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15.शिशु नाग वंश का इतिहास | Shishunaga Vansh Ka Itihas | Shishunaga Dynasty UPSC



15.Shishunaga Vansh Ka Itihas | Shishunaga Dynasty UPSC | Magadh Samrajya | Ancient History of India By Vipin Sir

नमस्कार दोस्तों आप सभी का स्वागत है Madhushala.info में। फ्रेंड्स हम मगध सम्राज्य के इतिहास के बारे में पढ़ रहे थे जिसमें हमने हर्यक वंश के बारे में जाना और समझा था। 

अगर आपने हर्यक वंश के बारे में नहीं पढ़ा तो यहाँ क्लिक करें - हर्यक वंश का इतिहास

दोस्तों मगध सम्राज्य को हम तीन भाग में समझेंगे। पहला है हर्यक वंश - जिसको आप यहाँ से पढ़े। हर्यक वंश का इतिहास फिर है शिशुनाग वंश जो आज पढ़ेंगे और फिर है तीसरा नन्द वंश। 


शिशु नाग वंश का इतिहास

तो आज शुरू करते है शिशुनाग वंश - जैसा की हर्यक वंश में हमने पढ़ा था की हर्यक वंश के अंतिम शासक नागदशक का अमात्य होता है शिशुपाल जो नागदशक की दुर्बलता का लाभ उठा कर राज कद्दी पर बैठ जाता है और एक नए वंश शिशुनाग वंश का शुभारंभ करता है। 

शिशुनाग वंश (412 ई.पू. से 345 ई.पू.)

शिशुपाल ने वैशाली (उत्तर बिहार) को पुनर्स्थापित किया था।

शिशुनाग ने सर्वप्रथम मगध के प्रबल प्रतिद्वन्दी राज्य अवन्ति पर वहां के शासक अवंतिवर्द्धन के विरुद्ध विजय प्राप्त की और उसे अपने साम्राज्य में सम्मिलित कर लिया। इस प्रकार मगध की सीमा पश्‍चिम मालवा तक फैल गई। इसके बाद शिशुपाल ने वत्स को मगध में मिलाया था। वत्स और अवन्ति के मगध में विलय से, पाटलिपुत्र के लिए पश्‍चिमी देशों से, व्यापारिक मार्ग के लिए रास्ता खुल गया।

शिशुनाग का शासनकाल अपने पूर्ववर्ती शासकों की तरह मगध साम्राज्य के तीव्र विस्तार के इतिहास में एक चरण का प्रतिनिधित्व करता है।

उसने अवंतिवर्द्धन के विरुद्ध विजय प्राप्त की और अपने साम्राज्य में अवंति (मध्य भारत) को सम्मिलित कर लिया।

शिशुनाग ने मगध से बंगाल की सीमा से मालवा तक विशाल भू-भाग पर अधिकार कर लिया।

शिशुनाग एक शक्‍तिशाली शासक था जिसने गिरिव्रज के अलावा वैशाली नगर को भी अपनी राजधानी बनाया। 

कालाशोक - यह शिशुनाग का पुत्र था जो शिशुनाग की मृत्यु के बाद मगध का शासक बना। महावंश में इसे कालाशोक तथा पुराणों में काकवर्ण कहा गया है। 

कालाशोक ने करीब 28 वर्षों तक शासन किया था । कालाशोक के काल को प्रमुखत: दो महत्त्वपूर्ण घटनाओं के लिए जाना जाता है- 

प्रथम घटना - वैशाली में दूसरी 'बौद्ध संगीति' का आयोजन (आधुनिक पटना) में 
दूसरी घटना - मगध की राजधानी का स्थानान्तरण।

बाणभट्ट रचित हर्षचरित के अनुसार काकवर्ण को राजधानी पाटलिपुत्र में घूमते समय महापद्मनंद नामक व्यक्‍ति ने चाकू मारकर हत्या कर दी थी। कालाशोक की मृत्यु हो गई। और शिशुनाग वंश के शासन का अन्त हो गया।


एक और ग्रंथ महाबोधिवंश के अनुसार कालाशोक के दस पुत्र थे। जिन्होंने मगध पर 22 वर्षों तक राज किया था । परन्तु उनका कोई विवरण ज्ञात नहीं है। ( 344  ई. पू. ) में शिशुनाग वंश का अन्त हो गया और नन्द वंश का उदय हुआ।

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