भारत लौटीं उज्मा ने सुनाई टॉर्चर की कहानी, पाकिस्तान मौत का कुंआ है

पाकिस्तान में अपने पति की प्रताड़ना का शिकार उज्मा
ने आज अपनी टॉर्चर की कहानी सुनाई. उज्मा ने संकट से निकालने के लिए खास
तौर पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और मोदी का शुक्रिया अदा किया. आज वाघा
बॉर्डर से दिल्ली पहुंची उज्मा ने सबसे पहले सुषमा स्वराज से मुलाकात की.
यहां वो सुषमा के पैर छुए और उनके गले लगकर रो पड़ीं. यहां उज्मा के परिजन
भी मौजूद थे जिन्हें देखकर वह भावुक हो उठीं.

प्रेस कांफ्रेंस में उज्मा ने कहा कि पाकिस्तान जाना बहुत आसान है,
लेकिन आना बहुत मुश्किल है. मेरे मन में खौफ पैदा हो गया, है. पाकिस्तान
में औरत क्या पुरुष भी सेफ नहीं हैं. आखिर मैं वापस आ गई. इसके लिए सुषमा
जी को धन्यवाद बोलूंगी. सुषमा जी ने कहा कि देश की बेटी को बचाना है. हाई
कमीशन के अफसरों का शुक्रिया. मैं एक अनाथ हूं, लेकिन पहली बार मैंने महसूस
किया कि मेरी जिंदगी बेशकीमती है.

 
भारत लौटीं उज्मा ने सुनाई टॉर्चर की कहानी, पाकिस्तान मौत का कुंआ है

मैं खुशनसीब हूूं कि एक ऐसे स्थान से सकुशल लौट आई, जहां तालिबानी
स्थिति है. वहां पर मुझे त्रासदपूर्ण स्थिति, मारपीट और शरीरिक और मानसिक
यातना का सामना करना पड़ा. सुषमा जी और भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों ने
मेरी काफी मदद की. बिना इनकी मदद के मेरा बचना और लौटना संभव नहीं था. उजमा
ने कहा कि आज मुझे पहली बार महसूस हुआ कि मेरी जिंदगी भी इतनी मूल्यवान
है. मैं यह कहना चाहती हूं कि भारतीय नागरिक होना अपने आप में बड़ी बात है.
भारत में जितनी स्वतंत्रता है, वैसा कही भी नहीं है. पाकिस्तान जाना आसान
है लेकिन लौटना मुश्किल है.

उज्मा ने कहा, मैंने पूरी दुनिया देख ली, पाकिस्तान जैसा देश नहीं देखा.
पाकिस्तान में बहुत बुरा हाल है. मेरा बचकर आना बहुत मुश्किल था. अरेंज
मैरिज करने वाली महिलाएं भी वहां रो रही हैं. भारत की बेटी होने पर मुझे
गर्व है. मोदी जी को भी शुक्रिया कहना चाहती हूं.

सुषमा ने की पाक सरकार की तारीफ

सुषमा स्वराज ने संवाददाताओं से कहा कि जैसे ही उज्मा ने बाघा बार्डर
पार किया, मैंने राहत की सांस ली. दुनिया में कहीं भी, किसी देश में भारतीय
उच्चायोग बिना मजहब, जाति को देखे, हर किसी की मदद को तत्पर रहता है. उजमा
के मामले में भी हमने देखा है. विदेश मंत्री ने कहा कि जब उजमा पाकिस्तान
में भारतीय उच्चायोग आई थी, तब उसने वहां भारतीय अधिकारियों से कहा था कि
अगर उसे बाहर किया गया, तो वह खुदकुशी कर लेगी. भारतीय उच्चयोग के
अधिकारियों ने पूरी तत्परता और स्थिति की गंभीरता के अनुरूप कार्य किया.

उन्होंने कहा कि जब उन्हें इस बात की जानकारी मिली, तब उन्होंने फोन पर
उजमा से बात की और उसे भरोसा दिया कि यदि उसे एक साल, दो साल, तीन साल या
इससे अधिक समय तक रखना पड़े, हम पीछे नहीं हटेंगे. सुषमा स्वराज ने कहा कि
जिस प्रकार से बाघा बार्डर पार करने के बाद उजमा ने भारत की मिट्टी को माथे
से लगाया, वह अपने आप में पूरी कहानी कह देता है.

सुषमा ने कहा कि कुछ बातें तो मुझे आज ही पता चली. संकट में फंसे
भारतीयों के लिए एक ही नारा है-परदेस में आपका दोस्त भारतीय दूतावास. इस
मामले में पाकिस्तान विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय ने भी सहयोग का रुख
दिखाया. मानवीय आधार पर पाक सरकार ने मदद की. मैं खास तौर पर जस्टिस कयानी
का शुक्रिया अदा करना चाहूंगा जिन्होंने ताहिर की इस दलील कि ये मामला
पाकिस्तान की प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है, उज्मा के पक्ष में फैसला दिया.
वकील शाहनवाज नून का भी धन्यवाद जिन्होंने उज्मा को अपनी बच्ची समझकर केस
लड़ा

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