हनुमान जी से जुड़े पांच चौकाने वाले रहस्य | Hanuman Je Se Judhe 5 Chokane Wale Rahashya In Hindi

हनुमानजी इस कलियुग के अंत तक अपने
शरीर में ही रहेंगे। वे आज भी धरती पर विचरण करते हैं। वे कहां रहते हैं,
कब-कब व कहां-कहां प्रकट होते हैं और उनके दर्शन कैसे और किस तरह किए जा
सकते हैं, हम यह आपको बताएंगे अगले पन्नों पर। और हां, अंतिम दो पन्नों पर
जानेंगे आप एक ऐसा रहस्य जिसे जानकर आप सचमुच ही चौंक जाएंगे…

 
Hanuman Je Se Judhe Rahashya In Hindi

चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा॥
संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
अंतकाल रघुवरपुर जाई, जहां जन्म हरिभक्त कहाई॥
और देवता चित्त ना धरई, हनुमत सेई सर्व सुख करई॥

चारों युग में हनुमानजी के ही परताप से जगत में उजियारा है। हनुमान को
छोड़कर और किसी देवी-देवता में चित्त धरने की कोई आवश्यकता नहीं है।
द्वंद्व में रहने वाले का हनुमानजी सहयोग नहीं करते हैं। हनुमानजी हमारे
बीच इस धरती पर सशरीर मौजूद हैं। किसी भी व्यक्ति को जीवन में श्रीराम की
कृपा के बिना कोई भी सुख-सुविधा प्राप्त नहीं हो सकती है। श्रीराम की कृपा
प्राप्ति के लिए हमें हनुमानजी को प्रसन्न करना चाहिए। उनकी आज्ञा के बिना
कोई भी श्रीराम तक पहुंच नहीं सकता। हनुमानजी की शरण में जाने से सभी
सुख-सुविधाएं प्राप्त होती हैं। इसके साथ ही जब हनुमानजी हमारे रक्षक हैं
तो हमें किसी भी अन्य देवी, देवता, बाबा, साधु, ज्योतिष आदि की बातों में
भटकने की जरूरत नहीं।

1) हनुमान इस कलियुग में सबसे ज्यादा जाग्रत और साक्षात हैं। कलियुग में
हनुमानजी की भक्ति ही लोगों को दुख और संकट से बचाने में सक्षम है। बहुत से
लोग किसी बाबा, देवी-देवता, ज्योतिष और तांत्रिकों के चक्कर में भटकते
रहते हैं और अंतत: वे अपना जीवन नष्ट ही कर लेते हैं… क्योंकि वे हनुमान
की भक्ति-शक्ति को नहीं पहचानते। ऐसे भटके हुए लोगों का राम ही भला करे।

 हनुमान के लिए चित्र परिणाम  
Ram Bhakt Hanuman Jankari In Hindi

2) क्यों प्रमुख देव हैं हनुमान : हनुमानजी 4 कारणों से सभी
देवताओं में श्रेष्ठ हैं। पहला यह कि वे बहुत दयावान है , दूसरा यह कि वे बहुत शक्तिशाली होने के बावजूद ईश्वर के प्रति समर्पित हैं, तीसरा यह कि वे अपने
भक्तों की सहायता तुरंत ही करते हैं और चौथा यह कि वे आज भी सशरीर हैं। इस
ब्रह्मांड में ईश्वर के बाद यदि कोई एक शक्ति है तो वह है हनुमानजी। महावीर
विक्रम बजरंगबली के समक्ष किसी भी प्रकार की मायावी शक्ति ठहर नहीं सकती। 
 यह भी पढ़े >>कैसे हुई कालभैरव की उत्पत्ति पौराणिक रहस्य
3 )क्या हनुमानजी बंदर थे? : हनुमान का जन्म कपि नामक वानर जाति में हुआ था। नए शोधानुसार प्रभु श्रीराम का
जन्म 10 जनवरी 5114 ईसा पूर्व अयोध्या में हुआ था। श्रीराम के जन्म के
पूर्व हनुमानजी का जन्म हुआ था अर्थात आज (फरवरी 2015) से लगभग 7129 वर्ष
पूर्व हनुमानजी का जन्म हुआ था। शोधकर्ता कहते हैं कि आज से 9 लाख वर्ष
पूर्व एक ऐसी विलक्षण वानर जाति भारतवर्ष में विद्यमान थी, जो आज से 15 से
12 हजार वर्ष पूर्व लुप्त होने लगी थी और अंतत: लुप्त हो गई। इस जाति का
नाम कपि था।
 

हनुमानजी के संबंध में यह प्रश्न प्राय:
सर्वत्र उठता है कि ‘क्या हनुमानजी बंदर थे?’ इसके लिए कुछ लोग रामायणादि
ग्रंथों में लिखे हनुमानजी और उनके सजातीय बांधव सुग्रीव अंगदादि के नाम के
साथ ‘वानर, कपि, शाखामृग, प्लवंगम’ आदि विशेषण पढ़कर उनके बंदर प्रजाति का
होने का उदाहरण देते हैं। वे यह भी कहते हैं कि उनकी पुच्छ, लांगूल,
बाल्धी और लाम से लंकादहन का प्रत्यक्ष चमत्कार इसका प्रमाण है। यह ‍भी कि
उनकी सभी जगह सपुच्छ प्रतिमाएं देखकर उनके पशु या बंदर जैसा होना सिद्ध
होता है। रामायण में वाल्मीकिजी ने जहां उन्हें विशिष्ट पंडित, राजनीति में
धुरंधर और वीर-शिरोमणि प्रकट किया है, वहीं उनको लोमश ओर पुच्छधारी भी
शतश: प्रमाणों में व्यक्त किया है।

