होली की कहानी, महत्व, कथा, और इतिहास

Holi Ki Kahani Mahatv aur Itihas in Hindi – होली फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है ।पूर्णिमा को सांय काल मे होलिका दहन किया जाता है।और दूसरे दिन घुलण्डी खेली जाती है।  होली के एक महीने पहले डंडा रोपा जाता है जहाँ होलिका दहन किया जाता है। पूरे मास होली के गीत गाये जाते है फागुन महोत्सव मनाया जाता है । होली के 15 दिन पहले घरो को शुद्ध किया जाता है।होलिका दहन के दिन घरो में पकवान बनाये जाते है और होली की पूजा की जाती है पकवानों का भोग लगाया जाता है ।

होली की कहानी, महत्व, कथा, और इतिहास – Holi Ki Kahani Mahatv aur Itihas in Hindi

आइये आपको होलिका की कहानी बताए

ऋषि कश्यप के दो पुत्र हिरण्याक्ष और दूसरा पुत्र हिरण्यकश्यप महाबली राक्षस थे ।हिरण्याक्ष का विष्णु अवतार वाराह से युद्ध हुआ जिसमें हिरण्याक्ष की मृत्यु हो गयी ।अपने भाई का बदला विष्णु भगवान से लेने के लिए हिरण्यकश्यप असीम शक्ति के लिए तपस्या करने चला गया । पीछे से इंद्र ने महल पर हमला कर सभी असुरों को मार दिया ।और हिरण्यकश्यप की पत्नी कयाधु को बंदी बनाकर इंद्र ले जाने लगा ।पर बीच मे नारद मुनि ने इंद्र को रोक दिया और अपने साथ अपने आश्रम ले गए कयाधु गर्भवती थी । कयाधु आश्रम में रहने लगी और नारद मुनि उन्हें विष्णु भगवान की कथाएँ सुनाने लगे ।अंदर पल रहे गर्भशिशु को भी कथाये सुनती थी ।थोड़े दिनों बाद हिरण्यकश्यप की तपस्या से  प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी  दर्शन दिए  हिरण्यकश्यप ने ब्रह्मा जी से  वरदान प्राप्त किया और इंद्र पर आक्रमण कर दिया ।तीनो लोको जीत लिया ।और उसने विष्णु की भक्ति पर रोक लगा दी खुद को भगवान लगा ।एक कुरुर राजा बन गया।

और कयाधु को महल वापस ले आया महल वापस आने पर कयाधु ने एक सुंदर पुत्र को जन्म दिया ।जिसके नाम प्रहलाद रखा गया ।प्रहलाद विष्णु भक्त था ।हिरण्यकश्यप बहुत खुश था ।प्रहलाद के बड़े होने पर उसे शिक्षा प्राप्ति के लिए अपने गुरु के आश्रम भेज दिया ।

थोड़े दिनों में गुरु शुक्राचार्य प्रहलाद को लेकर  वापिस आये और प्रहलाद की शिकायत करने लगे । जिस पर हिरण्यकश्यप को क्रोध आ गया और प्रहलाद को मारने की आज्ञा देदी  ।इस कारण प्रहलाद को बार बार मारने की कोशिश की गई ।लेकिन हर बार विष्णु की भक्ति के कारण  बच जाता ।जिस पर हिरण्यकश्यप को और गुस्सा आया ।

तब हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को बुलाया  और उसे आज्ञा दी कि वो उसे गोदी में लेकर अग्नि में बैठने को कहा ।होलिका को वरदान था कि वो अग्नि से सुरक्षित रहेगी और किसी को भी अग्नि में लेकर बैठे तो वो जलेगी नही ।

इस कारण होलिका प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठ गई ।प्रहलाद अपने भक्ति में लीन था जिस कारण प्रहलाद को कुछ नही हुआ और होलिका जलने लगी ।जब अग्नि शांत हुई तो प्रहलाद बैठा हुआ था और होलिका जल गई ।प्रहलाद के बचने पर लोगो ने अपनी ख़ुशी जाहिर की

लेकिन हिरण्यकश्यप क्रोध से भर गया और विष्णु भगवान को ललकार ने लगा जैसे ही हिरण्यकश्यप ने महल के स्तम्भ को तोड़ा वैसे ही उसमे से आधा नर आधा पशु जैसा निकला वो विष्णु अवतार  नरसिंह था उसने हिरण्यकश्यप को उठाया और द्वार के बीच मे अपनी घुटनों पर लेटा कर पेट को फाड़ दिया ।

हिरण्यकश्यप के मरने से और प्रहलाद के बचने से राज्य के लोगो ने खुशियां मनाई  ।इस दिन से होली मनाई जाने लगी

इस दिन अपने मन को साफ रख कर होली जलाए ।एक कागच पर अपनी बुरी चीजों को लिख कर अग्नि में प्रवाहित करें।

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