Maharashtra में लोनार झील का पानी अचानक लाल हो गया, उल्कापिंड के टकराने से बनी है यह झील | Lonar Salt Water Lake



Maharashtra में लोनार झील का पानी अचानक लाल हो गया, उल्कापिंड के टकराने से बनी है यह झील | Lonar Salt Water Lake - शोध में जुटे वैज्ञानिक, 10 लाख टन के उल्कापिंड के टकराने से बनी है यह झील

क्या आपने कभी कोई लाल झील देखी है। लोनार झील अब लाल हो गई है। कई वैज्ञानिको की नजर अब भारत की इस झील पर है जिसने अचानक ही अपना रंग बदल लिया है। आखिर क्या संकेत देना चाहती है ये झील ?

दोस्तों कुछ दिन पहले ये ऐसी दिखती थी। और अब यह एकदम खून जैसे लाल रंग की हो गई है। ऐसे में भारत समेत दुनिया के कई वैज्ञानिक हैरान है। 
Lonar Salt Water Lake

बताया जाता है की ये झील अपना रंग बदलती रहती है कुछ साल पहले ये नील रंग में हुई थी। यहाँ के स्थानीय लोग इसके रंग बदलने का अर्थ प्राकृतिक प्रकोप से लगाते है। ऐसे में अब यह लाल रंग कोई बहुत बड़े खतरे का संकेत तो नहीं है। 

ये झील महाराष्ट्र के बुलढाना ज़िले से क़रीब 90 किलोमीटर दूर स्थित है।  ये दुनिया की तीसरी और महाराष्ट्र की पहली खारे पानी की झील है। 

इससे पहले वर्ष 2006 के आसपास लोनर झील में अजीब-सी हलचल हुई थी, झील का पानी अचानक भाप बनकर खत्म हो गया। गांव वालों ने पानी की जगह झील में नमक और अन्य खनिजों (मिनरल्स) के छोटे-बड़े चमकते हुए क्रिस्टल देखे थे। 

ऐसा कहा जाता है कि 50 हज़ार साल पहले उल्का पिंड गिरने से ये झील बनी थी।  प्रशासन का कहना है कि झील का रंग क्यों बदला, वो ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ये झील के पानी में सीवर का पानी मिलने से हुआ होगा। हालांकि प्रशासन इस बात से इनकार कर रहा है। 

झील की गहराई लगभग पांच सौ मीटर है। लोनार तहसील के तहसीलदार सैफन नदाफ ने बताया,"पिछले 2-3 दिन से हम नोटिस कर रहे हैं कि इस झील के पानी में बदलाव आ रहा है। हमने वन विभाग को इसका सैंपल लेकर जांच करने के लिए कहा है।" लोनार लेक खारे पानी की झील है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह झील उल्का पिंड की टक्कर से बनी है। इसका खारा पानी इस बात को दर्शाता है कि कभी यहां समुद्र था। शोध में यह भी दावा किया जाता है कि यह करीब दस लाख टन वजनी उल्का पिंड टकराने से ये झील बनी होगी।

इसपर शोध कर रहे वैज्ञानिक आनंद मिश्रा के अनुसार, लॉकडाउन की वजह से जलवायु में परिवर्तन आया है। बारिश नहीं होने के कारण इसका पानी सूखकर कम हुआ है। हो सकता है कि इनमें से किसी कारण इसके रंग में बदलाव हो रहा है। लोनार पर काम करने वाले प्रोफेसर डॉ सुरेश मापरी ने इसको लेकर कुछ जल विशेषज्ञों के साथ चर्चा की है। उनके अनुसार, खारे पानी में हालोबैक्टीरिया और डुओनिला फंगस की बड़ी वृद्धि के कारण कैरोटीनॉइड नामक पिगमेंट का विस्तार होता है, जिसके कारण पानी लाल हो सकता है। ये सभी अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि आखिर अभी क्यों इसका रंग लाल हो रहा है।

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