रहस्यों से भरा “नॉर्थ सेंटिनल द्वीप” - North Sentinel Island in hindi

उत्तर सेंटिनल द्वीप – North Sentinel Island बंगाल की खाड़ी में स्थित अंडमान द्वीप समूह का एक द्वीप है। यह  नॉर्थ सेंटिनल द्वीप, भारतीय संघ राज्य क्षेत्र के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के दक्षिण अंडमान प्रशासनिक जिले के अंतर्गत आता है।

रहस्यों से भरा “नॉर्थ सेंटिनल द्वीप” – North Sentinel Island

उत्तर सेंटिनल द्वीप ख़ूबसूरती से भरपूर द्वीप है। यह किसी जन्नत से कम नही है यहां खुला नीले रंग का आसमान और शांतिपूर्ण माहौल है, बर्फ की चादर ओढ़े सफेद पहाड़ हैं, हरे भरे जंगल और पानी की लहरों की आवाजें मन को काफी शांत और सकारात्मक ऊर्जा पहुंचाती हैं।
यह प्रकृति का एक आकर्षक चेहरा है। इतनी ख़ूबसूरती का जिक्र सुनकर यहां हर कोई आना पसंद करेगा। पर सेंटिनल द्वीप पर आना मौत को गले लगाने जैसा है। इसकी वजह है यहां पर रहने वाली एक खतरनाक जनजाति – (North Sentinel Island Natives )।

जनजाति, जनसंख्या अनुमानित 100-200 के करीब – North Sentinel Island People

इस ख़ूबसूरती भरे द्वीप पर एक जनजाति कई सालों से अपना कब्ज़ा जमाये हुए है। यहां रह रहे लोगों ने अपनी ही एक ऐसी दुनिया बसा ली है जहां किसी भी बाहरी व्यक्ति का हस्तक्षेप वे लोग बर्दाश तक नही कर पाते हैं।
इन लोगों को आधुनिक दुनिया से कोई वास्ता नहीं है। ना तो ये लोग बाहरी दुनिया से कोई सम्पर्क रखते हैं और ना ही किसी को अपने से सम्पर्क रखने की इजाज़त देते हैं। इस जनजाति को “लॉस्ट ट्राइब” के नाम से जाना जाता है।
यह लोग अपना जीवन वैसे ही व्यतीत कर के खुश हैं जैसे उनके पूर्वज रहा करते थे। इनका रहन सहन, संस्कृति, खाना पीना, बोल चाल की भाषा बिलकुल अलग है न तो इन लोगों के पास रहने के लिए घर हैं और ना ही कपड़े।  सेंटिनल द्वीप पर रह रहे ये लोग खाने के लिए सिर्फ शिकार पर निर्भर हैं।
कई ऐसी जनजातियां हैं जिन्होंने अपने आपको आधुनिक युग से जोड़ लिया है पर इस जनजाति के लोग आज भी अपने आप को ऐसे ही सुरक्षित महसूस करते हैं।

खुंखार जनजाति – Uncontacted peoples

लॉस्ट ट्राइब नाम की यह जनजाति बेहद खतरनाक है। अगर इनके क्षेत्र के आस पास कोई हवाई जहाज़ दिख जाये तो ये लोग आग के गोलों से उनका स्वागत करते हैं। इस जन जाति के लोग तीर चलाने मे माहिर हैं।
2006 में जनजाति ने कई मछुहारों को बहुत बेहरमी से मार गिराया था। जो भी पर्यटक इस खुंखार जनजाति के जाने अनजाने में निकट गया है वह आज तक वापिस नही आया है। आप लोग इस जनजाति के खतरनाक इरादों का अंदाजा इस तरह से भी लगा सकते हो कि आज तक इन लोगों की कोई स्पष्ट तस्वीर तक नही ली जा सकी है।
ऐसा माना जाता है की नॉर्थ सेंटिनल द्वीप पर रह रही इस आदमखोर जनजाति का अस्तित्व 60,000 साल पुराना है। कुछ रिपोट्स के मुताबिक इस जनजाति को दुनिया की सबसे अलग थलग जनजाति करार दिया गया है।
मौत को नज़दीक गये लोगों ने बताया कुछ ऐसा
नॉर्थ सेंटिनल द्वीप में रह रही लॉस्ट ट्राइब नाम की इस जनजाति को कई लोगों ने नज़दीक से भी देखा है पर वह किसी तरह से मौत के कुंए से भागने में कामयाब रहे। उन लोगों ने बताया कि वर्ष 1981 में हमारी नाव रास्ता भटक गयी थी और हमने देखा कि किनारे पर कुछ लोग भाले और तीर कमान लेकर खड़े थे।
उन लोगों का इरादा हमें मारने का था और वह लोग अजीब सी आवाजें निकाल रहे थे। पर हमने किसी तरह अपनी नाव मोड़ी और वहां से निकलने में सफल रहे। वो दिन हमने मौत को काफी नज़दीक से देखा था और शायद वह हमारी जिंदगी का आखिरी दिन भी हो सकता था।
भारत सरकार करना चाहती है मदत, अपवर्जन क्षेत्र किया घोषित
इस जनजाति के लोग बाहरी दुनिया से इतनी नफरत करते हैं की कई बार भारत सरकार ने इन लोगों की मदत करने का प्रयास किया है पर ये लोग किसी तरह का बदलाव अपने जीवन में नही चाहते।
सरकार द्वारा कई प्रयासों के बाद जब कोई हल नही निकला तो भारत सरकार ने इस इलाके को अपवर्जन क्षेत्र घोषित कर दिया है। साथ ही यहां किसी बाहरी व्यक्ति के जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है।
इस जनजाति का डर इस कदर है कि खुद भारत सरकार इनके मामले में फैसला लेने से कतराती है। अपने खलनायक कारनामों के कारण यह जन जाति सबसे खतरनाक और पृथक जनजाति बन चुकी है।
द्वीप में आयी थी सुनामी
2004 में इस सुनामी की चपेट में नॉर्थ सेंटिनल द्वीप भी आया था। यह सुनामी बेहद जानलेवा थी जिसके कारण भारत सरकार ने इस जन जाति के प्रति अपनी चिंता ज़ाहिर करते हुए यहां रह रहे लोगों की मदत करना चाही।
जिसके लिए सुनामी के तीन दिन बाद एक हैलिकौप्टर को द्वीप पर भेजा गया पर जनजाति के लोगों ने उस पर पत्थर और तीर बरसाने शुरू कर दिए और हैलिकौप्टर को खाली हाथ लौटना पड़ा। जिसके कारण इस क्षेत्र को कितना नुकसान हुआ है, या कितने लोग मारे गए, इन लोगो पर सुनामी का कैसा प्रभाव पड़ा ऐसी कोई जानकारी सरकार को प्राप्त नही हो पायी थी।

सर्वाइवल इंटरनेशनल, संस्था ने बताया ये – Survival International Saying

सर्वाइवल इंटरनेशनल नामक एक संस्था है जो कि मुख्य रूप से आदिवासियों के लिए ही कार्य करती है। उन्होंने नॉर्थ सेंटिनल द्वीप पर रह रही इस जनजाति के बारे में बताया है की यह ग्रह की सबसे कमज़ोर जनजाति है।
इन लोगो में रोगों से लड़ने की क्षमता बिलकुल ना के बराबर है। किसी छोटी मोटी बिमारी से भी यह आदिवासी मर सकते हैं। संस्था के अनुसार बाहरी दुनिया से इनके सम्पर्क ना होने से महामारी से इनकी जान जाने का खतरा भी काफी अधिक है।

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