मंदिर - मस्जिद से भी बड़ी लाइन मधुशाला की, सरकार भी परेशान !! - Wine Shop News



मंदिर - मस्जिद से भी बड़ी लाइन मधुशाला की, सरकार भी परेशान !! - Khulne Lgi Sharab ki dukane - देश भर में दिल्ली सहित बहुत से राज्यों में 4 मई से शराब की बिक्री शरू हो गई है। ऐसे में अचानक से दुकानों पर हजारों लोगो की जमा भीड़ सरकार के लिए अब एक नई मुसीबत बनती जा रही है। भला अब सरकार करे भी तो क्या बात अगर पियकड़ों की करे तो इन्होने तो नाक में दम कर दिया है। 

कल की मीडिया में पुरे दिन इन शराबियों को ही दिखाया गया। मानों बहुत साल से शराब की एक झलक का इंतजार कर रहे हो। मधुशाला के खुलने से पहले ही आशिक वहाँ तैयार थे। ऐसे में दुकानदार भी थोड़ा डर गया की क्या बात है भाई कोई गलत माल तो नहीं बेच दिया इतनी भीड़ कैसे ?
मंदिर - मस्जिद से भी बड़ी लाइन मधुशाला की, सरकार भी परेशान
दरसल दोस्तों आपको बता दे की लॉकडाउन के चलते पिछले 1 महीने से पुरे देश भर में कर्फ्यू लगा हुआ था। ऐसे में सबसे ज्यादा नुकसान मिडल क्लास फेमली वालो को हुआ है। क्योकि गरीबो की तरह न तो वह कुछ मांग सकते और न ही अमीरों की तरह उनके पास कुछ विशेष पूंजी बैंक खातों में जमा है। फिर भी बात करे तो कुछ नुकसान दुकानदारों को भी हुआ है। जिनमे मधुशाला की दुकाने भी शामिल है। और साथ ही साथ पियकड़ों के नुकसान का तो कहना ही क्या, बेचारे अंगुलियों पर गिन -गिन कर दिन निकाल रहे थे। 

अब कुछ राज्यों की सरकारों ने उनके बारे में सोचा की उन्हें उनकी जिंदगी लोटा देनी चहिए इसलिए सोशल डिस्टेसिन का हवाला देते हुए सरकार ने पियकड़ों को कुछ छूट दे दी। लेकिन अचानक 40 दिन के बाद शराब के ठेके खुले देख सभी ग्राहक कोरोना को तो ऐसे भुला जैसे "शादी शुदा बहु अपने मायके को भूलती है " फिर क्या पुलिस ने उनका स्वागत किया। 

परेशान पुलिस को आखिर लाठीचार्ज का निर्णय लेना पड़ा। आपको बता दे की कल शराब की दुकानों के आगे करीब 1 किलोमीटर तक लाइने लग गई जो कभी आपने मंदिर - मस्जिद के आगे भी नहीं देखी होगी। जवान तो जवान बूढ़े एवं महिलाएं भी शराब खरीदने में पीछे नहीं थी। 

हमारा तो एक ही सभी से निवेदन है की" नशा शराब में होता तो बोतले भी झूमती" शराब के चक्र में घर कोरोना मत ले आना वरना लेने के देने पड़ जाएंगे। थोड़ा सरकारी नियमो का भी पालन करो भाई ऐसे काहे बच्चों की तरह जिद पर अड़े हो। अंत में मोदीजी वाला डायलॉग से में अपनी कथा को विराम दूँगा। "जान है तो जहान है"। 

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