प्रदूषण पर हिन्दी में निबंध | Pradushan Par Nibandh in Hindi | Pollution Essay in Hindi



प्रदूषण पर हिन्दी में निबंध | Pradushan Par Nibandh in Hindi | Pollution Essay in Hindi - Pollution Problem And Solution Essay In Hindi - आज के समय में पुरे विश्व में प्रदूषण की समस्या सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। इस प्रदूषण का मुख्य कारण भी हम सभी मनुष्य ही है। अगर मनुष्य न हो तो प्रकृति कभी प्रदूषित नहीं होती क्योकि इस प्रकृति में कही भी गंदगी और कचरा नहीं है इसे भगवान ने इस तरह बनाया है की यहाँ रहने वाले प्रत्यके जीव - जंतु यहाँ पर एक मुख्य भूमिका निभाते है। लेकिन मानव इस धरती के बहुत से कार्यो में अपना हस्तक्षेप कर इसे खोखला कर रहा है। 
प्रदूषण पर हिन्दी में निबंध | Pradushan Par Nibandh in Hindi | Pollution Essay in Hindi
मानव एक से दूसरे मानव का शोषण करता है। यहाँ एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र का शोषण करते है। इसी प्रकार मनुष्य ने प्रकृति का भी शोषण किया है। अपने लालच के कारण उसने जंगलो को काटना शरू कर दिया। यहाँ के बेजुबान जानवरों को पिंजरे में कैद करना शुरू कर दिया। यहाँ की नदियों का मानव ने अपने फायदे के लिए रास्ता ही बदल दिया। बड़े - बड़े पहाड़ो को केवल इस लिए काटा गया ताकि उनके पत्थरों का उपयोग किया जाएं और जगह को खाली किया जाए। लेकिन मानव यह नहीं जानता की इससे वह अपनी ही धरती का संतुलन बिगाड़ रहा है। जिसके कारण बहुत बड़ी आपदा आ सकती है। 

मनुष्य ने अपने फायदे के लिए इस धरती पर बड़े - बड़े उधोग शुरू किए। उन उधोग के लिए यहाँ बड़े - बड़े कारखाने स्थापित किए गए। जिनसे रात - दिन जहरीली गैंस निकल कर इस वातावरण में फैलती गई। फिर उन उधोग से निकला अपशिष्ट पदार्थ को मानव ने पास की भूमि और नदियों में फेकना शुरू किया जिससे भूमि प्रदूषण और जल प्रदूषण भी फैलता गया। धीरे - धीरे मनुष्य ने पूरी जलवायु को ही प्रदूषित कर दिया। 

फिर अपनी सुविधा के लिए मानव ने रेल, कार, बस, हवाई जहाज आदि सभी साधन जुटाए। जिससे तेजी से वातावरण में प्रदूषण फैला था। फिर मानव ने आपस में ही बड़े - बड़े युद्ध लड़े जिसके कारण हजारो - जीव जंतु इसकी चपेट में आ गए। युद्ध में बारूद और बड़े - बड़े हथियारों का प्रयोग हुआ जिससे ओजोन परत को नुकसान पहुंचा। सन् 1968 में ब्रिटेन में लाल धूल, गिरने लगी, वह सहारा रेगिस्तान से उड़कर आई। जब उत्तरी अफ्रीका में टैंकों का युद्ध चल रहा था। तब वहाँ से धूल उड़कर कैरीबियन समुन्द्र तक पहुँच गई थी।

इसके आलावा मानव ने और भी बहुत बड़ी - बड़ी गलतियाँ की है जिसके कारण बड़े - बड़े जंगल जल कर राख हो गए। अमेजॉन का जंगल पुरे विश्व को 20% ऑक्सीजन देता है लेकिन पिछले कुछ सालो में इसका 50% हिस्सा जल कर खत्म हो चूका है। इधर आस्ट्रेलिया के जंगलो में आग लगने के कारण भी करोड़ो जीव - जंतु मारे गए और करोड़ो पेड़ - पौधे जल गए है। ऐसे में अगर जंगल ही नहीं बचे तो आने वाले समय में प्रदूषण एक गंभीर समस्या होगी। इसे रोक पाना नामुनकिन होगा। इस और हमे अभी से ही ध्यान देने और जरूरी कदम उठाने की आवश्यकता है। 

