पांच पौराणिक पात्र जो रामायण और महाभारत, दोनों समय थे उपस्तिथ

Common Characters in Ramayana and Mahabharata : आप रामायण के सभी पात्रों
से जरूर वाकिफ होंगे लेकिन क्या आप इस महाकाव्य में निभाए गए उन सभी
पात्रों को जानते हैं जिन्होंने महाभारत में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका
निभाई थी। चलिए आज हम आपको उन्हीं पौराणिक पात्रों का परिचय कराते हैं।
 आठ पौराणिक पात्र जो आज भी जिन्दा है
1. हनुमान (Hanuman)

Hanuman

रामायण में प्रमुख भूमिका निभाने वाले भगवान हनुमान महाभारत में महाबली भीम
से पांडव के वनवास के समय मिले थे। कई जगह तो यह भी कहा गया है कि भीम और
हनुमान दोनों भाई हैं क्योंकि भीम और हनुमान दोनी ही पवन देव के पुत्र थे।
 रावण के पुनर्जन्म की कहानी
2. परशुराम (Parshurama)

Parshuram

अपने समय के सबसे बड़े ज्ञानी परशुराम को कौन नहीं जानता। माना जाता है कि
परशुराम ने 21 बार क्षत्रियों को पृथ्वी से नष्ट कर दिया था। रामायण में
उनका वर्णन तब आता है जब राम सीता के स्वंयवर में शिव का धनुष तोड़ते है
जबकि महाभारत में वो भीष्म के गुरु बनते है तथा एक वक़्त भीष्म के साथ भयंकर
युद्ध भी करते है।
 इस मंदिर में अपने आप होती है पूजा
3. जाम्बवन्त (Jambavan)

 krishna_and_Jambavan

रामायण में जाम्बवन्त का वर्णन राम के प्रमुख सहयोगी के रूप में मिलता है।
जाम्बवन्त ही राम सेतु के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाते है। जबकि
महाभारत में जाम्बवन्त, भगवान श्री कृष्ण के साथ युद्ध करते है तथा यह पता
पड़ने पर की वो एक विष्णु अवतार है, अपनी बेटी जामवंती का विवाह श्री कृष्ण
के साथ कर देते है।  भगवान श्री राम की मृत्यु कैसे हुई

4. मयासुर (Mayasura)-

बहुत ही कम लोगों को मालूम होगा की रावण के ससुर यानी मंदोदरी के पिता
मयासुर एक ज्योतिष तथा वास्तुशास्त्र थे।  इन्होंने ही महाभारत में
युधिष्ठिर के लिए सभाभवन का निर्माण किया जो मयसभा के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
इसी सभा के वैभव को देखकर दुर्योधन पांडवों से ईर्षा करने लगा था और कहीं न
कहीं यही ईर्षा महाभारत में युद्ध का कारण बनी।

5. महर्षि दुर्वासा (Maharishi Durvasa)-

हिंदुओं के एक महान ऋषि महर्षि दुर्वासा रामायण में एक बहुत ही बड़े
भविष्यवक्ता थे। इन्होंने ही रघुवंश के भविष्य सम्बंधी बहुत सारी बातें
राजा दशरथ को बताई थी। वहीं दूसरी तरफ महाभारत में भी पांडव के निर्वासन के
समय महर्षि दुर्वासा द्रोपदी की परीक्षा लेने के लिए अपने दस हजार शिष्यों
के साथ उनकी कुटिया में पंहुचें थे।
 मरते वक़्त रावण ने लक्ष्मण को बताई थी ये 3 बातें

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