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प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जीवनी | World Statistics Day | Prasanta Chandra Mahalanobis Biography in Hindi

प्रशांत चंद्र महालनोबिस- National Statistics Day 2020 - P.C. Mahalanobis in Hindi - प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जीवनी | World Statistics Day | Prasanta Chandra Mahalanobis Biography in Hindi - जीवन परिचय एवम इतिहास
प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जीवनी | World Statistics Day in Hindi

नाम - प्रशांत चंद्र महालनोबिस

जन्म - 29 जून, 1893, कोलकाता, बंगाल

निधन - 28 जून, 1972, कोलकाता, पश्चिम बंगाल

माता -  निरोदबसिनी 

पिता - प्रबोध चंद्र महालनोबिस

कार्य कार्यक्षेत्र - गणित, सांख्यिकी ( Statistics )

शिक्षा - प्रेसीडेंसी कालेज, कोलकाता; कैंब्रिज यूनिवर्सिटी, लंदन

लोकप्रियता - प्रशांत चंद्र महालनोबिस ने सांख्यिकीय माप का सुझाव दिया जिसे Statistics में "महालनोबिस" दूरी के नाम से जाना जाता है .

योगदान - इन्होने भारत में गणित, सांख्यिकी संस्थाओ के निर्माण में योगदान दिया था .

प्रशांत चंद्र महालनोबिस जीवन परिचय - प्रशांत चंद्र महालनोबिस एक महान भारतीय वैज्ञानिक थे जिन्होंने भारत को सांख्यिकीवाद में आगे बढने में काफी मदद की थी . साथ ही साथ इन्होंने भारत की दूसरी पंच - वर्षीय योजना को भी तेयार करने में काफी साहयता की थी . इन्हें  "महालनोबिस" दूरी के लिए भी जाना जाता है .

प्रशांत चंद्र महालनोबिस ने कलकता में सांख्यिकी संस्थान की स्थापना भी की थी . साथ ही साथ बड़े पैमाने पर ‘सैंपल सर्वे’ के डिजाइन में भी अपना काफी योगदान दिया था .

15 अगस्त 1947 के बाद इन्हें भारत का सांख्यिकी सलाहकार भी बनाया गया था . इन्होने आजादी के समय बेरोजगारी को खत्म करने की योजनाए भी सरकार के सामने प्रस्तुत की थी .

प्रशांत चंद्र महालनोबिस शुरूआती जीवन 

इनका जन्म कलकता में 29 जून, 1893 को अपने पैतृक निवास पर हुआ था .इनके पिता प्रबोध चंद्र महालनोबिस "साधारण ब्रह्मो समाज" के सदस्य थे . इनकी माता निरोदबसिनी बंगाल के एक पढ़े - लिखे परिवार से थी .

प्रशांत चंद्र महालनोबिस  को बचपन से ही विद्वानों की संगती में रहना पसंद था .इनके चारों और समाज सुधारक और विद्वान लोग ही थे . इनकी शुरूआती शिक्षा ‘ब्रह्मो ब्वायज' स्कूल से हुई थी . इन्होने मैट्रिक भी 1908 में यही से ही पास की थी . इसके चार साल बाद यानि 1912 में वह उच्च शिक्षा हेतु लंदन चले गए थे . सुभाष चन्द्र बोस इनसे दो कक्षा जूनियर थे .

लंदन में इन्होने आगे की पढाई केम्ब्रिज विश्व विधालय से की थी . इन्होने भोतिकी और गणित दोनों विषय में अपनी पढाई पूर्ण की थी . कैंब्रिज में इनकी मुलाकात महान भारतीय गणितग्य श्रीनिवास रामानुजन से हुई। जिन्हें आज पूरी दुनिया जानती है .

