शोभायात्रा में बोले मुनि कुमार : महावीर के सिद्धांतो से ही जीवन में सकारात्मक परिवर्तन होगा

सरदारशहर | तेरापंथ भवन में महावीर जयंती पर शोभा यात्रा निकली गयी। शोभा यात्रा में महिला मंडल, युवक मंडल, कन्या मंडल सहित तेरापंथ समाज के लोग शामिल थे। मुनि सुमति कुमार जी ने कहा की भगवान महावीर के सिद्धांतो को हम अपने जीवन में उतार कर सकारात्मक परिवर्तन ला सकते है। जिन व्यक्तियों ने उनके इन सिद्धांतो की रहो पर चलने को ठानी है उन सभी का जीवन सफल हुआ है।

महावीर जयंती के इस पावन अवसर पर दिगंबर, श्वेतांबर समस्त जैन समाज की और से शोभा यात्रा निकाली गयी है। तेरापंथ भवन से शोभा यात्रा का जलूस शरू हुआ जो मुख्य मार्गो से होते हुए दिगंबर जैन मंदिर में जाकर समाहरो में बदल गया।

आज राष्ट्र की वर्तमान स्थिति में ऐसे नेताओं की जरूरत नहीं जो सिर्फ बाते करते हों और भाषण देकर अपने स्वार्थों का पोषण करते हों। आज आवश्यकता है ऐसे समर्पित जीवन की जिस जीवन में तड़फन है समाज और राष्ट्र को प्राणवान बनाने की। भगवान महावीर के जीवन से और उनके पवित्र सिद्धांतों से ही वर्तमान जगत को शांति की श्वासें मिल सकती हैं। महावीर के उदय के पहले धार्मिक और सामाजिक चेतनाएं खत्म हो चुकी थीं। मानव दानव बन गया था राष्ट्र की आत्मा को धार्मिक और सामाजिक रूढियों ने जर्जरित कर दिया था। देवालयों में धर्म के नाम पर खून की नदियां बहाई जाती थी, अंत्यजों पर वर्ण भेद और जाति भेद के नाम पर गहरे अत्याचार हो रहे थे।

चारों तरफ हाहाकार और चीत्कार थी-मानवता खत्म हो चुकी थी। ऐसे समय में महावीर जैसे महापुरूष का उदय इस वसुंधरा पर राजा सिद्धारथ और रानी त्रिशला के घर पर क्षत्रिय कुण्ड ग्राम में हुआ। महावीर बालक से युवा बने। उनसे यह राष्ट्र की स्थिति देखी नहीं गई। वे राष्ट्र निर्माण के लिए आगे बढे। उनके निर्णय को विशाल वैभव, सम्पत्ति और विशाल प्रासाद बदल नहीं सके और वे बैठ गए एकांत स्थल में। उन्होंने अध्ययन किया तत् युगीन समस्याओं की और सोचा कि इन समस्याओं का हल क्या कैसे? क्योंकि भगवान महावीर मानवतावादी विचारधारा के महापुरूष थे। वे चाहते थे विश्व के समस्त प्राणी समानता के आधार पर जीवित रहे। न उनमें वर्ग भेद हो ओर न जाति भेद हो। मानवता के आधार पर इस विशाल राष्ट्र में सब ही जीवन यापन करें। महावीर चाहते थे धार्मिक और सामाजिक क्रांति। महावीर की क्रांति का अर्थ तोड़फोड़ व राष्ट्र की सम्पत्ति को नष्ट करने का नहीं था। उनकी क्रांति का अर्थ था सिर्फ परिवर्तन। जीवन में परिवर्तन, विचारों में परिवर्तन ।

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Vipin Pareek

Entrepreneur, Blogger, YouTuber, Social Worker, Founder and CEO Noobal.com & Madhushala.info - News Media Information Technology Company

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