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विज्ञान के चमत्कार पर हिन्दी निबंध | Vigyan Ke Chamatkar Hindi Niband | Wonder Of Science Essay in Hindi



विज्ञान के चमत्कार पर हिन्दी निबंध | Vigyan Ke Chamatkar Hindi Niband | Wonder Of Science Essay In Hindi - ये बात सभी जानते है की आज का युग विज्ञान का युग है . हम विज्ञान और टेक्नॉलजी के युग में प्रवेश कर चुके है . इस सदी में मानव के पास सभी वस्तुए विज्ञानं द्वारा निर्मित है . विज्ञान ने हमारी जिन्दगी को बहुत सरल बना दिया है . हम हमारे दैनिक जीवन में विज्ञान की वस्तुओ का बहुताय से प्रयोग करते है .

जिस वस्तु की कुछ सदी पहले कल्पना भी नही की जा सकती थी आज की इस विज्ञान की सदी ने उसे साकार किया है . सबसे पहले हम यह जान लेते है की आखिर विज्ञान क्या है . ( Science and Technology )
विज्ञान के चमत्कार पर हिन्दी निबंध | Vigyan Ke Chamatkar Hindi Niband

विज्ञानं क्या है ? 

विज्ञान वह व्यवस्थित ज्ञान या विद्या है जो विचार, अवलोकन, अध्ययन और प्रयोग से मिलती है, जो किसी अध्ययन के विषय की प्रकृति या सिद्धान्तों को जानने के लिये किये जाते हैं। विज्ञान शब्द का प्रयोग ज्ञान की ऐसी शाखा के लिये भी करते हैं, जो तथ्य, सिद्धान्त और तरीकों को प्रयोग और परिकल्पना से स्थापित और व्यवस्थित करती है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि किसी भी विषय के क्रमबद्ध ज्ञान को विज्ञान कहते है। ऐसा कहा जाता है कि विज्ञान के 'ज्ञान-भण्डार' के बजाय वैज्ञानिक विधि विज्ञान की असली कसौटी है। या प्रकृति में उपस्थित वस्तुओं के क्रमबध्द अध्ययन से ज्ञान प्राप्त करने को ही विज्ञान कहते हैं। 

दैनिक जीवन में विज्ञानं का उपयोग 

हम अपने दैनिक जीवन में सभी विज्ञान की वस्तुओ का ही उपयोग करते है . सुबह - सुबह उठते ही हम अपने मोबाइल या न्यूज पेपर का उपयोग देश - विदेश में क्या घटित हुआ है इसके लिए करते है ये विज्ञान के द्वारा ही निर्मित है .

इसके बाद हम गिजर, टीवी, फ्रिज, ओवन, प्रेस इन सभी वस्तुओ का उपयोग करते है ये विज्ञान के द्वारा ही निर्मित है .

इसके बाद हम जिस बस से अपने स्कूल या ऑफिस जाते है वह साधन भी हमे विज्ञान ने दिया है .

विज्ञान के द्वारा हम अब एक स्थान से दुसरे स्थान पल भर में पहुच सकते है साथ ही साथ घर बेठे किसी से भी वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से सम्पर्क भी कर सकते है यह भी विज्ञानं की ही देन है .

विज्ञान के कारण ही बड़ी से बड़ी महामारी से भी इंसान लड़ाई लड़ सकता है . अभी हाल ही में फेली कोरोना महामारी में विज्ञान द्वारा निर्मित वेंटिलेटर और किट सबसे ज्यादा उपयोगी साबित हुए है . 

आईए अब हम जानते है की विज्ञान से हमे किन - किन क्षेत्रों में सहायता मिली है .

चिकित्सा के क्षेत्र में, यातायात, इलेक्ट्रिसिटी, संचार, मनोरंजन, शिक्षा, व्यापार व कृषि, अंतरिक्ष, सुरक्षा उपकरण आदि सभी क्षेत्रों में विज्ञान ने हमारी सहयता की है .

विज्ञान से होने वाली हानिया ( विज्ञान वरदान या अभिशाप )
जिस प्रकार किसी भी तकनीक से लाभ होता है उसी प्रकार अगर किसी वस्तु का गलत उपयोग किया जाए तो उससे हानि भी निश्चित है फिर वह मानव के लिए वरदान से अभिशाप बन जाती है . इसी प्रकार विज्ञान भी वरदान से अभिशाप बन सकता है आईए जाने कैसे - 

विज्ञान का प्रयोग दुसरे को नुकसान पहुचने के लिए नही किया जाना चाहिए कुछ लोग इसका प्रयोग बड़े - बड़े परमाणु हथियार बनाने में कर रहे है . कुछ विषेली जहरीली गेंस बनाने में कर रहे है तो कुछ कोरोना जेसे वायरस बनाने में लगे है यह सब गलत है . इससे मानव अपने ही पेरो पर कुल्हाड़ी मार रहा है . हमे इसका दुरपयोग नही करना चाहिए .

मोबाईल, कंप्यूटर और इंटरनेट का गलत उपयोग भी विज्ञान के सुनहरे भविष्य में एक बाधा बनकर खड़ी है क्योकि कुछ बच्चे इसका गलत उपयोग भी कर रहे है . साथ ही साथ इनका ज्यादा उपयोग भी हमारे शरीर में बहुत सी बीमारिया पैदा कर रहा है . बड़े - बड़े टावरों से तेजी से रेडिएशन निकल रहा है जिसके कारण ग्लोबल वार्निंग का खतरा बनता हुआ नजर आ रहा है . एक शोध के अनुसार यह भी पता चला है की पिछले 2 सालो में सबसे ज्यादा रेडिएशन फेला है इससे पक्षियों को भी काफी परेशानी हुई है .

विज्ञान ने हमारी प्रकृति को खोखला कर दिया है चारों तरफ प्रदुषण ही प्रदुषण है . कारखानों से निकलने वाला धुआ बहुत सी बड़ी - बड़ी बीमारियों का कारण बनता जा रहा है . विज्ञान के कारण ध्वनि प्रदुषण, जल प्रदुषण, थल प्रदुषण भी बहुत अधिक हो रहा है.

विज्ञान की वस्तुओ का अधिक उपयोग कर मानव भी कमजोर होता जा रहा है उसके सोचने और समझने की शक्ति काफी कम हो गई है . विज्ञान की वस्तुओ का ज्यादा उपयोग युवाओ में ब्रेन हेम्रिज, हार्ट अटेक और केंसर का कारण बन रही है . 

उपसंहार- विज्ञान का रचियता इन्सान है, और इसका दुरपयोग करने वाला भी वही है. इन्सान के हाथों में ही है कि वो इसे कैसे उपयोग करे जिससे मानव जाति का कल्याण हो. हमको विज्ञान पर निर्भर नहीं होना चाहिए, बल्कि विज्ञान को इन्सान पर निर्भर होना चाहिए. विज्ञान मानव के बिना अपंग है. विज्ञान का प्रयोग इतना बढ़ गया है कि जैसे दुनिया आग पर बैठी है, कब राख का ढेर बन जाये, पता ही ना चले.

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