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18.मौर्य राजवंश का इतिहास | Maurya Vansh Ka Itihas | Maurya Dynasty UPSC in Hindi



Chandragupta Maurya मौर्य राजवंश का इतिहास | Maurya Vansh Ka Itihas | Maurya Dynasty UPSC in Hindi - मौर्य राजवंश नंद वंश के बाद में आने वाला वंश है . सबसे पहले हम इसके स्त्रोत देखते है की आखिर हमे इस राजवंश के बारे में जानकारियां कहा - कहा से मिलती है . ( Maurya Vansh Hindi )
मौर्य राजवंश का इतिहास | Maurya Vansh Ka Itihas

मौर्य राजवंश के स्त्रोत - पुरालेखीय स्त्रोत, साहित्यिक स्त्रोत, विदेशी स्त्रोत, पुरातात्विक स्त्रोत, एवम अन्य खुदाई से प्राप्त स्त्रोत के द्वारा हमे इस राजवंश का पता चलता है .

कुछ बोद्ध लेखों में भी मौर्य वंश के राजाओ के बारे में लिखा मिलता है एवम कुछ जातक कथाओ में भी इस वंश का जिक्र किया गया है . 

श्री लंका के लेख महावंश और दीपवंश भी मौर्य राजवंश से जुड़े है . हिन्दू धर्म ग्रंथो एवम पुराणों में भी इसकी जानकारी मिलती है .

कुछ जेन ग्रंथो में भी मौर्य राजवंश के बारे में लिखा हुआ मिलता है .

कोटिल्य द्वारा लिखी गई अर्थशास्त्र में भी उस समय की शासन और प्रशासन व्यवस्था की जानकारी मिलती है .

मेगस्थनीज द्वारा लिखी इण्डिका में भी जानकारी मिलती है . यह अब लगभग नष्ट ही हो चुकी है कुछ यूनानी लेखको ने इसे अभी तक जीवित रखा है .

मुद्राराक्षस नामक पुस्तक जो की विशाखदत ने लिखी थी इस किताब में चन्द्रगुप्त दवारा नंद वंश को खत्म कर मौर्य की शुरुआत करने की चर्चा की गई है . यह उतरवैदिक काल का एक संकलन है .

कल्हण की राजतरंगिणी में भी इसके बारे में कुछ जानकारीया लिखी मिलती है . 

अगर आपने मौर्य राजवंश से पहले का इतिहास नही जाना है तो यहा क्लिक करे - अलेक्जेंडर सिकंदर का जीवन परिचय व इतिहास

- मौर्य वंश का प्रथम राजा -

Chandragupta Maurya History in Hindi

नाम - चंद्रगुप्त 

पूरा नाम - चक्रवर्ती सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य

जन्म - 340 ईसा पूर्व पाटलिपुत्र (अब बिहार में)

निधन - 297 ईसा पूर्व (उम्र 47–48) श्रवणबेलगोला, कर्नाटक

समाधि - श्रवणबेलगोला कर्नाटक मैसूर चन्द्रगिरि पर्वत

जीवनसंगी - दुर्धरा और हेलेना (सेलुकस निकटर की पुत्री)

संतान - बिन्दुसार

पिता - सर्वार्थसिद्धि मौर्य

माता - मुरा

धर्म - हिन्दू जैन

अखंड भारत का निर्माण 
यह मौर्य वंश का संस्थापक था . चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने गुरु मंत्री कोटिल्य की सहायता से नंद वंश का अंत कर एक नए वंश मौर्य वंश की शुरुआत की थी . यह भारत के महानतम सम्राटो में से एक है . चंद्रगुप्त मौर्य चाणक्य के सपने को सच करने में सफल हुए . सर्वप्रथम इन्होने अखंड भारत एक भारत की स्थापना की थी . 

यूनानी राजदूत चन्द्रगुप्त के दरबार में 
चंद्रगुप्त मौर्य ने 24 वर्षो तक शासन किया था . ग्रीक में चंद्रगुप्त मौर्य को सैंड्रोकोट्स और एंडोकॉटस कहा जाता है .मेगस्थनीज यूनानी राजदूत के रूप में चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में 4 वर्ष तक सेवा कार्यो में रहा था .

चक्रवर्ती सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य वीरता 
यह प्राचीन भारतीय इतिहास के एक महत्वपूर्ण शासक है . चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने जीवन काल में कई युद्ध लड़े थे . राज्य के लिए शुरुआत में यह धनानंद के साथ लड़े एवम इनका अंतिम युद्ध ग्रीक सम्राट् सेल्यूकस के साथ हुआ था . सेल्यूकस सिकंदर का सेनानायक था जो सिकंदर के सपनों को पूरा करने विश्व विजय के लिए निकला था और उसने शुरुआत भारत से की थी लेकिन उसे क्या पता था अब मगध में धननंद नही बल्कि चक्रवर्ती सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य बेठा है . जब तक चन्द्रगुप्त ने भारत के पुरे राजनितिक भूगोल को ही बदल दिया था .

सेल्यूकस की पुत्रियों से विवाह 
लगभग सारा क्षेत्र एक शक्तिशाली शासक के नेतृत्व में था। सेल्यूकस 305 ई.पू. के लगभग भारत में सिंधु के किनारे पहुचा था . चन्द्र्गुत और सेल्यूकस के मध्य भयंकर युद्ध हुआ था जिसमे सेल्यूकस पराजित हुआ था . साथ ही साथ वह चंद्रगुप्त मौर्य की वीरता को देख कर हेरान भी था . उसने चंद्रगुप्त मौर्य से अपनी दोनों पुत्री दुर्धरा और हेलेना का विवाह कर दिया था . साथ ही साथ चन्द्रगुप्त ने भी 500 हाथी सेल्यूकस  को भेट किए थे .

अंत समय में जेन धर्म को अपना लिया और जेन मुनि बने 
श्रवणबेलगोला से मिले शिलालेखों के अनुसार, चंद्रगुप्त अपने अंतिम दिनों में पितृ मतानुसार जैन-मुनि हो गए। चन्द्रगुप्त अंतिम मुकुट धारी मुनि हुए थे . उनके बाद और कोई मुकुट धारी दिगंबर मुनि नहीं हुए | अतः चन्द्र-गुप्त का जैन धर्म में महत्वपूर्ण स्थान है। स्वामी भद्रबाहु के साथ श्रवणबेलगोल चले गए। वहीं उन्होंने उपवास द्वारा शरीर त्याग किया। श्रवणबेलगोल में जिस पहाड़ी पर वे रहते थे, उसका नाम चंद्रगिरि है और वहीं उनका बनवाया हुआ 'चंद्रगुप्तबस्ति' नामक मंदिर भी है।

अगले भाग में हम मौर्य राजवंश के अन्य राजाओ के बारे में जानेगे . जिसमे बिन्दुसार एवम सम्राट अशोक की जीवनी को पढेगे . इतिहास को शुरू से पढने के लिए यहा क्लिक करे - भारत का प्राचीन इतिहास

 

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