Madhushala Search Anything....



कैलाश पर्वत के रहस्य | Kailash Parvat Ka itihas | Mount Kailash | Kailash Mansarovar Yatra 2020 | Kailash Parvat Yatra

कैलाश पर्वत के रहस्य | Kailash Parvat Ka itihas | Mount Kailash | Kailash Mansarovar Yatra 2020 | Kailash Parvat Yatra - नमस्कार दोस्तों आप सभी का स्वागत है मधुशाला में फ्रेंड्स आज की यह पोस्ट बहुत ही खास है क्योकि आज हम जानने वाले है कैलाश पर्वत के बारे में जो धरती के ठीक केंद्र में स्थित है।

जी हाँ दोस्तों - धरती के एक ओर उत्तरी ध्रुव है, तो दूसरी ओर दक्षिणी ध्रुव। दोनों के बीचोबीच स्थित है हिमालय। हिमालय का केंद्र है कैलाश पर्वत। वैज्ञानिकों के अनुसार यह धरती का केंद्र है। कैलाश पर्वत दुनिया के 4 मुख्य धर्मों- हिन्दू, जैन, बौद्ध और सिख धर्म का केंद्र है।
कैलाश पर्वत के रहस्य | Kailash Parvat Ka itihas 
कैलाश पर्वत की ऊंचाई 6,638 मीटर है। कैलाश पर्वतमाला कश्मीर से लेकर भूटान तक फैली हुई है और ल्हा चू और झोंग चू के बीच कैलाश पर्वत है जिसके उत्तरी शिखर का नाम कैलाश है। इस शिखर की आकृति विराट् शिवलिंग की तरह है। यह सदैव बर्फ से ढका रहता है। इसकी परिक्रमा का बहुत महत्व है ।

कठिन यात्रा है कैलाश पर्वत की 
लोग हर साल हजारों की तादाद में अपने प्रिय शिव और पार्वती के दर्शन करने कैलाश आते हैं। लेकिन कैलाश मानसरोवर जाने का मन बनाने में और वहां तक पहुंचने में बहुत फर्क है। क्योंकि ये यात्रा बहुत मुश्किल कही जाती है। हिमालय की चोटियों के बीच से गुजरता ये रास्ता बेहद ही खतरनाक होता है। साथ ही मौसम बिगड़ने का खतरा अक्सर बना रहता है। कैलाश पर्वत तक जाने के लिए दो रास्ते हैं।

एक रास्ता भारत में उत्तराखंड से होकर गुज़रता है लेकिन ये रास्ता बहुत मुश्किल है क्योंकि यहां ज़्यादातर पैदल चलकर ही यात्रा पूरी हो पाती है।

दूसरा रास्ता जो थोड़ा आसान है वो है नेपाल की राजधानी काठमांडू से होकर कैलाश जाने का रास्ता। भगवान शिव और माता पार्वती ने अपने भक्तों के लिए जून से सितंबर तक के लिए अपना रास्ता खोल दिया है।

पूरी दुनिया की नाभि है कैलाश 
यह एक ऐसा भी केंद्र है जिसे एक्सिस मुंडी (Axis Mundi) कहा जाता है। एक्सिस मुंडी अर्थात दुनिया की नाभि या आकाशीय ध्रुव और भौगोलिक ध्रुव का केंद्र। यह आकाश और पृथ्वी के बीच संबंध का एक बिंदु है, जहां दसों दिशाएं मिल जाती हैं। रशिया के वैज्ञानिकों के अनुसार एक्सिस मुंडी वह स्थान है, जहां अलौकिक शक्ति का प्रवाह होता है और आप उन शक्तियों के साथ संपर्क कर सकते हैं। ये दिव्य ऊर्जा का केंद्र है।

दोस्तों नासा के वैज्ञानिक भी यह दावा किया है की यहाँ से बहुत ही तेज एनर्जी निकलती है जो चारो दिशाओ में फैलती है।

कैलाश पर्वत एक विशालकाय पिरामिड है, जो 100 छोटे पिरामिडों का केंद्र है। कैलाश पर्वत की संरचना कम्पास के 4 दिक् बिंदुओं के समान है और एकांत स्थान पर स्थित है, जहां कोई भी बड़ा पर्वत नहीं है।

 आपकी जानकारी के लिए बता दे की ध्यान में पिरामडों का बहुत महत्व है पिरामिड में ध्यान करने से बहुत जल्द ही हम ध्यान से समाधि में पहुंच जाते है। कुछ ऐसा ही रहस्य है कैलाश पर्वत का। 

