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50 सालों से परेशान था यह कछुआ, जानकर आप भी रोने लगेंगे | Amazing Sad Story of Sea Turtle Plastic Pollution in Hindi



Sabse Bada Kachua - 50 सालों से परेशान था यह कछुआ, जानकर आप भी रोने लगेंगे | Amazing Sad Story of a Turtle in Hindi - Sea Turtle Plastic Pollution Facts in Hindi - World's Largest Tortoise in Hindi

आज हम आपको ऐसी कहानी बताने वाले है जिसे सुन कर आपको भी रोना आ जाएगा। इससे पहले की में इस घटना के बारे में बताऊ हम थोड़ा समुन्द्र के बारे में बात कर लेते है। 
Amazing Sad Story of Sea Turtle Plastic Pollution in Hindi

जिस प्रकार करोड़ो जीव पानी से बाहर रहते है इसी प्रकार करोड़ो जीव - जंतु पानी के अंदर समुन्द्र में भी रहते है। लेकिन बदकिस्मती से इंसान इनके लिए बहुत बड़ी मुसीबत बन चुके है। इंसानो ने लाखो टन प्लास्टिक समुन्द्र में डाल दिया है जिसका खामियाजा इन बेचारे मासूम जीवों को भुगतना पड़ रहा है। हम 1960 तक सिर्फ 1 प्रतिशत ही प्लास्टिक यूज करते थे जो की 2015 आते - आते इसका उपयोग हमने 40 प्रतिशत से भी ज्यादा कर दिया।

हालाँकि भारत में 2014 के बाद नई सरकार ने कई ऐसे अभियान शुरू किए जिससे हमारे पर्यावरण में फैले प्लास्टिक की मात्रा कम की जाए। लेकिन कुछ लोग कहा मानने वाले आज भी पानी की प्लास्टिक की बोतले, प्लास्टिक की थैलिया आदि सभी समान तेजी से भारत के बाजारों में बेचा जा रहा है। 

हमारे चारों तरफ सिर्फ प्लास्टिक ही प्लास्टिक फैला हुआ है। क्या आपने कभी सोचा है आपकी फेंकी गई एक प्लास्टिक की थैली का वातावरण में क्या प्रभाव पड़ता होगा। आपके द्वारा फेकि प्लास्टिक की एक थैली करीब 150 सालों में नष्ट होती है। अगर उसे कोई जीव - जंतु खाते है तो वो मर जाते है। और वो थैली समुन्द्र में पहुंच जाती है तो एक के बाद यह दूसरे जीव के शरीर में जाती है। इसी प्रकार एक थैली एक साथ बहुत से जीवो को नुकसान पहुंचा सकती है। 

अगर ऐसा ही चलता रहा तो 2025 आते - आते समुन्द्र में प्रत्यक 10 में से 9 मछलियों के पेट में प्लास्टिक मिलेगा। ये बहुत ही गंभीर विषय है। 

अभी हाल ही में अमेरिका के समुन्द्रों में रिसर्च कर रहे वैज्ञानिको को एक कछुआ मिला। जिसका शरीर देख कर सभी वैज्ञानिको की आँखों में पानी आ गया। असल में इस कछुए का शरीर एक प्लास्टिक की रिंग में फस चूका था। जिसके कारण यह करीब 50 सालो से परेशान था। इस रिंग के कारण इसका शरीर दो भागों में बट चूका था। जिसके कारण यह 50 सालो में न तो ठीक से खा सका और न समुन्द्र की गहरायो में सही से तैर सका।

अब आप ही बताए इसकी मुख्य वजह कौन है। हमारे लिए तो यह सोचना भी मुश्किल है की इस बेजुबान ने कितना दुख झेला होगा। वो भी मानव द्वारा फेके प्लास्टिक की वजह से। वैज्ञानिको ने वह रिंग काट कर इसको आजाद तो कर दिया लेकिन अब इसका शरीर सही नहीं हो सकता। 

ऐसे बहुत से समुंद्री जीव है जो प्लास्टिक को अपना खाना समझ कर खा जाते है और यही प्लास्टिक इनके मौत की वजह बन रही है। समुन्द्र में प्लास्टिक मुख्यत तीन कारणों से जा रहा है। बीच पर आए सैलानियों के कारण। समुन्द्र में यात्रा कर रहे लोगो के कारण और समुन्द्र में मिलने वाली नदियों के कारण। हमे आज से ही इन तीनो बातो का ध्यान रखना है और जितनी जल्दी हो सके प्लास्टिक को अपने जीवन से हमेशा - हमेशा के लिए दूर करना है। इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा अपने दोस्तों में भी शेयर जरूर करे और समुंद्री जीवों को बचाने के एक नए अभियान में हमारा साथ जरूर दे। 


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