हनुमान जी का जन्म कैसे हुआ ? - Hanuman Ji Ka Janam Kaise Hua



हनुमान जी के जन्म की कथा - Hanuman Ji Ka Janam Kaise Hua - 8 April 2020 Hanuman Jayanti in Hindi - 8 अप्रैल को हनुमान जयंती

जानिए भगवान श्री हनुमान जी का जन्म कैसे हुआ 
आज श्री राम भक्त हनुमान को कौन नहीं जनता। पृथ्वी ही नहीं बल्कि तीनों लोको में इनकी पूजा होती है। बजरंगबलि संकट मोचन के रूप में भी जाना जाता है। आज पुरे विश्व में कोरोना नाम की महामारी तेजी से अपने पैर पसार रही है ऐसे में हनुमान ही एक मात्र देवता है जो हर बीमारियों और समस्याओं से हमें बचा सकते है।
Hanuman Jayanti 2020 - हनुमान जी के जन्म की कथा 

हनुमान जी शिव जी के 11 वे रूद्र अवतार है। वो आज कलयुग में भी जीवित है। और हम सब के साथ है। आइये जानते है उनके जन्म की कथा - यह हर कोई जानना चाहता है की हनुमान जी का जन्म कैसे हुआ और कहाँ हुआ। 

तो आज इस पोस्ट में हम एक कथा के जरिए जानेंगे मारुती के जन्म की कहानी :-

यह बात आज से हजारों - लाखों साल पहले की है। जब त्रेता युग में एक तरफ भगवान राम का जन्म हुआ था। आप सभी जानते है की भगवान राम का जन्म अयोध्या नगरी में हुआ था। हनुमान जी का जन्म गुमला जिले के आंजनधाम में स्थित एक पहाड़ी की गुफा में हुआ था। इस गुफा का द्वार कलयुग में अपने आप बंद हो गया है। कहा जाता है कि माता अंजनी लोगों द्वारा दिए जाने वाली बलि से नाराज थी तो उन्होंने ये गुफा बंद कर दी थी। ये गुफा आज भी आंजन नगर में हैं। 

देवी अंजना को शिव के आशीर्वाद से पुत्र की प्राप्ति 
देवी अंजना भगवान शिव की तपस्या में लीन थी। देवी अंजना के कोई भी संतान नहीं थी ऐसे में अंजना माता भगवान शिव की पूजा पुत्र प्राप्ति हेतु कर रही थी। अंजना देवी को बहुत दिन भूख - प्यास में तपस्या करते देख भगवान शिव उन पर प्रस्न हुए। शिव भी अपने रूप में धरती पर जन्म लेने के लिए बहुत समय से प्रतीक्षा में थे। क्योकि उनके आराध्य देव विष्णु भी राम के रूप में धरती पर जन्म ले चुके थे। 

शिव ने पवन देव के जरिए अंजना माता के कान के द्वारा उनके गर्भ में प्रवेश किया। और सारी बात पवन देव ने अंजना माता को समझाई की अब आपके गर्भ से कोई साधारण बालक जन्म नहीं लेगा बल्कि स्वम भगवान शिव का रूद्र अवतार जन्म लेगा जो हजारों लाखो विधाओं को जानने वाला और सबसे बलशाली सबसे तेज और सबसे बुद्धिमान बालक होगा। 

हनुमान जी के पिता केसरीनंदन 
जो भगवान राम के परम् भक्त होगा। ऐसा सुन अंजना माता बहुत खुश हुई और अपने पति केसरी जी के पास जाकर ये सारी बात बताई। केसरी जी के पुत्र होने के कारण हनुमान जी को केसरीनंदन भी कहा जाता है। 

हनुमान जी के जन्म का उद्देश्य 
हनुमान जी का जन्म असुरों के नाश के लिए और धर्म का साथ देने के लिए हुआ। माता सीता के वरदान से हनुमान जी आज भी अजर - अमर है। आपकी जानकारी के लिए बता दे की त्रेता युग में जन्मे हनुमान कृष्ण के समय दवापर युग में भी थे। और भगवान राम के बाद महाभारत में श्री कृष्ण का साथ भी दिया था। 

आज भी जिंदा है हनुमान जी 
आज भी कुछ जगह ऐसी है जहाँ समय - समय पर इनके होने का संकेत मिलता रहा है। भारत में एक जगह ऐसी भी है जहाँ हर 41 साल बाद हनुमान जी कुछ आदिवासीय लोगों से मिलने भी आते है। सचाई चाहे जो भी हो यह आस्था की शक्ति ही भारत के सभी लोगो को एक साथ जोड़े रखती है।  

जानकारी को ज्यादा से ज्यादा शेयर जरूर करें। पोस्ट पढ़ने के लिए धन्यवाद दोस्तों !!

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