भगवान श्री कृष्ण का अवतरण | Bhagwan Shri Krishna Ka Avatar In Hindi

Story of Lord Krishna in hindi : -एक बार यह संसार ऐसे राजाओं की अनावश्यक सैनिक शक्ति से बोझिल हो गया था।  जो वास्तविकता में राजा नही असुर थे, किन्तु अपने आप को राजा मानते थे।  तब सारा संसार व्याकुल हो उठा था और पृथ्वी की अधिरात्रि देवी जिन्हें भूमि कहते है ,इन आसुर राजाओ से उतप्न विपदाओ को बताने के लिए ब्रह्माजी पास गयी। भूमि ने गऊ का रूप धारण किया और आखो में आँसू लिए ब्रह्मा के समक्ष प्रकट हुई। देवी ने पृथ्वी की परिस्थितियों के बारे में ब्रह्मा से कहा। इस वृतांत को सुनकर ब्रह्मा अत्यंत दुःखी हुये। वे तुरन्त वैकुंठ लोक की और चल पड़े। जहाँ भगवान विष्णु निवास करते है। ब्रह्मा जी के साथ शिवजी इत्यादि देवता भी थे। वैकुंठ लोक पहुंच कर सभी देवता विष्णु जी जिन्होंने पहले भी वराह अवतार लेकर पृथ्वी लोक की रक्षा की थी उन्हें प्रसन करने का उपाय सोचने लगे।
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कृष्ण अवतार की कथा 
Krishna Avtar Ki Katha In Hindi

भगवान श्री कृष्ण अवतार एवं उनकी सम्पूर्ण लीलाएँ
वैदिक मंत्रो में पुरुष सूत नामक एक विशेष प्रकार की प्राथना है इस प्राथना द्वारा सभी नारायण को प्रसन करने लगे। जब सभी देवता ने यह प्राथना कर ली तभी कोई उतर नही मिला। अत तब ब्रह्मा जी स्वंम ध्यान करने लग गए तब ध्यान द्वारा ब्रह्मा जी को विष्णु जी ने सन्देश भेजा।  ब्रह्मा ने इस संदेश को देवताओं तक प्रेषित किया। यह संदेश इस प्रकार था (Bhagwan Shri Krishna Ka Avatar In Hindi)
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भगवान शीघ्र ही अपनी परम् शक्तियों सहित पृथ्वी पर प्रकट होंगे। और जब तक भगवन अपने उदेश्य में पुरे नही होते तब तक बाकि देवताओ को भी उनकी सहायता के लिए पृथ्वी लोक पर ही रहना होगा। उन्हें तुरंत उस यदुवंश में जन्म लेना होगा जहा भगवान स्वम प्रकट होंगे। उन्होंने यह भी बताया की भगवन के अवतार से पहले अनन्त भी वहा प्रकट होंगे जो अपने लाखो फनों से बह्माण्ड को धारण किये हुवे है। और साथ ही साथ विष्णु जी की बहिरंगा शक्ति माया भी प्रकट होगी। (Bhagwan Shri Krishna Ka Avatar In Hindi)
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समस्त देवताओ को भूमि को भी मधुर वचनों से आदेश देकर तथा सान्त्वना देने के बाद समस्त प्रजा पतियों के पिता ब्रह्माजी अपने धाम  , ब्रह्मलोक को चले गए।

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 यहाँ होती है कंस की पूजा
भगवान अपने दिए वचनों अनुसार वासुदेव जी के यहाँ जन्म लेना चाहते थे इस लिए उन्होंने वसुदेव जी को पहले ही बता दिया था। वसुदेव जी की पत्नी देवकी जो की कंस की बहिन थी। कंस बहुत ही दुराचारी राजा था पर वो अपनी बहिन को अपनी जान से भी ज्यादा चाहता था। जब वासुदेव और देवकी का विवाह सम्पन हुआ तो उन्हें घर तक छोड़ने के लिए कंस ने कहा की आप दोनों का रथ में ही चलाऊँगा और में ही तुम्हे घर तक छोड़कर आऊँगा। तब रास्ते में आकाश वाणी हुई की तू जिस बहिन को इतने प्रेम से छोड़ कर आ रहा है उस बहिन के पुत्र के हाथो तेरी मौत होगी। इस भविष्वाणी को सुन कर कंस बहुत क्रोधित हुआ और देवकी के केश पकड़ लिए और देवकी को अपनी तलवार से मारना चाहा। वासुदेव को कंस के इस व्यवहार से आश्चर्य हुआ। अत अंस को खुश करने के लिए वह इस प्रकार बोले ” हे कंस तुम भोजवंश के सवार्धिक प्रसिद्ध राजा हो और लोग तुम्हे महानतम राजा और पराक्रमी के रूप में जानते है। आखिर तुम इतने डरपोक कैसे हो गए अपनी बहिन को उसके विवाह के शुभ अवसर पर मारने को उघत हो गए हो। तुम अपनी मौत से इतने भयभीत क्यों हो। मरण तो तुम्हारे जन्म के साथ ही उतप्न हो चूका है। मान लो की तुम ५५ वर्ष के हो इसका अर्थ यह हुआ की तुम पहले ही ५५ वर्ष मर चुके हो तुम हर पल हर समय मर ही रहे हो फिर भला तुम मरने से इतने डरते क्यों हो ? तुम चाहे आज मरो या १०० वर्ष बाद मौत से बच नही सकते। इस तरह वासुदेव ने कंस से प्राथना की की वह अपनी बहिन को न मारे (Krishna Leela Stories in hindi)
नागमणि का रहस्य
कंस वासुदेव के वचनों के महत्व को जानता था ,और वह उनके तर्क से आश्चर्य हो उठा था। पर कंस ने उन्हें जाने नही दिया और काराग्रह में डाल दिया ताकि वह अपने शत्रु को मार सके देवकी की एक एक सन्तान को उसने मार डाला था पर जैसे ही आठवीं सन्तान स्वम श्री नारायण प्रकट हुवे तब सब द्वारपाल गहरी नींद माया में सो गए बहार बहुत जोर जोर से वर्षा हो रही थी। तभी नारायण ने सन्देश दिया की इस बच्चे के रूप में मेने ही आप के पास अवतार लिया है आप मुझे नन्द महाराज के यहाँ छोड़ आओ और वहा महामाया देवी है उन्हें अपने साथ ले आओ ताकि कंस को लगे पुत्री हुई है। इस ही वासुदेव जी ने किया पर जब सुबह कंस को पता चला की आठवीं संतान पुत्र नही पुत्री हुई है वह उसे भी मारने दौड़ पड़ा सोचने लगा मेरी मौत देवकी की आठवी संतान से है कोई जरूरी नही वह पुत्र ही हो इस सोच के साथ उस ने जैसे ही उस महा माया को उठाया तो महामाया प्रकट हुई और बोली पापी कंस तेरे पापो का घड़ा भर चुका है नारायण ने अवतार ले लिया है अब कुछ समय की बात है वो स्वंम अपने हाथों से तेरा वध करेंगे और इतना कहकर महामाया गायब हों गई। (Krishna Leela Stories in hindi)

तो दोस्तों ये तो थी कृष्ण जन्म की कथा अब हम कल आप को कृष्ण की बाल लीलाओं से अवगत कराएंगे और पूतना वध की कथा के साथ वापस आएंगे। पढ़ने के लिए धन्यवाद आप सभी का तहे दिल से स्वागत है मधुशाला पर। !!
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