarshahar History in Hindi

सरदारशहर का इतिहास - sardarshahar ka itihas

सरदारशहर राजस्थान के चुरू जिले का एक कस्बा है। यह बीकानेर से ८५ मील पूर्वोत्तर में बसा है। महाराजा सरदार सिंह ने सिंहासनारुढ़ होने के पूर्व ही यहां पर एक किला बनवाया था। शहर के चारों तरफ टीलें हैं, जिससे इसका सौंदर्य बहुत बढ़ जाता है। ऐतिहासिक दृष्टि से महत्व रखने वाली एक छतरी भी है। यहाँ का गाँधी विद्या मंदिर प्रसिद्ध है। तथा यहां इच्छापूरण बालाजी मन्दिर भी प्रसिद्ध है। इस के अलावा यहाँ घंटाघर भी प्रसिद्ध है और गांव बायला में माता जी (बाया जी) मन्दिर की ख्याति भी दूर दूर फैली हुई है। सरदारशहर तहसिल चुरू जिले की सबसे बड़ी तहसिल है।


यह क्षेत्र चूरू लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र के अन्तरगत आता है। यहां से मोहन लाल शर्मा, हजारीमल सारण, अशोक पींचा,केसरा बोहरा भी विधायक रह चुके है और वर्तमान विधायक भंवर लाल शर्मा है और ये 6 बार यहां से विधायक है। सरदार शहर से चन्दन मल वैद और भंवर लाल शर्मा केबिनेट मंत्री रह चुके हैं।

यहाँ की हवेलियाँ भी बहुत पुरानी है जो अपने आप में एक अमूल्य धरोहर है। 



सरदारशहर में शांतिपीठ आचार्य महाप्रज्ञ समाधि स्थल 



सरदारशहर में स्थित इच्छापूर्ण बालाजी मंदिर के बारे में - Ichha Puran Balaji Temple, Sardarshahar Churu History

कहते हैं यहां से कोई खाली हाथ नहीं लौटता। इस चौखट पर मत्था टेकने वालों की हर इच्छा पूरी होती है। यहां आकर सारे दुख - दर्द दूर हो जाते हैं। मन को सुकून भी मिलता है।

13 फरवरी 2005 में प्रतिमा का अनावरण व इसी दिन दर्शनार्थ खोला गया।-12 बजकर 21 मिनट पर इच्छापूर्ण बालाजी मंदिर की प्रथम आरती।

-सरदारशहर निवासी मूलचंद विकास कुमार मालू के सौजन्य से मंदिर का निर्माण।
-दक्षिण भारत व पश्चिम बंगाल के कारीगरों ने द्रविड़ शैली पर मंदिर बनाया।
-इस मंदिर में भगवान राम परिवार और भगवान गणेश की मूर्तियां भी हैं।
-जयपुर के प्रजापति आर्ट ने इच्छापूर्ण बालाजी मंदिर की प्रतिमा डिजाइन की।
-मंदिर रतनगढ़-गंगानगर हाई वे पर सरदारशहर से आठ किमी पहले स्थित है।
-करीब सात एकड़ (11 बीघा) जमीन में फैला हुआ बालाजी मंदिर परिसर बेहद आकर्षक है।


राजा की तरह आशीर्वाद की मुद्रा में बैठे बालाजी

इच्छापूरण बालाजी मंदिर सरदारशहर के पुजारी घनश्याम बिरला दावा करते हैं कि यूं तो दुनियाभर में इच्छापूर्ण बालाजी के नाम से कई मंदिर हैं, मगर सरदाशहर स्थित यह विश्व का ऐसा इकलौता मंदिर है, जिसमें बालाजी की प्रतिमा राजशाही दरबार के रूप में हों और बालाजी राजा की तरह आशीर्वाद की मुद्रा में विराजमान हों। मंदिर पौराणिक शैली पर बना है। इसमें बिरला मंदिर जयपुर ? और सोमनाथ मंदिर गुजरात को मिलाजुला रूप है।


मंदिर की आरती - सुबह 5 बजे : मंगला आरती- सुबह 11 बजे : राजभोग आरती-शाम को 6 से 7 बजे : सांयकाल आरती-रात आठ बजे : भोग आरती-रात 9 से 9.15 बजे : शयन आरतीबसंत पंचमी पर वार्षिक मेलायूं तो इच्छापूर्ण बालाजी मंदिर सरदारशहर में सालभर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है, मगर बसंत पंचमी पर यहां वार्षिक मेला भरता है। उसमें बालाजी के भक्तों का उत्साह देखते बनता है। इसके अलावा हर मंगलवार और हनुमानजयंती पर भी श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रहती है।

मंदिर की प्रमुख जगहों से दूरी -

दिल्ली से दूरी 325 किमी
जयपुर से दूरी 225 किमी
चूरू से दूरी 60 किमी

अभी शेष है..... 

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