केला देवी मंदिर रहस्य : यहाँ डकैत भी आते है मन्नत माँगने

केला देवी मंदिर सवाई माधोपुर के पास राजस्थान के करौली जिले में है यह एक बहुत ही प्राचीन मंदिर है केला देवी मंदिर में चांदी की चौकी पर सोने की छतरियों के नीचे दो प्रतिमाएं हैं यह दो बहनें हैं एक थोड़ा सा टेढ़ा है वह केला मैया है और दूसरी दूसरी का मुख्य भेजा है वह चामुंडा मैया है यह दोनों देवी की प्रतिमाएं है केला देवी के आठ भुजाएं हैं मंदिर उत्तर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है उत्तर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में ख्याति प्राप्त है इस मंदिर को 51 शक्तिपीठों में से एक जाना जाता है केला देवी मंदिर देवी भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है यहां आने वालों को सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है|

कैला देवी मंदिर, करौली – Kaila Devi Temple, Karalui

यहां हर भक्तों की मुराद पूरी होती है यहां आने वालों को काफी सुकून मिलता है तेरे कोट मंदिर के मनोरम पहाड़ी की तलहटी में स्थित इस मंदिर का निर्माण ताजा भोपाल ने करवाया था और इस मंदिर का निर्माण 1600 ईस्वी के बीच हुआ था इस मंदिर में जुड़े अन्य कथाएं प्रचलित है कहा जाता है कि भगवान कृष्ण के पिता वासुदेव और देवकी को जेल में डाल कर जिस कन्या का वध कंस करना चाहता था वह योग माया केला देवी के रूप में इस मंदिर में विराजमान है और इसे लोग आज भी पूज्य मानते हैं और आज दूर-दूर से भक्त इन्हें आकर पूछते हैं

एक अन्य मान्यता के अनुसार पुराने काल में त्रिकूट पर्वत के आसपास का इलाका घने जंगल से भरा हुआ था इस इलाके में एक राक्षस रहता था जिसका नाम नरकासुर था उसमें काफी भयंकर उत्पात मचा रखा था सभी का जीना मुश्किल कर रखा था उसी के भय और अत्याचारों से आम जनता दुखी हो रही थी दुखी जनता ने मां से अरदास लगाए की मां हमारी मदद करो हमारी इस राक्षस से रक्षा करो मां के आगे निवेदन किया विनती की तब जाकर आम जनता के दुख को दूर करने के लिए मां केला देवी ने इस स्थान पर अवतार लिया और नरकासुर का वध किया और अपने भक्तों को मुक्त किया तभी से भक्तों उन्हें मां दुर्गा का अवतार मान कर उनकी पूजा करते हैं और उन्हें पूछते हैं केला देवी के नाम से इस मंदिर में संगमरमर और लाल पत्थरों का निर्माण कार्य में कार्य किया गया है जो स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है |

कहा जाता है कि मंदिर में स्थापित मूर्ति पूर्व में नगरकोट में लाई गई हुई है विधर्मी राक्षसों के मूर्ति तो अभियान में अशिक्षित उस मंदिर के पुजारी योगीराज मूर्ति को  यहां ले आए और यहां स्थापित कर दिया तभी से दूर दूर से भक्त इन्हें पूजने आते हैं केदार गिरि बाबा की गुफा के पास रात हो जाने से उन्होंने मूर्ति बैलगाड़ी से उतार कर नीचे रख दी थी और बाबा से मिलने चले गए थे दूसरे दिन जब सुबह योगीराज ने मूर्ति उठाने की चेष्टा की तो वह मूर्ति हिला भी नहीं सके इसे माता भगवती की इच्छा समझ योगीराज ने मूर्ति को वही स्थापित कर दिया मूर्ति की सेवा करने की जिम्मेदारी पूजा पाठ करने की जिम्मेदारी उन्हें बाबा केदार गिरी को सौंपकर लौट आए मां केला देवी के भक्त दर्शन करने के बाद यह बोलते हुए मंदिर से बाहर गए थे कि जल्द ही लौट कर फिर वापस आयेगे कहा जाता है कि आज तक नहीं आई एक मान्यता है कि उनके इंतजार में माता आज भी उधर ही उनका इंतजार करती है और मैं उधर ही देखती है जिधर वह गए इसीलिए मां केला देवी का मुंह थोड़ा सा टेढ़ा है |

करौली में स्थित मां केला देवी मंदिर के मैं वेश बदलकर डाकू आए और मां केला देवी की आराधना किया करते थे वह अपने लक्ष्य को पाने के लिए मां से मुरादे मांगा करते थे और मुराद पूरी होने पर फिर लौट कर आते थे मां की कई घंटों साधना किया करते थे और विजय घंटा बजाते थे और नगाड़े आरती किया करते थे

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