बच्चों पर अधिक पाबंदियां ना लगाएं

आजकल अक्सर हो रहे बच्चों के साथ घरवालों और स्कूली अध्यापकों के रूखे व्यवहार पर एक आलेख ।।

आज के जमाने का एक युवक , जिसने अपने जहन में बचपन से ही हज़ारों शौक पाल रखे थे , लेकिन कभी किसी को बताया नहीं क्योंकि चेहरे से भोला भाला दिखने वाला था वह और उसके भोलेपन का सबने फायदा उठाया था ।

उसको कभी बोलने नहीं दिया गया । जितनी पाबन्दी किसी घर में लड़कियों पर लगाई जाती थी उससे ज्यादा तो उस लड़के पर पाबन्दियां थी । उसको सिर्फ पढ़ाई में ही छूट दी हुई थी , सारा दिन पढ़ो पढ़ो और पढ़ो । बेचारा सारा दिन पढ़ता लेकिन कुछ याद नहीं रहता था । उसकी खेलने कूदने की इच्छा थी लेकिन किसी को कहने से डरता था , एक आध बार बिना कहे ही पिछे के गेट से दोस्तों के संग खेलने निकाल जाया करता था लेकिन तुरन्त ही घर ना पाकर उसको ढूंढ़ ढूंढा कर घर तुरन्त ले जाया जाता और खूब सुनाया जाता और हाथ भी उस बेचारे पर उठा दिया जाता ।

वो अब पहले से ज्यादा डरने लगा था किसी हां दोस्त मिल जाते तो जैसे सारा आसमान ही मिल जाता उसको बाकी सबसे उसको डर लगता था , दोस्त भी कितना समय साथ रहते स्कूल के बाद तो घर ही जाना पड़ता था और वही डर डर कर कदम उठाते हुए घर चला जाता लेकिन ये क्या अब घर का आंतक स्कूल में भी छाने लगा अब उसको घर जितना डर स्कूल में भी सताने लगा क्योंकि कुछ नमक मिर्च घोलकर अब स्कूल में मस्साब को बातें बताए जाने लगी , पढ़ाई नहीं करता कह कर हर दम मार खिलाई जाने लगी ।

अब बेचारा वो लड़का पत्थर दिल हो गया अब कोई कुछ कहो फ़र्क नहीं पड़ता । धीरे धीरे बड़ा हो गया और घरवालों से नफ़रत भी करने लगा लेकिन एक मन से मां बाप को प्रेम भी करता था और कोसने भी लगा ।। अब धीरे धीरे स्कूल की शिक्षा पूरी कर महाविद्यालय की और गया समझदार भी अब धीरे धीरे हो गया , लेकिन एक बीमारी उसको जरूर हो गई चिडचिडापन की बीमारी । क्योंकि बचपन कि यादें आज भी उसके जहन में है और वो आज अपनी नाकाबिलियत का कारण घर और विद्यालय के शिक्षकों को मानता है ।।

इसलिए अभी प्रिय पारिवारिक जनों और स्कूली अध्यापकों आप अपने बच्चो , छात्रों को प्रेम से जिंदगी जीने का सलीका सिखाए उसके टूटते हुए हौसलों को मजबूती प्रदान करें ना की टूटते हुए हौसलों पर पत्थर मारे ।

अगर पत्थर मारोगे तो हो सकता है वो आपका सामना करने की हिम्मत ना करता हो लेकिन आपके कारनामों का उजागर और किसी के सामने करता रहे और लोगों में आपके प्रति द्वेषता के भाव बढ़ जाए और आपके ही चाहने वालों में अकाल पड़ जाए ।।
धन्यवाद ।।

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Gulshan Kumar gk

Shayri lover Article writer in Hindi

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