हिन्दी व्याकरण की परिभाषा और महत्व – हिंदी ज्ञान

व्याकरण क्या है – जिसके द्वारा हमें किसी भाषा के बोलने तथा लिखने के नियमों की व्यवस्थित पद्धति का ज्ञान होता है, उस विधा को ‘व्याकरण’ कहा जाता हैं। ।

व्याकरण के द्वारा किसी भाषा को शुद्ध रूप से बोलना या लिखना जाना जाता है।

व्याकरण अपनी भाषा को सुव्यवस्थित बनाये रखने का काम करता हैं।
व्याकरण, भाषा के शुद्ध और अशुद्ध दोनों ही रूपों पर ध्यान देता है।

हिंदी , अंग्रेजी , संस्कृत जैसी प्रत्येक भाषा के अपने नियम होते हैं, उस भाषा के नियम व्याकरण भाषा को शुद्ध लिखना व बोलना सिखाता है।

मानव अपने जीवन में मुख से बोलकर और हाथों से लिखकर प्रत्येक भाषा में स्वयं के विचार कर सकता है और वो करता भी है ।
लेकिन इससे भाषा का कोई निश्चित एवं शुद्ध स्वरूप स्थिर नहीं हो सकता। भाषा के शुद्ध और स्थायी रूप को निश्चित करने के लिए नियमपूर्वक योजना बनाने की आवश्यकता होती है और उस नियमपूर्वक बने हुए योजना को हम व्याकरण कहते हैं।

व्याकरण वह शास्त्र है जिसके द्वारा किसी भी भाषा के शब्दों और वाक्यों के शुद्ध स्वरूपों एवं शुद्ध प्रयोगों का पूर्ण ज्ञान कराया जाता है।

कोई भी मनुष्य शुद्ध भाषा का पूर्ण ज्ञान व्याकरण के बिना नहीं कर सकता। अतः भाषा और व्याकरण का घनिष्ठ संबंध हैं वह भाषा में उच्चारण, शब्द-प्रयोग, वाक्य-गठन तथा अर्थों के प्रयोग के रूप को निश्चित करता है। व्याकरण के विभाग- व्याकरण के तीन अंग निर्धारित किये गये हैं-

वर्ण विचार- इसमे वर्णों के उच्चारण, रूप, आकार, भेद आदि के सम्बन्ध में अध्ययन होता है।

शब्द विचार- इसमें शब्दों के भेद, रूप, प्रयोगों तथा उत्पत्ति का अध्ययन किया जाता है।
वाक्य विचार- इसमे वाक्य निर्माण, उनके प्रकार, उनके भेद, गठन, प्रयोग, विग्रह आदि पर विचार किया जाता है ।।

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Gulshan Kumar gk

Shayri lover Article writer in Hindi

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