अपनी पढाई पूरी करने के बाद ये कलकता लोट आए थे . यहा इन्होने भोतिकी की शिक्षा दी फिर दोबारा यह इंग्लेड चले आए थे . यहा इन्होने आगे बायोमेट्रिक की पढाई की थी . यह से इनके जीवन में सांख्यिकी पूर्णतया उतर चुकी थी इन्हें इस विषय में बहुत आनद आता था . ‘बायोमेट्रिका’ पढने के बाद उन्हें मानव-शास्त्र और मौसम विज्ञान जैसे विषयों में सांख्यिकी की उपयोगिता का ज्ञान हुआ और उन्होंने भारत लौटते वक्त ही इस पर काम करना प्रारंभ कर दिया। धीरे - धीरे अब इनका सांख्यिकी समूह भी बढ़ता गया फिर इन्होने सांख्यिकी प्रशिक्षण संस्था की शुरुआत की थी .

भारतीय सांख्यिकी संस्थान

सर्वप्रथम 17 दिसम्बर 1931 को भारतीय सांख्यिकी संस्थान की स्थापना हुई और 28 अप्रैल 1932 को औपचारिक तौर पर पंजीकरण करा लिया गया। शुरुआत में यह संस्था कोलेज के भोतिकी विभाग से शुरू किया गया फिर धीरे - धीरे इसके सदस्य बनते गए और यह संस्था भी बढती गई .

कोलकाता के अलावा भारतीय सांख्यिकी संस्थान की शाखाएं दिल्ली, बैंगलोर, हैदराबाद, पुणे, कोयंबटूर, चेन्नई, गिरिडीह सहित भारत के दस स्थानों में हैं। इसका मुख्यालय कोलकाता में है जहाँ मुख्य रूप से सांख्यिकी की पढ़ाई होती है।

सांख्यिकी में प्रशांत चंद्र महालनोबिस का विशेष योगदान

आचार्य ब्रजेन्द्रनाथ सील के निर्देशन में इन्होने सांख्यिकी पर काम किया था . इनका सबसे बड़ा योगदान मानाजाता है इनके द्वारा शुरू किया गया ‘सैंपल सर्वे. इसी ‘सैंपल सर्वे के आधार पर आज बड़ी - बड़ी योजनाये तेयार की जाती है . इन्होने ‘सैंपल सांख्यिकी माप की परिभाषा भी हमे दी थी .

प्रशांत चंद्र महालनोबिस को दिए गए सभी सम्मान एवं पुरस्कार


सन 1944 में उन्हें ‘वेलडन मेडल’ पुरस्कार दिया गया

सन 1945 में लन्दन की रायल सोसायटी ने उन्हें अपना फेलो नियुक्त किया

सन 1950 में उन्हें ‘इंडियन साइंस कांग्रेस’ का अध्यक्ष चुना गया

अमेरिका के ‘एकोनोमेट्रिक सोसाइटी’ का फेल्लो नियुक्त किया गया

सन 1952 में पाकिस्तान सांख्यिकी संस्थान का फेलो

रॉयल स्टैटिस्टिकल सोसाइटी का मानद फेलो नियुक्त किया गया (1954)

सन 1957 में उन्हें देवी प्रसाद सर्वाधिकार स्वर्ण पदक दिया गया

सन 19 59 में उन्हें किंग्स कॉलेज का मानद फेलो नियुक्त किया गया

1957 में अंतर्राष्ट्रीय सांख्यिकी संस्थान का ऑनररी अध्यक्ष बनाया गया

इनका जन्‍मदिन, 29 जून, हर वर्ष भारत में ‘सांख्यिकी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है

सन 1968 में उन्हें भारत सरकार ने पद्म विभूषण से सम्मानित किया

सन 1968 में उन्हें श्रीनिवास रामानुजम स्वर्ण पदक दिया गया


निधन - इनका निधन 28 जून, 1972 को हुआ था . भारतीय सांख्यिकी संस्थान सदेव इनके कार्यो को याद रखेगी .

29 जून को मनाया जाता है सांख्‍यि‍की दिवस

देश की आर्थिक योजना और सांख्‍यि‍की विकास के क्षेत्र में प्रशांत चन्‍द्र महालनोबिस के उल्‍लेखनीय योगदान के मद्देनजर उनका जन्‍मदिन, 29 जून हर वर्ष भारत में ‘सांख्यिकी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।