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Kahani Pandemic Gautam Buddha Story in Hindi - कहानी : भगवान बुद्ध के समय भी फैली थी महामारी | Baccho Ki Hindi Kahaniya | Bhagwan Ki Kahani | Moral Stories in Hindi



Kahani Pandemic Gautam Buddha Story in Hindi - कहानी : भगवान बुद्ध के समय भी फैली थी महामारी | Baccho Ki Hindi Kahaniya | Bhagwan Ki Kahani | Moral Stories in Hindi - दोस्तों आज कोरोना महामारी से पूरी दुनियाँ परेशान है। किसी के पास इस महामारी का कोई समाधान नहीं है। न ही अभी तक इस की हमारे पास कोई दवाई है। सभी लोग आज घरों में बैठे है ताकि इस महामारी की चपेट में आने से बच सके।

एक छोटी सी भी महामारी करोड़ो की संख्या में अपने साथ लोगों की जान ले जाती है। इतिहास गवा है जब - जब महामारी आई है तब - तब इंसान ने उसके आगे घुटने टेक दिए है। लेकिन इतिहास में कुछ ऐसे लोग भी हुए है जिन्होंने इन बड़ी - बड़ी महामारी के सामने अपनी शक्ति और ऊर्जा का परिचय भी दिया है। ऐसी ही एक कहानी आज हम आपके लिए लेकर आए है जो बिल्कुल सत्य घटना पर आधारित है।

Pandemic Gautam Buddha Story in hindi 

एक समय वैशाली राज्य में बहुत ही विकराल महामारी फैली थी। मरने वालों की गिनती करने वाला भी नहीं था। वहाँ मृत्यु अपना नाच दिखा रही थी। चारों तरफ बस बीमार और मृत लोग पड़े थे। पुरे राज्य में हाहाकार मचा था। लोग डरे हुए घबराएं हुए थे। सब भगवान को याद कर रहे थे। किसी को नहीं पता की अब अगली बारी किसकी हो। ऐसे में सब लोग घर में बैठ गए थे।

कोई भी उस नगर में नहीं आना चाहता था। दूर - दूर तक लोगो को उस नगर की आप - बीती के बारे में पता था। नगर के राजा बहुत ज्यादा चिंतित थे की कैसे बचा जाए इस महामारी से और कैसे अपनी प्रजा को बचाया जाए।
नगर के सभी लोग बुद्ध के बारे में जानते थे। उन सभी ने महाराज से आग्रह किया की कृपया आप बुद्ध को यहाँ बुलाओ ताकि भगवान हमारी जान बचा सके।

ऐसे में राजा ने नगर के सभी लोगो को आश्वासन दिया और तुरंत बुद्ध तक यह संदेश पहुंचाया। नगर के लोगों को इस बात का पूरा विश्वास था की बुद्ध के आने और उनके दर्शन से यह महामारी जरूर समाप्त हो जाएगी।


भगवान ने भी तुरंत निमत्रण स्वीकार कर लिया। उस नगर में भगवान बुद्ध का राजाओं जैसा स्वागत हुआ। वहाँ वैशाली संघ ने भगवान बुद्ध के लिए कूटागारशाला का निर्माण किया। भगवान बुद्ध ने वहाँ के लोगो को कई उपदेश दिए बताया जाता है की इस समय भगवान ने नगर के लोगों को रत्न सूत का उपदेश भी दिया था। जिससे लोगो के रोग दूर हो गए।

भगवान के कारण वहाँ से महामारी धीरे - धीरे खत्म होने लगी। और मृत्यु का नाच रुक गया। फिर बहुत अच्छी बारिश हुई थी। वहाँ सभी पेड़ - पौधे हरे - भरे हो गए थे। फूल खिलने लगे और चारो तरफ खुशियों का माहौल फिर से बन गया।

ऐसा चमत्कार देख किसी ने भगवान से पूछा की आखिर ये चमत्कार कैसे हुआ। इसमें बुद्ध बोले में पूर्व जन्म में एक शंक नामक ब्राम्हण था मने बुद्ध पुरुष के चेत्यो की पूजा की थी। और आज यह जो कुछ भी चमत्कार हुआ है उसी पूजा का फल है। जो उस समय पूजा की वह बहुत ही अल्प थी लेकिन उसका फल आज इतना विशाल मिला है। बीज तो होते ही बहुत छोटे है लेकिन उनसे निकले पेड़ आसमान को छूने की शक्ति रखते है।

फिर भगवान बुद्ध ने कहा की हमें ऊंच - नीच का भेद त्याग कर अपना पूरा जीवन मनुष्य धर्म की सेवा में लगाना चाहिए। दूसरो को कभी दुःख में देख कर ख़ुशी नहीं बनानी चाहिए। हमे इस वैर के चक्र से बाहर निकलना चाहिए और अपने भीतर देखना चाहिए।

शिक्षा - बच्चों इस घटना से हमे यह शिक्षा मिलती है की मुश्किल समय में हमें अपने सारे फालतू काम छोड़ कर सिर्फ और सिर्फ भगवान की शरण में जाना चाहिए। अपने मन को शांत कर के ध्यान में बैठना चाहिए।    

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