मिलरेपा गए थे कैलाश पर्वत पर 
कैलाश पर्वत पर चढ़ना निषिद्ध है, परंतु 11वीं सदी में एक तिब्बती बौद्ध योगी मिलारेपा ने इस पर चढ़ाई की थी। रशिया के वैज्ञानिकों की यह रिपोर्ट 'यूएनस्पेशियल' मैग्जीन के 2004 के जनवरी अंक में प्रकाशित हुई थी। हालांकि मिलारेपा ने इस बारे में कभी कुछ नहीं कहा इसलिए यह भी एक रहस्य है।

चमत्कारी दो झीले का रहस्य 
यहां 2 सरोवर मुख्य हैं- पहला, मानसरोवर जो दुनिया की शुद्ध पानी की उच्चतम झीलों में से एक है और जिसका आकार सूर्य के समान है। दूसरा, राक्षस नामक झील, जो दुनिया की खारे पानी की उच्चतम झीलों में से एक है और जिसका आकार चन्द्र के समान है। ये दोनों झीलें सौर और चन्द्र बल को प्रदर्शित करती हैं जिसका संबंध सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा से है। जब दक्षिण से इन झीलों को देखते हैं तो एक स्वस्तिक चिह्न वास्तव में देखा जा सकता है। यह अभी तक रहस्य है कि ये झीलें प्राकृतिक तौर पर निर्मित हुईं या ऐसा इन्हें बनाया गया?

पवित्र नदियों का स्थान 
इस पर्वत की कैलाश पर्वत की 4 दिशाओं से 4 नदियों का उद्गम हुआ है- ब्रह्मपुत्र, सिन्धु, सतलज व करनाली। इन नदियों से ही गंगा, सरस्वती सहित चीन की अन्य नदियां भी निकली हैं। कैलाश की चारों दिशाओं में विभिन्न जानवरों के मुख हैं जिसमें से नदियों का उद्गम होता है। पूर्व में अश्वमुख है, पश्चिम में हाथी का मुख है, उत्तर में सिंह का मुख है, दक्षिण में मोर का मुख है। आपको बता दे की गंगा गौ मुख से निकलने वाली नदी है।

हिमालय में दिखा हिम मानव 
हिमालयवासियों का कहना है कि हिमालय पर यति मानव रहता है। कोई इसे भूरा भालू कहता है, कोई जंगली मानव तो कोई हिम मानव। यह धारणा प्रचलित है कि यह लोगों को मारकर खा जाता है। कुछ वैज्ञानिक इसे निंडरथल मानव मानते हैं। विश्वभर में करीब 30 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि हिमालय के बर्फीले इलाकों में हिम मानव मौजूद हैं।

'ॐ' की आवाज सुनाई देती है यहाँ 
यदि आप कैलाश पर्वत या मानसरोवर झील के क्षेत्र में जाएंगे, तो आपको निरंतर एक आवाज सुनाई देगी, जैसे कि कहीं आसपास में एरोप्लेन उड़ रहा हो। लेकिन ध्यान से सुनने पर यह आवाज 'डमरू' या 'ॐ' की ध्वनि जैसी होती है। वैज्ञानिक कहते हैं कि हो सकता है कि यह आवाज बर्फ के पिघलने की हो। यह भी हो सकता है कि प्रकाश और ध्वनि के बीच इस तरह का समागम होता है कि यहां से 'ॐ' की आवाजें सुनाई देती हैं।

अचानक तेज रौशनी भी दिखाई देती है 
दावा किया जाता है कि कई बार कैलाश पर्वत पर 7 तरह की लाइटें आसमान में चमकती हुई देखी गई हैं। नासा के वैज्ञानिकों का ऐसा मानना है कि हो सकता है कि ऐसा यहां के चुम्बकीय बल के कारण होता हो। यहां का चुम्बकीय बल आसमान से मिलकर कई बार इस तरह की चीजों का निर्माण कर सकता है।

पुराणों में लिखी है महिमा 
यह भगवान शंकर का निवास स्थान भी है।  यह अद्भुत स्थान रहस्यों से भरा है। शिवपुराण, स्कंद पुराण, मत्स्य पुराण आदि में कैलाश खंड नाम से अलग ही अध्याय है, जहां की महिमा का गुणगान किया गया है।