यह भी पढ़े >>जानिए कौनसी 16 कलाएँ थी भगवान श्री कृष्ण में
 
दरअसल, आज से 9 लाख वर्ष पूर्व मानवों की एक ऐसी जाति थी, जो मुख और पूंछ
से वानर समान नजर आती थी, लेकिन उस जाति की बुद्धिमत्ता और शक्ति मानवों से
कहीं ज्यादा थी। अब वह जाति भारत में तो दुर्भाग्यवश विनष्ट हो गई, परंतु
बाली द्वीप में अब भी पुच्छधारी जंगली मनुष्यों का अस्तित्व विद्यमान है
जिनकी पूछ प्राय: 6 इंच के लगभग अवशिष्ट रह गई है। ये सभी पुरातत्ववेत्ता
अनुसंधायक एकमत से स्वीकार करते हैं कि पुराकालीन बहुत से प्राणियों की
नस्ल अब सर्वथा समाप्त हो चुकी है। 

 यह भी पढ़े >>जानिए महाभारत में कौन किसका अवतार था
4 )जन्म के बारे में धारणाएं :पहला जन्म स्थान :
हनुमानजी की माता का नाम अंजना है, जो अपने पूर्व जन्म में एक अप्सरा थीं।
हनुमानजी के पिता का नाम केसरी है, जो वानर जाति के थे। माता-पिता के कारण
हनुमानजी को आंजनेय और केसरीनंदन कहा जाता है। केसरीजी को कपिराज कहा जाता
था, क्योंकि वे वानरों की कपि नाम की जाति से थे। केसरीजी कपि क्षेत्र के
राजा थे। कपिस्थल कुरु साम्राज्य का एक प्रमुख भाग था। हरियाणा का कैथल
पहले करनाल जिले का भाग था। यह कैथल ही पहले कपिस्थल था। कुछ लोग मानते हैं
कि यही हनुमानजी का जन्म स्थान है।

दूसरा जन्म स्थान : गुजरात
के डांग जिले के आदिवासियों की मान्यता अनुसार डांग जिले के अंजना पर्वत
में स्थित अंजनी गुफा में ही हनुमानजी का जन्म हुआ था।

तीसरा स्थान : कुछ लोग मानते हैं कि हनुमानजी का जन्म
झारखंड राज्य के उग्रवाद प्रभावित क्षे‍त्र गुमला जिला मुख्‍यालय से 20
किलोमीटर दूर आंजन गांव की एक गुफा में हुआ था।

यह भी पढ़े >>प्रभु श्रीराम से जुड़े 10 चौंकाने वाले रहस्य
 अंत में आखिर कहां जन्म लिया? : ‘पंपासरोवर’ अथवा
‘पंपासर’ होस्पेट तालुका, मैसूर का एक पौराणिक स्थान है। हंपी के निकट बसे
हुए ग्राम अनेगुंदी को रामायणकालीन किष्किंधा माना जाता है। तुंगभद्रा नदी
को पार करने पर अनेगुंदी जाते समय मुख्य मार्ग से कुछ हटकर बाईं ओर पश्चिम
दिशा में, पंपासरोवर स्थित है। यहां स्थित एक पर्वत में एक गुफा भी है जिसे
रामभक्तनी शबरी के नाम पर ‘शबरी गुफा’ कहते हैं। इसी के निकट शबरी के गुरु
मतंग ऋषि के नाम पर प्रसिद्ध ‘मतंगवन’ था। हंपी में ऋष्यमूक के राम मंदिर
के पास स्थित पहाड़ी आज भी मतंग पर्वत के नाम से जानी जाती है। कहते हैं कि
मतंग ऋषि के आश्रम में ही हनुमानजी का जन्म हआ था। मतंग नाम की आदिवासी
जाति से हनुमानजी का गहरा संबंध रहा है 

5 ) क्यों आज भी जीवित हैं हनुमानजी? :
हनुमानजी इस कलयुग के अंत तक अपने शरीर में ही रहेंगे। वे आज भी धरती पर
विचरण करते हैं। हनुमानजी को धर्म की रक्षा के लिए अमरता का वरदान मिला था।
इस वरदान के कारण आज भी हनुमानजी जीवित हैं और वे भगवान के भक्तों तथा
धर्म की रक्षा में लगे हुए हैं। जब कल्कि रूप में भगवान विष्णु अवतार लेंगे
तब हनुमान, परशुराम, अश्वत्थामा, कृपाचार्य, विश्वामित्र, विभीषण और राजा
बलि सार्वजनिक रूप से प्रकट हो जाएंगे।

कलयुग में श्रीराम का
नाम लेने वाले और हनुमानजी की भक्ति करने वाले ही सुरक्षित रह सकते हैं।
हनुमानजी अपार बलशाली और वीर हैं और उनका कोई सानी नहीं है। धर्म की
स्थापना और रक्षा का कार्य 4 लोगों के हाथों में है- दुर्गा, भैरव, हनुमान
और कृष्ण।
 
कलयुग में होने वाले इस अवतार की जानकारी लेने के लिए यहाँ क्लिक करें :- कल्कि अवतार 
यह भी पढ़े >>हजारों वर्षों से जीवित है ये आठ महामानव

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *