भगवान शिव को क्यों लेना पड़ा नारी अवतार

Bhagwan Shiv Ki Kahani in Hindi – भगवान शिव को क्यों लेना पड़ा नारी अवतार – आपने शिव के बारे में बहुत सी कहानियाँ सुनी होंगी क्या आपने ये सुना है की भगवान शिव को भी नारी का अवतार लेना पड़ा। क्यों लेना पड़ा इसके पीछे क्या कहानी हो सकती है ऐसा क्या हुआ होगा जिसके कारण शिव भगवान को नारी का अवतार लेना पड़ा आइये भगवान शिव के बारे में जाने –

एक बार शिव भगवान  ध्यान में मग्न थे ध्यान में उन्हें आनद आ रहा था वही आनद बच्चे रास से ले रहे थे अचानक भगवान शिव को आभास हुआ की जो आनद उन्हें ध्यान में मिल रहा था वही आनद रास में लीन बच्चे नाच कर उसी आनद का पान कर थे.

भगवान शिव को क्यों लेना पड़ा नारी अवतार – Bhagwan Shiv Ki Kahani in Hindi

वह ये सब देख कर वे हैरान थे की छोटी उम्र में उनका वह भक्त बांस के छोटे टुकड़े की मोहक धुन पर सभी को नचाकर परम आनद में डुबो रहा था ,अब शिव से रहा नहीं गया वह और वह ये रास देखना चाहते थे वह ध्यान से तुरंत उठे और सीधे यमुना के तट की और चल दिए। वह यमुना को पार कर देखना चाह रहे थे के वहा क्या हो रहा है यह भी पढ़े – 5 बुरी आदतें जो आपको धनवान बनने से रोकती है

लेकिन उनके रास्ते में ही नदी की देवी “वृन देवी” बीच में आ गयी। वृन देवी ने उनसे कहा,’आप वहा नहीं जा सकते है ‘ इस पर शिव जी को आश्चर्यचकित रह गए। इस पर भगवान शिव जी ने हसते हुए कहा क्यों में वहा क्यों नहीं जा सकता ?’ वृनदेवी ने कहा ,’नहीं ,क्योकि वहा कृष्ण रास कर रहे है वहां कोई पुरुष नहीं जा सकता। अगर आप वहां जाना चाहते है तो आपको नारी रूप लेना पड़ेगा। अब शिव भगवान के लिए विचित्र स्थति थी की वह एक महिला का रूप कैसे ले सकते है क्योकि भगवान शिव पौरुष का प्रतीक है उनका प्रतीक लिंग और बाकी सब चीजों के होने की भी यही वजह है ये प्रतीक उनके पौरुषता के साक्षात प्रमाण है। यह भी पढ़े – पानी पीने का सही समय क्या है ?

अब ऐसे में शिव जी क्या करे उनके सामने बड़ी दुविधा खड़ी हो गयी थी की वह महिला के रूप में कैसे आये। वही दूसरी और रास अपने चरम पर था शिव भगवान को देखना भी था वृनदेवी बीच में आ गई और बोली ,’आप वहा नहीं जा सकते है कम से कम आपको महिला के वस्त्र तो धारण करने ही होंगे अगर आप महिला का वेश धारण करने के लिए तैयार है ,तो ही में आपको जाने दूंगी। वरना नहीं। शिव जी ने आस पास देखा ,कोई नहीं देख  रहा था शिव जी ने ता कहा ठीक है ,तुम मुझे गोपियों के वस्त्र दे दो’. | तब वृनदेवी ने उनके सामने गोपी के वस्त्र पेश कर दिए। शिव जी ने उन्हे पहना और नदी पार करके चले गए। यहां उनको रास  शामिल होने की बेताबी जो थी उस रास में  जा कर शिव भगवान भी मगन हो गए. यह भी पढ़े – जिंदगी बदल देंगी आपकी यह पोस्ट

कृष्ण भगवान की रास लीला भगवानो को भी मन्त्र मुगध कर देती थी। हम तो इंसान है. इस प्रकार भगवान शिव को भी रास देख़ने के लिए नारी वेश धारण करना पड़ा.

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