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13.महाजनपद काल का इतिहास ( मेरी यात्रा ) इस सफर का मजा लो !! | Mahajanapada Kal Ka Itihas in Hindi

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दोस्तों आज हम महाजनपद काल के इतिहास के बारे में जानेंगे। पीछे हमने बौद्ध धर्म और जैन धर्म के बारे में जाना और समझा था। अब हम भारत के 16 महाजनपदो के बारे में जानेंगे। 
महाजनपद काल का इतिहास 

आज हम आपको एक ऐसे सफर पर लेकर जा रहे है जो आज से हजारों लाखों साल पहले के भारत के बारे में सम्पूर्ण जानकारी देता हो। उम्मीद करते है की यह प्राचीन भारत का सफर आपको पसंद आए। 

इतिहास को कैसे समझे ?
दोस्तों इतिहास को रटो नहीं बल्कि इस में खो जाओ और अपने आप को उस युग में पहुंचा दो, जहाँ आस - पास आपके बहुत बड़े - बड़े किले एवं महल हो। मॉल और मार्केट नहीं बल्कि एक सामूहिक बजार हो। वह भी हफ्ते भर में किसी एक दिन लगता हो और पूरा गांव जैसे वहाँ एकत्रित होता हो। ऐसे पढ़ो मानो हम उस काल में है और सब देख रहे है। तभी आप अपने एग्जाम की तैयारी बेहतर ढंग से कर पाओगे। 

इस समय भारत था सोने की चिड़िया 
फ्रेंड्स आपको यह भी पता होना चाहिए की महाजनपद काल से पहले बहुत से काव्य और साहित्य लिखें जा चुके थे। इससे पहले रामायण और महाभारत काल भी आया और रामायण और महाभारत काव्य भी लिखे जा चुके थे। तभी तो इस युग को ( Golden age ) स्वर्णिम युग के नाम से भी जाना जाता है। 

भारत का 
स्वर्णिम युग
वैदिक काल से महाजनपद काल तक का समय भारत का स्वर्णिम युग था। इस समय बहुत से कवि भारत की इस धरती पर हुए। बहुत से साहित्यकार भी हुए जिन्होंने लाखों साहित्यों की रचना की, कौटिल्य ने अर्थशास्त्र की रचना भी इसी युग में की थी। 

इस समय भारत में कई बड़े महापुरुष और साहित्यकार हुए 
इसी समय में पाणिनि ने अष्टाध्यायी की रचना भी की थी। संस्कृत भाषा को आगे बढ़ाने और इसे व्याकरण स्वरूप देने में पाणिनि का बहुत बड़ा योगदान है। 

इस समय भारत की भूमि पर आर्यभट, चरक, भास्कर, चाणक्य, जैसे महापुरुष हुए साथ ही साथ एक से बढ़कर एक राजा भी हुए। इसी कारण इस समय के इतिहास को जानना बहुत ही जरुरी है। तो आईये दोस्तों जानते है महाजनपद काल का इतिहास। 

भारत में दर्शन शास्त्र का उदय 
हमें बहुत से प्राचीन ग्रंथो से इन 16 महाजनपदों के बारे में जानकारी मिलती है। साथ ही साथ बौद्ध और जैन धर्म में भी इस समय के बारे में विस्तार से लिखा गया है। इस समय बहुत सी दार्शनिक विचारधारा भी जन्म ले चुकी थी। 

हमारा महाजनपद काल गणतंत्रात्मक एवं सवैधानिक व्यवस्था का आदर्श है। 

उत्तरवैदिक काल में हमे विभिन्न जनपदों का अस्तित्व दिखाई देता है। इस काल में पूर्वी उत्तरप्रदेश तथा पश्चिमी बिहार में लौहे का व्यापक रूप से उपयोग भी होने लगा था। 

लोहें का बहुताय में प्रयोग 
लौहे की तकनीक ने तो लोगों के भौतिक जीवन में बहुत बड़ा परिवर्तन कर दिया। कृषि, उद्योग, व्यापार, वाणिज्य आदि के विकास ने प्राचीन जनजातीय व्यवस्था को सुलभ बना दिया और छोटे - छोटे जनों का स्थान जनपदों ने ग्रहण कर लिया। 

ईसा पूर्व छठी शताब्दी तक आते - आते जनपद, महाजनपदों के रूप में विकसित हो गए थे। 

छठी शताब्दी ईसा पूर्व के प्रारम्भ में उत्तर भारत में सार्वभौम सत्ता का आभाव था। सम्पूर्ण भारत अनेक स्वतंत्र राज्यों में विभक्त था। ये राज्य उत्तरवैदिककालीन राज्यों से अधिक स्वतंत्र तथा शक्तिशाली भी थे। 

महाजनपद काल (600 - 325 ईसा पूर्व)

छठी शताब्दी ईसा पूर्व में उत्तर भारत में अनेक बड़े - बड़े एवं शक्तिशाली स्वतंत्र राज्यों की स्थापना हुई थी। जिन्हें महाजनपदों की संज्ञा दी गई थी। बौद्ध ग्रंथ "अगुतरनिकाय " के अनुसार उस समय 16 महाजनपद थे। 

महाजनपद                    राजधानी

काशी                             वाराणसी

कोशल                           श्रावस्ती

अंग                                चम्पा

चेदि                               शक्तिमती

वत्स                               कौशाम्बी

कुरु                                इंद्रप्रस्थ

पांचाल                            अहिच्छत्र, काम्पिल्य

मत्स्य                            विराटनगर

सूरसेन                            मथुरा

अश्मक                            पैठान/प्रतिष्ठान/पोतन/पोटिल

अवन्ति                           उज्जैन, महिष्मति

गांधार                             तक्षशिला

कम्बोज                           हाटक/राजपुर

वज्जि                              वैशाली

मल्ल                                कुशीनगर, पावा

मगध                                गिरिव्रज - राजगृह


इन 16 महाजनपदों में 2 प्रकार के राज्य थे। राजतंत्र और गणतंत्र 

कोशल, वत्स, अवन्ति, और मगध उस समय सर्वाधिक शक्तिशाली राजतंत्र थे।  इस समय अनेक गणतंत्रो का भी अस्तित्व था।  जिसमें प्रमुख थे - कपिलवस्तु के शाक्य, सुसुमारगिरि के भाग, अल्लकप के बुली, केसपुत के कालाम, रामग्राम के कोलिय, कुशीनारा के मल्ल, पावा के मल्ल, पिप्लिवन के मोरिय, वैशाली के लिंच्छवि  मिथिला के विदेह। 

दोस्तों ये थे महाजनपद अब हम आगे इन महाजनपद काल में जो राजा थे जो वंश इस समय चले थे। उन सभी के बारे में टॉपिक वाइज कवर करेंगे। सबसे पहले मगध सम्राज्य के बारे में समझेंगे जिसमें धनानंद, चन्द्रगुप्त मौर्य और चाणक्य इन सभी के बारे में जानेंगे फिर आगे हर्यक वंश, शिशुनाग वंश, नन्द वंश (जिसमें धनानंद) और फिर सिकंदर का आक्रमण इन सभी के बारे में समझेंगे। तो दोस्तों हमारे साथ ऐसे ही बने रहे।