मुख्यतय प्रदूषण के 4 प्रकार है।

 1. वायु प्रदूषण (Air Pollution) 
2. जल प्रदूषण (Water Pollution)
3. ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution)
4. मृदा प्रदूषण (Soil Pollution) 

शहरों में बढ़ते वाहन भी प्रदूषण का एक कारण है। अत्यधिक वाहनों से ट्रैफिक बढ़ता है और उनसे निकलने वाले जहरीले धुयें में बढ़ौतरी होती है जिससे वायु प्रदूषण होता है। वाहनों के अत्यधिक शौर से ध्वनि प्रदूषण भी होता है। लाउडस्पीकर और कारखानों के सायरन से भी ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है।वृक्षों की अंधाधुंध कटाई से भी प्रदूषण में बढ़ौतरी हो रही है। घटते जंगलो से प्राकृतिक सन्तुलन बिगड़ा है। ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण में अत्यधिक वृद्धि का एक कारण वृक्षों की कटाई भी है।ज्वालामुखी, बाढ़, भूकम्प से भी वायु और जल प्रदूषण होता है। परमाणु विस्फोट परीक्षण से भी वायु प्रदूषण में बढ़ौतरी होती है। परमाणु परीक्षण से रेडियोएक्टिव प्रदार्थ हवा में मिल जाते है।

प्रदूषण रोकने के उपाय - How To Control Pollution In Hindi 

Pollution को समाप्त करना तो मुश्किल है लेकिन इसे कुछ उपाय करके कम किया जा सकता है।

प्रदूषण रोकने के उपाय से प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है। प्रदूषण को रोकने के लिए सभी देशों को एकसाथ आना होगा। प्रदूषण रोकने के लिए कड़े नियम बनाने होंगे। ग्लोबल वार्मिंग भी एक समस्या है जो बढ़ते प्रदूषण से और भी गम्भीर हो रही है। इससे निपटने के लिए वायु प्रदूषण को रोकना जरूरी है। सामाजिक जागरूकता भी एक अच्छा उपाय हो सकता है। पर्यावरण प्रदूषण के गम्भीर खतरों से लोगो को अवगत कराना चाहिए। यह हमारी जिम्मेदारी और फर्ज है कि हम पर्यावरण की सुरक्षा करें। शिक्षा से भी प्रदूषण की समस्या से निजात पाया जा सकता है। बच्चो को स्कूली सिलेबस में पर्यावरण के प्रति जागरूक करना चाहिए। प्रकृति का महत्व बच्चो की शिक्षा में अनिवार्य होना चाहिए।

फैक्टरियों से निकलने वाले धुंए और रासायनिक पदार्थ को वायु और जल में मिलने से रोकने के उपाय होने चाहिए। प्रदूषण का मानक तय होना चाहिए।ज्यादा से ज्यादा वृक्षारोपण करना चाहिए जिससे प्रदूषण की समस्या से निजात मिल सकती है। पेड़ लगाना पूण्य कमाने के समान है। हम स्वयं पर्यावरण को गंदा करते है और अस्वछता फैलाते है। यह हमारा दायित्व है कि हम स्वछता रखे। स्वच्छता बेहतर जीवन देती है। हर जगह कूड़ा कचरा डाल दिया जाता है। यह कूड़ा पानी मे मिलकर उसे प्रदूषित करता है। कचरे के प्रदूषक हवा में मिलकर इसे प्रदूषित करते है।

पृथ्वी की सुंदरता को बनाये रखने की जिम्मदारी हमारी है। धरती को प्रदूषण मुक्त करना हमारा कर्तव्य है। प्रकृति का संतुलन बनाये रखने का दायित्व भी हमारा है। प्रदूषण फैलाने के जिम्मेदार हम खुद है और इसको कम करना भी हमारे ऊपर ही है। प्रदूषण पर निबंध में प्रदूषण के कारण, प्रभाव और प्रदूषण रोकने के उपाय के बारे जानकारी देना हमारा दायित्व है।

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