16.नंद वंश का इतिहास | Nand Vansh Ka Itihas | Nanda Dynasty UPSC



नंद वंश का इतिहास | Nand Vansh Ka Itihas | Nanda Dynasty UPSC
Nand Vansh Ka Itihas | Nanda Dynasty UPSC | Magadh Samrajya | Ancient History of India By Vipin Sir

नंद वंश - 344 ई.पू. से 322 ई.पू.

संस्थापक - महापद्मनंद

नंद वंश मौर्य वंश से पहले का वंश है। 
महापद्मनंद ने शिशुनाग के अंतिम शासक की हत्या कर गद्दी पर अपना अधिकार जमा लिया। बहुत जगह यह उल्लेख भी मिलता है की महापद्मनंद एक दासी का पुत्र था।

नंद वंश का इतिहास | Nand Vansh Ka Itihas 

यह नंद वंश का सबसे शक्तिशाली राजा था। इसने सबसे पहले कलिंग को जीता और वहा पर एक बड़ी नहर का भी निर्माण करवाया। इसका उल्लेख प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व खारवेल के हाथी गुफा अभिलेख से मिलता है। 

पुराणों में महापद्मनंद को सर्वक्षत्रातक (क्षत्रियों का संहारक) बताया है एवं कई जगह इन्हे दूसरे पशुराम भी बताया है। 

एक बहुत बड़े सम्राज्य की स्थापना के कारण इन्हें एकराट की उपाधि भी मिली है। व्याकरणाचार्य पाणिनि इनके मित्र थे। व्याकरणाचार्य के अनुसार उनकी सेनाओ में 20 हजार अश्वारोही, 20 लाख पैदल सैनिक, 2 हजार चार घोड़े वाले रथ, था 3 हजार हाथी थे। अगर आपने अलेक्जेंडर सिकंदर से पहले का इतिहास नही जाना है तो यहा क्लिक करे - शिशु नाग वंश का इतिहास

महाबोधि वंश में पद्मानंद को महापद्मनंद को का नाम उग्रसेन मिलता है।

धनानंद - अंतिम एवं सर्वाधिक प्रसिद्ध नन्द शासक जो सिकन्दर महान का समकालीन था। यूनानी लेखकों ने इसे “अग्रभोज” कहा है। इसी के शासनकाल में सिकन्दर ने भारत पर आक्रमण किया था। नंद वंश के अंतिम शासक धननन्द से उसकी प्रजा अत्यधिक घृणा करती थी।

उसने विद्धान ब्राह्मण विष्णुगुप्त (चाणक्य) का अपमान किया था। सिकन्दर के जाने के बाद मगध साम्राज्य में अशांति व अव्यवस्था फैल गई थी। परिणामस्वरूप चंद्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य की सहायता से मगध पर अधिकार कर लिया व मौर्य साम्राज्य की स्थापना की।

नन्द वंश के 9 राजा हुए थे अतः इसे “नवनंद” कहा जाता है। इनका साम्राज्य विंध्याचल पर्वतमाला के दक्षिण तक फैला था। महापदम् नंद विंध्यपर्वत के दक्षिण में मगध साम्राज्य का विस्तार करने वाला प्रथम शासक था।

नंद शासक जैन मत पोषक थे।

भद्रसाल - महापदम् नन्द का सेनापति।
अग्रमीज - धन नंद का यूनानी नाम।
साइबेरिया - नन्द यहाँ से स्वर्ण मंगाते थे।
पाणिनी - महापदम् नन्द के मित्र थे। इन्होंने पाटली पुत्र में शिक्षा ग्रहण की।
वर्ष, उपवर्ष, वररुचि, कात्यायन - नंद काल के विद्वान।