बच्चों की अच्छी परवरिश कैसे करें ?

Baccho Ki Parvarish Kaise Kare – बच्चे परिवार के सबसे छोटे सदस्य होते हैं जिनकी हर एक बात को अमूमन हम सभी मजाक या बेफिक्री में उड़ा देते हैं हम में से यह कोई अपने बच्चों को एक अच्छी परवरिश देना चाहता है|पर क्या हम जानते हैं कि अच्छी परवरिश के मायने क्या है अच्छी परवरिश का मतलब क्या है हर वह छोटी बड़ी चीज जो बच्चों को मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य प्रदान करे। बच्चों से अधिक अपेक्षा ………

3 साल का रोहन शाम को अपने पापा के आने का बेसब्री से इंतजार कर रहा था वहीं दूसरी और पापा आज बहुत तनाव में थे क्योंकि आज ऑफिस में उनके बॉस से उनका झगड़ा हो गया घर पर हमेशा की तरह रोहन अपने पापा के फंदे पर झूलने लगा पापा जोर से चिल्लाया और बोले चुपचाप एक जगह बैठने को कहा बेचारा रोहन सहम गया और इन सब में अपनी गलती समझ नहीं पाया यह किसी एक बच्चे की नहीं बल्कि कई बच्चों की कहानी है अब आप ठंडे दिमाग से जरा सोचिए कि 3 साल के बच्चे से यह अपेक्षा करना संभव है कि वह एक जगह बिना बोले चुपचाप बैठा रहे आपके सारे तनावों को भी समझा ले क्या जायज है बच्चे की भावानात्मक जरूरतों और अपेक्षाओं को नजरअंदाज कर अपनी भावनाएं उस पर थोपना उस बच्चे के व्यक्तित्व को तोड़ना है ऐसा नहीं है कि हम इस तरह का व्यवहार जान बूझकर करते हैं |पर हमसे गलतियां हो जाती है जो कभी कभी तो नजर नहीं आती और कभी कभी हम उसे नजरअंदाज कर देते हैं|

बच्चों की अच्छी परवरिश कैसे करें – Baccho Ki Parvarish Kaise Kare

ऐसे में समस्या तब गंभीर होने लगती है जब आपका प्यार अपेक्षाएं सपने तनाव आपके बच्चों की भावनाओं पर हावी होने लगते हैं और वह समझ नहीं पाता कि आखिर इससे कैसे बचा जाए \

इमोशनल इमेज अक्सर पेरेंट्स बच्चों के साथ इमोशनल यानी भावनात्मक व्यवहार करते हैं इसकी शुरुआत तब होती है जब आप आपके बच्चे पर अपने शब्दों के तीर चलाकर उसे आहत करते हैं अक्सर आप जाने अनजाने में सबके सामने अकेले में बच्चों के साथ कठोर में गलत शब्दों का इस्तेमाल करते हैं जैसे तुम मूर्ख नालायक हो क्या, तुम इतनी सी बात नहीं समझ सकते ,तुम्हें सुनाई नहीं देता ,क्या तुम कभी कुछ नहीं कर सकते आदि इन सबके अलावा बच्चों की अपेक्षा है पढ़ना उनकी सलाह बातों को हमेशा सिर से खारिज कर देना| यह हमेशा उनका अपमान करना यह सभी उन्हें भावानात्मक रूह से आहत करते हैं| ( Baccho Ki Parvarish Kaise Kare )

कैसे होते हैं बच्चे हॉट……. अपमान से अपेक्षाए से बच्चों की हर बात को खारिज करने से बच्चा हमेशा अपने बच्चे की निंदा न करें|

बच्चों पर चीखना चिल्लाना बंद करें|

हमेशा अपने बच्चों को नकारे नहीं गुस्सा होने पर बच्चों को शारीरिक चोट पहुंचाना गलत है|

बच्चों के सामने पेरेंट्स का लड़ना गलत है |

बम विस्फोट बलात्कार चोरी डकैती खबरें या फिल्में देखना गलत है बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान ना देना बच्चों को असुरक्षा का अहसास कराना |

बच्चों के सामने उनके कारण होने वाली असुविधाओं के बारे में चर्चा करना|

बच्चों को डराना धमकाना उनकी किसी प्रिय वस्तु या खिलौनों को तोड़ देने की धमकी देना बच्चे को बार बार यह कहना कि वह आपका बच्चा नहीं है क्योंकि वह बुरा बर्ताव करता है |

