नमामि गंगे योजना - Namami Gange Yojana | IAS/IPS Main Answer Writing Practice in Hindi



नमामि गंगे योजना की विशेषताएं और उद्देश्य - Namami Gange Yojana in hindi | IAS/IPS Main Answer Writing Practice in Hindi : भारत के प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रीमंडल की बैठक के द्वरा भारत में "नमामि गंगे योजना" का शुभारम्भ जून 2014 में हुआ था . नमामि गंगे का अर्थ है - ( गंगा को प्रणाम )
Namami Gange Yojana in Hindi

यह एक 18 वर्षीय योजना है जिसके तहत पांच राज्यों के 151 घाटों सहित गंगा नदी के जल में ऑक्सीजन की मात्रा में वृद्धि करने की बात कही गई है| यह एक 100% केंद्रीय योजना है.  

नमामि गंगे का उद्धेश्य गंगा नदी के जल को स्वच्छ करना है . इसके लिए गंगा नदी के घाटों के पास कई सफाई केंद्र भी खोले गए है . जिनका कार्य है गंगा के आस - पास की जगहों को साफ - सुथरा रखना और लोगो को साफ - सफाई रखने के लिए जागरूक करना है . इसी तरह ‘नमामि गंगे’ के तहत जलवाही स्तर की वृद्धि, कटाव कम करने और नदी के पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिति में सुधार करने के लिए 30,000 हेक्टेयर भूमि पर वन लगाये जाएंगे। वनीकरण कार्यक्रम 2016 में शुरू किया गया है । व्यापक स्तर पर पानी की गुणवत्ता की निगरानी के लिए 113 रियल टाइम जल गुणवत्ता निगरानी केंद्र स्थापित किये जाएंगे।

1. नमामि गंगे के लिए 2019 - 2020 में सरकार ने 20,000 करोड़ रुपय के बजट का आवंटन भी किया था .

2. भारत के प्रधानमन्त्री ने इस योजना को एक आर्थिक अभियान का भी दर्जा दिया है .

3. गंगा नदी के किनारे भारत की 40 प्रतिशत आबादी निवास करती है . इस योजना से सभी को आर्थिक साहयता भी मिलेगी .

4. इस योजना से जुड़े लोगो का उदेश्य गंगा नदी को प्रदुषण मुक्त बनाना है .

5. इस योजना के तहत गंगा नदी में रहने वाली मछली डोल्फिन को भी काफी फायदा होगा साथ ही साथ आगे भविष्य में अलग - अलग जलीय जीवों से गंगा का सौन्दर्यकरण और ज्यादा बढ़ जाएगा.

6.इस प्रोजेक्ट से आगे चलकर काफी गरीब लोगो को फायदा होने वाला है इसलिए हम सभी को सरकार के इस प्रोजेक्ट में साथ देना चाहिए और गंगा के किनारों की सफाई में सरकार की मदद करनी चाहिए .

इस कार्यक्रम के तहत इन गतिविधियों के अलावा जैव विविधता संरक्षण, वनीकरण (वन लगाना), और पानी की गुणवत्ता की निगरानी के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। महत्वपूर्ण प्रतिष्ठित प्रजातियों, जैसे – गोल्डन महासीर, डॉल्फिन, घड़ियाल, कछुए, ऊदबिलाव आदि के संरक्षण के लिए कार्यक्रम पहले से ही शुरू किये जा चुके हैं। 

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