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जम्बों हाथी की कहानी सुनकर आप भी रोने लगेंगे | Sad Story of JUMBO Circus Elephant in Hindi




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दोस्तों आपने अपने जीवन में हाथी तो बहुत देखे होंगे लेकिन आज हम जिस हाथी बात करने वाले है वो पूरी दुनिया में मशहूर हो चूका था। लेकिन इस हाथी का पूरा जीवन ही इंसानो ने नरक बना दिया था। 

हाथी और इंसानो में एक गहरा और अटूट रिस्ता है
कहानी को शरू करने से पहले हम हाथियों के बारे में थोड़ा जान लेते है। हाथी स्थल प्राणियों में सबसे बड़ा प्राणी है। वर्तमान समय में हाथियों की केवल दो ही प्रजाति जीवित है। आम तौर पर इनका वजन 10 हजार किलों तक भी होता है। इतने बड़े प्राणी होकर भी ये दिन में 4 घंटे ही सोते है। जानवरो में हाथियों का दिमाग सबसे बड़ा होता है। इन्हे समझदार जानवर भी कहा जाता है। लाखो सालो से हाथी और इंसानो में एक गहरा और अटूट रिस्ता है। जो आगे भी ऐसे ही बना रहेगा। 
Sad Story of JUMBO Circus Elephant in Hindi

एक ऐसा हाथी जिसका पूरा जीवन सर्कस में ही बीत गया 
अब हम बात करते है एक ऐसे हाथी की जिसे पूरी दुनियाँ आज जम्बो के नाम से जानती है। इस हाथी का जन्म 1860 में अफ्रीका में हुआ था। इसके पैदा होते ही मानो इसके जीवन में मुश्किलों का पहाड़ ही टूट पड़ा था। जब जम्बो दो साल का था उस वक्त शिकारियों ने उसकी माँ को मार दिया और जम्बो को जानवरों की स्मगलिंग के जरिए बेच दिया। उसी चिड़िया घर के केयर टेकर ने उस हाथी का नाम रखा था जम्बो। 

जम्बो हाथी का अंत बहुत ही दर्दनाक था 
इस केयर टेकर ने जम्बो का बहुत ध्यान रखा क्योकि उसे जानवरो से बहुत लगाव था। वहाँ रहकर जम्बो बहुत जल्दी ठीक होने लगा था। उन दोनों में गहरी दोस्ती भी हो गई थी। देखते ही देखते जम्बो 11 साल की उम्र में 11 फिट का विशालकाय हाथी बन गया था। जिसका वजन 6 हजार kg था। उस समय जम्बो दुनिया का सबसे विशालकाय हाथी था।  

जम्बो केवल शरीर से ही बड़ा नहीं था बल्कि दिल से भी बहुत दयालु था। वो जल्द ही लोगो से घुल मिल गया था। लेकिन अब धीरे - धीरे उसे जू में कैद रहना पसंद नहीं आ रहा था और वो आक्रामक होने लगा। वो दीवारों को धके मारता जिसकी वजह से उसे काफी चोट भी आई और उसके दाँत भी टूट गए। ये सब देख कर जू के अधिकारी उसे रोज पीटने लगे। ताकि वह उनके इशारों पर काम करे। कुछ समय बाद इसे 2000 पाउंड में अमेरिका के सर्कस में बेच दिया गया। 

एक बेजुबान जानवर को शराब पिलाई गई 
लंदन से न्यूयोर्क तक के सफर में उसे बहुत सारी नशे की दवाई और शराब पिलाई गई ताकि वो इस लम्बे सफर में चुप - चाप लेटा रहे। न्यूयोर्क सर्कस में यह आकर्षण का केंद्र बन गया। अमेरिका की सर्कस में देखने आए लोगो ने इसे सुपर हीरो बना दिया था। धीरे - धीरे लोगो को यह काफी पसंद आने लगा। उस सर्कस ने सिर्फ 21 दिनों में ही इतने रुपए कमा लिए जितना जम्बो को खरीदने पर खर्च किया था। 

वो इतना ज्यादा पॉपुलर हो गया की कई बड़ी - बड़ी कम्पनियाँ उसके नाम से ही अपनी कंपनी का विज्ञापन करने लगे थे। लेकिन दोस्तों समय की मार काफी बड़ी होती है। रोज - रोज सर्कस में एक ही करतब कर - कर के जम्बो काफी हिंसक हो गया था। आखिर हे तो वह भी प्राणी ही उसे भी तो अपनी जिंदगी जीने का हक है। 

जम्बो को रोज पीटा जाता था 
उसका मालिक उसे काबू में रखने के लिए रोज - रोज शराब का सेवन करवाते थे और लेदर की बेल्ट से उसे रोज पीटा जाता था। ऐसा लगता था मानों अब धीरे - धीरे इसका जीवन नरक बनता जा रहा है। फिर अचानक एक दिन खबर सामने आई की जम्बो एक मालगाड़ी के नीचे आ कर मारा गया। जम्बो की यह खबर जल्द ही पुरे मिडिया में तेजी से फेल गयी और कुछ लोगो ने उसके मालिक पर आरोप लगाया की यह रोज उसकी पिटाई करता था। सर्कस में काम न करने की वजह से इसने उसे रेल की पटरियों पर  बांध दिया था। 

इस हाथी जिसने कभी जंगल नहीं देखा 
सरकारी जाँच के अनुसार जम्बो के पेट से बहुत सारे सिक्के, चाबियां, सिटी और कई हानिकारक वस्तुए मिली थी। जो इस बात की और संकेत करती है की जम्बो और अन्य जानवरो का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखा जाता था। बाद में भी उस सर्कस के मालिक ने जम्बो की हडियो का अपने सर्कस में 1 साल तक प्रदर्शन कर काफी रूपये कमाए थे। बाद में आग लगने के कारण सभी अवशेष जल कर राख हो गए थे। 

जानवरों की आजादी छीनने का इंसानो को हक नहीं 
कुछ साल बाद 1941 में डिजनी ने जम्बो के जीवन पर एक फिल्म बनाई जिस फिल्म का नाम था डम्बो। दोस्तों देखा जाये तो हम इंसान अपनी ख़ुशी के लिए इन मासूम जानवरो को जू और सर्कस में देख कर खुश जरूर होते है लेकिन हम यह नहीं समझते की हमने इन बेजुबानो की आजादी को छीन लिया है। जिसके वो हकदार है। तो दोस्तों एक हाथी के जीवन पर आधारित यह घटना आपको कैसी लगी अगर अच्छी लगी तो कृप्या इसे अपने दोस्तों में शेयर जरूर करें। 


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