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सम्राट अशोक के शिलालेख - Ashok Ke Shilalekh - Edicts of Ashoka in Hindi



सम्राट अशोक के शिलालेख - Ashok Ke Shilalekh - Edicts of Ashoka in Hindi - अभी तक हमे मौर्य राजवंश के महान सम्राट अशोक द्वारा प्रवर्तित कुल 33 अभिलेख प्राप्त हुए हैं। जिन्हें अशोक ने स्तंभों, शिलाओं (चट्टानों) और गुफाओं की दीवारों में अपने 269 ईसापूर्व से 231 ईसापूर्व अपने शासनकाल में खुदवाए। 

- अशोक के शिलालेख बौद्ध धर्म के सबसे प्राचीन प्रमाणों में से एक है। अशोक के शिलालेख भारत, बंगलादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और नेपाल हर जगह से मिले है। 
Ashok Ke Shilalekh

- ये लेख उप महाद्वीप के कुछ भाग में प्राकृत भाषा एवं ब्रह्मी लिपी में थे, लेकिन उत्तर पश्चिमी भाग में यह शिलालेख हमें इब्रानी भाषा एवं खरोष्टी लिपी में मिले है। 

- इन शिलालेखों से एक बात तो साफ़ है की सम्राट अशोक के बौद्ध धर्म के प्रचार के प्रयास भूमध्य सागर तक फैले थे। अशोक चाहते थे की भगवान बुद्ध की दी गई शिक्षाओ का हर कोई लाभ उठाए। इन शिलालेखों में आदर्श जीवन जीने से लेकर अहिंसा, सत्य, कर्तव्य, निष्ठा, प्रेम आदि सभी के बारे में जानकारी लिखी होती थी ताकि आम जनता इस नियम पर चले और अपने जीवन को एक बेहतरीन ढंग से जिए।    

- अशोक के लेख चट्टानों और स्तंभ पर लिखे होने के कारण इन्हे 2 भागो में बांटा गया है। 

(1) चट्टानी शिलालेख 
(2) स्तंभशिलालेख 

सम्राट अशोक के स्तंभशिलालेख 

- आज से लगभग 400 ई. पू. पाणनि ने अष्टाध्याय की रचना की थी लेकिन किसी भी लिपी का सबसे पहले और इतने बड़े स्तर पर उपयोग सम्राट अशोक ने ही किया था। 

- अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद तलवार की ताकत से ज्यादा कलम की ताकत को अधिक महत्व दिया। इस युद्ध के बाद वह एक सम्राट भी थे और एक भीक्षु भी थे। 


- हमे अशोक नाम सिर्फ माइनर रॉक शिलालेख - 1 पर से ही प्राप्त होता है। अन्य शिलालेखों पर सम्राट के अन्य नाम लिखें हुए मिलते है जैसे - देवनामप्रिय और प्रियदर्शी लिखे है। 

- भाब्रू  शिलालेख से इस बात का पता चलता है की सम्राट अशोको को बौद्ध धर्म में सच्ची निष्ठा थी एवं संघ में पूर्ण विश्वास था। 

- रॉक शिलालेख - 7 शिलालेख में लिखा मिलता है की सभी सम्प्रदाय की इच्छा मन पर नियंत्रण एवं आत्मा की पवित्रता है। 

- अशोक के मुख्य शिलालेखों की संख्या 14 है यह शिलालेख सम्राज्य की सीमाओं पर लगाए गए है। 

- कलिंग के शिलालेख में निजी प्रशासन की नीतियाँ और नियम लिखे गए है। जो की कलसी एवं गिरनार शिलालेख है। 

- अशोक का सबसे लम्बा शिलालेख रॉक शिलालेख - (XIII = 13) है। 

- कलिंग युद्ध की भयावता और भयंकर नरसंगार का वर्णन हमे XIIIशिलालेख से मिलता है। 

- अगर स्तंभो की बात करे तो अशोक के 10 स्तंभ प्राप्त हुए है। जिनमे से 7 मुख्य है और तीन गौण स्तंभ है। 

- माइनर स्तंभ लेख - 1 को शिस्म शिलालेख भी कहा जाता है। यह संघ के विभाजन के बारे में बताता है। 

- हमे एक शिलालेख रूमीनिदे के नाम से भी प्राप्त हुआ है। जो की बुद्ध के जन्म के बारे में बताता है। 

- कौशाम्बी के स्तंभ को जहांगीर द्वारा इलाहबाद स्थानांतरण कर दिया गया था। 

- सोपारा और मेरठ से प्राप्त हुए शिलालेखों को फिरोज शाह तुगलक के द्वारा दिल्ली स्तनांतरण कर दिया गया था। फिरोज शाह तुगलक ने अशोक के शिलालेखों को पढ़ने के लिए हर संभव प्रयास किया लेकिन वह असफल रहा था। 


Q. Ashok Ke Shilalekh Ki Khoj Kisne Ki ? 
Ans - अशोक के शिलालेख की खोज सर्वप्रथम 1750 ई. में पाद्रेटी फेंथैलर ने की थी। 

Q. Ashok Ke Shilalekh Ko Sarvpratham Kisne Pada
अशोक के अभिलेखों को पढ़ने में सर्वप्रथम सफलता सन् 1837 ई. में जेम्स प्रिंसेप को मिली

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