भानगढ़ की कहानी

Bhangarh Fort Haunted Stories in Hindi , the story of bhangarh fort , Bhangarh Fort History & Story in Hindi , princess of bhangarh ratnavati , Bhangarh Fort Rajasthan Haunted , bhangarh fort story , Bhangarh Fort in Hindi , Story Of The Haunted Fort For A Short Trip , bhangarh fort story haunted in Hindi , bhangarh ka kila , bhangarh ka rahasya , bhangarh ka itihas , भानगढ़ की कहानी , भानगढ़ फोर्ट स्टोरी इन हिंदी , भानगढ़ किले का रहस्य

भानगढ़ का परिचय –  भानगढ़ 17वीं सदी में राजा भगवंत दास ने बनवाया था। बाद में मानसिंह जो (अकबर के नवरत्नों में से एक) ने अपने छोटे भाई माधोसिंह के लिए पुनःनिर्माण करवाया। जो बाद में माधोसिंह ने अपने रिहाइश बना लिया। इसका नाम भी बड़े भाई भानसिंह के नाम पर रखा गया जो इनके पितामहा थे इसका निर्माण 1573 में शुरू कराया गया था। भानगढ राजस्थान के अलवर जिले में राष्ट्रीय उधान सरिस्का के समीप स्थित है। इस किले को बहुत विशाल बनाया गया। इस किले में माधोसिंह के वंशज ३०० वर्षो तक शासन किया माधोसिंह के तीन बेटे थे ( सुजानसिंह, छत्रसिंह, तेजसिंह) थे माधोसिंह के बाद छत्रसिंह गद्दी पर बैठे छत्रसिंह ने बाद में अपने बेटे अजबसिंह को गद्दी दे दी अजबसिंह ने अजबगढ़ बसाया और वे वही रहने लगे। बाद में छत्रसिंह के बेटे हरी सिंह ने शासन किया जब औंरगजेब का शासन था औंरगजेब ने हरिसिंह के दोनों बेटो को मुसलमान बना दिया। जब धीरे -धीरे औरगजेब का शासन ढिल्ला पड़ने लगा तब आमेर के राजा सवाई जय सिंह ने हरिसिंह के बेटो को मार कर माधोसिंह के वंशजो को ये किला वापिस दे दिया | भानगढ़ आमेर किले के तर्ज पर बनाया गया था |

इस किले को भूतो का किला कहा जाता है ऐसा माना जाता है कि आज भी वहाँ रात को पहले जैसा हो जाता है जैसे पहले हुआ करता था हा ये सब कितना सत्य है इन बातो में ये तो पता नही पर यहां के स्थानीय लोगो का यही कहना है रात को महल के आस पास कोई नहीं रह सकता है। इस महल के साथ कई कहानियाँ जुड़ी हुई है जो बहुत जबरदस्त है उन कहानियो को सुन कर तो ऐसा लगता है कि शायद सच हो.

कहानी भानगढ़ फोर्ट की ( Hindi Story of Bhangarh Fort )

भानगढ़ की कहानी – कहते है की यहाँ बालूनाथ योगी जी रहा करते थे। यहाँ उनका तपस्या का स्थल था इसलिए बालूनाथ जी ने इस महल को बनवाने के लिए एक शर्त रखी की किले की परछाई उनके तपस्या स्थल पर नहीं पड़नी चाहिए। इस शर्त पर किले को बनाने की इजाजत दी पर माधोसिंह के वशजों ने उन बातो का अनुसरण नहीं किया और किले का निर्माण ऊपर की तरफ करवाते रहे जिसके कारण एक दिन किले के छाया योगी जी के तपस्या स्थल पर पड़ गयी फिर क्या था योगी जी ने ये देख कर भानगढ़ किले को श्राप दे दिया और किला उसी समय ध्वस्त हो गया | बालूनाथ योगी जी की समाधी आज भी इस किले में है।

दूसरी और कहानी है इस किले के बारे में जो की सच लगती है।

कहा जाता है की इस महल की राजकुमारी रत्नावती बहुत सुन्दर थी जिसके विवाह की तैयारी हो रही थी यही पर एक तांत्रिक था सिंधिया नाम का जिसने राजकुमारी को देख लिया और उस पर मोहित हो गया उसने उसे पाने के लिए साजिश रची राजकुमारी की दासी जो बाजार में राजकुमारी के लिए तेल लेने आयी थी उस तेल को तांत्रिक ने सम्मोहित कर दिया जब दासी राजकुमारी को तेल लगाने लगी तो राजकुमारी से तेल की शीशी चट्टान पर जा गिरी और सम्मोहन के कारण चट्टान तांत्रिक कि तरफ लुढ़कने लगी और तात्रिक पर जा गिरी जिसे तात्रिक की मौत हो गयी तात्रिक ने मरते समय पूरे राज्य का नाश होने का श्राप दे दिया की सब मरने के बाद भी यही भटकती रहे | इसलिए आज भी रात में यहाँ से आवाजे आते है जो इस महल में रुक जाए वो वापिस नहीं आता।

भानगढ़ किला – कुछ समय पहले हम वहाँ गए थे कुछ उत्सुकता थी इस महल के बारे में जानने की भानगढ़ बारे में बहुत कुछ सुन रखा था भानगढ़ किला बहुत बड़ा है जैसे आमतौर पर सभी किले होते है। किले के आस पास जंगल ही जंगल दिखाई देता है किले के प्रवेश द्वार से अंदर जाते है तो आम रास्ता है। यहां हनुमान जी का मंदिर है जिसके कारण यहां बंदर भी बहुत है रास्ते में आस पास दुकाने बनी हुई है जो की एक ही लाइन में है पीछे घर बने हुए देखते है ये सब विस्तृत क्षेत्र में फैले हुए है किले में गोपीनाथ जी का मंदिर हनुमान जी का मंदिर है मंगला गोरी का मंदिर है। सोमेश्वर महादेव का मंदिर मंदिर के पास में बावड़ी बनी हुई है जहाँ लोग स्नान करने आया करते है आगे किले के अंदर जाने द्वार से जब ऊपर जाते है तो किला चार मजिला है ऊपर जाने पर पूरा किला दिखाई देता है किले के चारो तरफ किले के दीवार दिखाई देते है यह महल की नृत्यकाओं का महल भी बना हुआ है। किला आस पास पहाड़ो से घिरा हुआ है ऊपर एक छतरी भी दिखाई है। किला के अंदर भेरू का स्थान भी है कहा जाता है की मंदिर के आस पास रह जाने पर कोई हानि नही होती पर किले में रात को जो जाता है वो वापिस नहीं आता है।

इस लिए वहां पुरातत्व विभाग किले को सुबह खोलते है और शाम को ५ बजे सभी को बाहर निकाल कर किले को बंद कर देते है शाम को वहां किसी को भी रहने नहीं दिया जाता है।

Loading...

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *