लोहड़ी का पर्व है निराला : इतिहास एवं महत्व

लोहड़ी का पर्व है निराला : इतिहास एवं महत्व | Lohri festival history and Importance in hindi | Lohri festival in Hindi लोहड़ी का पर्व है सबसे निराला,  क्या आप जानते है कि लोहड़ी  का पर्व  क्यों और कैसे मनाया जाता है क्या होती है लोहड़ी,  नही जानते तो आइए आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे ।

लोहड़ी का पर्व है निराला : इतिहास एवं महत्व – Lohri festival history and Importance in hindi

लोहड़ी का नाम सुनते ही आपको क्या याद आता है धूमधड़ाका तिल से बनी मिठाई और रेवड़ी और गिद्दा  आया कुछ याद ,लोहड़ी  धूमधाम का त्योहार है।  लोहड़ी  उत्तरभारत के  पंजाब और हरियाणा राज्यों का मुख्य त्योहार है  ये त्योहार पंजाबियों का त्योहार है पंजाब ,हरियाणा में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है पंजाब ,हरियाणा के अलावा ये त्योहार दिल्ली,   हिमाचल, और  जम्मू कश्मीर में भी मनाया जाता है यहां ये एक मुख्य त्योहार माना जाता है

लोहड़ी मकर संक्रांति के एक दिन पहले और पोष माह  के आखिरी दिन सूर्य के अस्त होने के बाद मनाया जाता है  लोहड़ी  का अर्थ है ल का अर्थ है (लकडी) ओह का (उपले) ,डी का (रेवडी) इन तीन शब्दों से मिल कर बना है लोहड़ी   इस लिए इस दिन लकड़ी,उपले और रेवडी से लोहड़ी बनायीं जाती है  ये माना जाता है कि  लोहड़ी श्रतुयज्ञ  के अनुष्ठान का अवशेष है ये यज्ञ मकर संक्रांति के दिन किया जाता है साथ माघ की सर्दी से बचने के लिए आग  सहायक होती है इसलिए इसे मौसमी पर्व भी माना जाता है पंजाबी इस दिन नई फसल के आने कि ख़ुशी में और नई   ऋतु के परिवर्तन होने की ख़ुशी में भी मनाते है

लोहड़ी पर्व कुछ  पुरानी कहानियों से भी जुड़ा है जैसे माता सती की कहानी दक्ष प्रजापति ने  जो यज्ञ का अनुष्ठान किया था और उसमें उनकी पुत्री सती ने योगाग्नि में दहन कर लिया था उनकी याद में ये अग्नि जलाई जाती है।और इस कारण इस दिन अपनी शादी शुदा बेटियों को उपहार देने का रिवाज है जैसे(वस्त्र,मिठाई, रेवडी, फल आदि) भारत के उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल जिले में इस दिन खिचड़वार त्योहार मनाया जाता है और दक्षिण में पोंगल त्योहार आता है इसके साथ ही दुल्हा भट्टी की कहानी से भी जुड़ा है इस दुल्हा भट्टी के गीत भी गाये जाते है

लोहड़ी के 20दिन पहले से ही लड़के- लड़कियां एकत्रित हो कर  लोकगीत गाते हुए घरो से लकडीऔर उपले लोहड़ी मांगते है और रेवडी भी जब ये सब इकठ्ठा हो जाता है तो लोहड़ी मानते है सब मे रेवडी बाटते है

इस दिन महिलाएं घर की साज़ सजा करती है और घरो को सजाया जाता है जैसे दिवाली के समय घरो को  सजाया जाता है और तिल और गुड़ के व्यंजन बनाये जाते है और बहुत सारे मिठाइयां बनती है ।ये त्योहार सब मिल कर बनाते है शाम के समय  सभी लोग एकत्रित हो कर अग्नि के चारो तरफ घेरा बनाकर बैठते है  और पूजा अर्चना करते हैं और घर की महिलाएं भी पूजा करती है और मनत मांगती है लोहड़ी के गीत गाये जाते है अग्नि में तिल डाल कर मन्न्त मांगने से पुरी होती है इस दिन रेवडी, मूंगफली, लावा बाटते है और भंगड़ा और गिद्दा डालते है खूब मौज मस्ती करते हैं और एक दूसरे को उपहार देते है और नई ऋतु और का इंतजार करते है इसके अगले दिन पतंगबाजी का दिन मकर संक्रांति का दिन मनाया जाता है

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