छोटे बच्चों से यह अपेक्षा रखना कि वह रोए ना ,  उसे पर गुस्सा करना बच्चों को दोस्तों के साथ में खेलने  न देना ,उन से दूसरे बच्चों से बेहतर परफॉर्म करने की जिद करना, किस को मारने पीटने पर बच्चों को प्रोत्साहन बढ़ाना झूठ बोलने पर भी उसकी तारीफ करना ,बच्चे को ऐसे काम करने के लिए कहना जो मैं नहीं कर सकता अपने से छोटे बड़े भाइयों का ख्याल रखने के लिए कहना ,अपना डिप्रेशन बच्चों पर उतारना ,जी सब बच्चों को हर्ट करते हैं

कैसे जाने कि बच्चा इमोशनली हॉट है…….. अगर आपके बच्चे का भावात्मक इस तरह किसी तरह से बिगड़ जाए तो वह कुछ संकेत देता है उसे समझना आपकी जिम्मेदारी है यह संकेत कुछ इस प्रकार हो सकते हैं यदि बच्चा अंगूठा चूस रहा ,

नाखून काट रहा ह, और बहुत हो रहा है,

नजरे मिलाने से बच रहा हूं ,

वह संख्या क्या आक्रमण का विनाशकारी प्रगति का हो जाए दूसरों को नंदिता तुमने व्यवहार करें बच्चे को सोने में तकलीफ होना ,

बोलने में तकलीफ होना ,अकेले रहना खेलने में जाना बहुत जिद्दी हो जाना ,बिस्तर गिला करें,

खुद के बारे में नकारात्मक बातें करें ,शर्मीले स्वभाव का हो जाए ,शारीरिक और मानसिक विकास धीमा हो जाए ,

इमोशनल अत्याचार के दुष्प्रभाव बहुत नुकसान के प्रभाव लंबे अरसे बाद सामने आते हैं और उस तरह वक्त इलाज कर पाना मुश्किल हो जाता है यह सिर्फ बच्चे की विकास के लिए ही नहीं बल्कि जीवन के लिए भी घातक होता है |

सबसे सामान्य प्रभाव बच्चे का डिप्रेशन में जाना आत्महत्या करना आत्मग्लानि रखना रिश्ते नाते रिश्तेदारों से कटने लगना बहुत सारे अनजान है से ग्रस्त हो जाना अपनी भावनाओं को ठीक से व्यक्त न कर पाना ,किसी पर या खुद पर विश्वास की कमी करना ,हमेशा सब को शक की नजर से देखना ,खुद को हमेशा कम आंकना,

क्या करें पेरेंट्स? ,,,,…………………याद रखे बालमन जितना सरल होता है उतना ही जटिल भी आपके बच्चे आपसे सिर्फ प्यार और स्वीकृति चाहते हैं वह चाहते हैं कि आप उनकी सफलता को ही नहीं बल्कि असफलता को भी संघर्ष स्वीकार करें उन्हें संभलने दे उन्हें भावात्मक सुरक्षा प्रदान करें उनसे बात करें उनकी चिंता हो गए सवालों का समाधान करें इसलिए पेरेंट्स को चाहिए कि उनकी आंखों में अपने सपने भरने की वजह उनके सपनों को समझें और पूरा करने में उनका साथ दे बच्चों की भावनाओं का सम्मान करें जरूरत पढ़ने पर काउंसलिंग की मदद लेने से भी नहीं इसके ध्यान रखे बच्चे आप इसे ही वही लेंगे जो आप उन्हें देंगे यह आप पर निर्भर करता है कि आप उन्हें प्रेम या सौहाद्र दे या वृत्तियां बच्चों से अपने सपने साकार करना अच्छी बात है लेकिन उनके सपनों का गला घोटना यह सही तो नहीं बच्चों की भावनाओं को समझें सही गलत का फैसला ले और बच्चों का एक उज्जवल भविष्य बनाने में उनकी मदद करें ना कि बच्चों से खुद की मदद करवाएं बच्चे जैसा देखेंगे वैसा ही करेंगे यह पेरेंट्स पर डिपेंड है कि आप बच्चों को कैसा भविष्य देना चाहते हैं| ( Madhushala.info )

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