20.सम्राट अशोक का जीवन परिचय - Samrat Ashok Biography in Hindi | Ashoka Life Story in Hindi | Maurya Empire Hindi



सम्राट अशोक का जीवन परिचय - Samrat Ashok Biography in Hindi | Ashoka Life Story in Hindi | Maurya Empire Hindi - Samrat Ashok Jeevan Parichay Life Introduction In Hindi सम्राट अशोक जीवन परिचय हिंदी में - दोस्तों हम मौर्य सम्राज्य के बारे में पढ़ रहे थे जिसमें हमने सबसे पहले चंद्रगुप्तमौर्य और फिर बिन्दुसार के इतिहास के बारे में जाना और समझा था। अब हम बिन्दुसार के पुत्र अशोक के जीवन के बारे में जानेंगे। 

अगर आपने पीछे का अध्याय नहीं पढ़ा है तो आप यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते है। बिन्दुसार का जीवन परिचय
Samrat Ashok History In Hindi

सम्राट अशोक को देवानांप्रिय एवं प्रियदर्शी आदि नामों से भी जाना जाता है। उसके समय मौर्य राज्य उत्तर में हिन्दुकुश की श्रेणियों से लेकर दक्षिण में गोदावरी नदी के दक्षिण तथा मैसूर, कर्नाटक तक तथा पूर्व में बंगाल से पश्चिम में अफ़ग़ानिस्तान तक पहुँच गया था। सम्राट अशोक के काल में भारत का सम्राज सबसे बड़ा माना जाता है।  सम्राट अशोक को अपने विस्तृत साम्राज्य के बेहतर कुशल प्रशासन तथा बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए जाना जाता है। Maurya Empire in hindi

नाम - सम्राट अशोक 

अन्य नाम - 'देवानाम्प्रिय' एवं 'प्रियदर्शी

जन्म - 304 ईसा पूर्व

जन्म भूमि - पाटलिपुत्र (पटना)

मृत्यु तिथि - 232 ईसा पूर्व

पिता का नाम - बिन्दुसार 

माता - धर्मा (सुभाद्रंगी)

संतान - पुत्र महेन्द्र, पुत्री संघमित्रा

धार्मिक मान्यता - हिन्दू धर्म, बौद्ध धर्म

युद्ध - कलिंग-युद्ध' (262-260 ई.पू. के बीच

निर्माण - भवन, स्तूप, मठ और स्तंभ

सम्राट अशोक मौर्य सम्राज्य के तीसरे शासक थे। ये चंद्रगुप्तमौर्य के पोते और बिन्दुसार के पुत्र थे। इन्हे एक कुशल शासक के तौर पर भी जाना जाता है। अशोक की माता एक बहुत ही गरीब परिवार से थी। सम्राट अशोक के समय में चाणक्य मौजूद थे जो की उनके दादा के गुरु रह चुके थे। एक कुशल मंत्री से शिक्षा पा कर अशोक भी प्रजा के प्रति सच्ची निष्ठा और ईमानदारी से कार्य करते थे।  

सम्राट अशोक बचपन से ही एक कुशल राजा बनने के सारे गुण मौजूद थे। इसी कारण राज्य में हुए कई विद्रोह में बिन्दुसार ने अपने पुत्र अशोक को भेजा था और अशोक ने बहुत से विद्रोह शांत भी किए थे। अशोक को शिकार का भी शोक था। धीरे - धीरे राज्य की प्रजा इन्हे पसंद करने लगी थी। सम्राट अशोक के इन्हीं सब गुणों को मध्य नजर रखते हुए उनके पिता ने उन्हें जल्द ही सम्राट घोषित कर दिया था। उन्होने सर्व प्रथम उज्जैन का शासन संभाला, उज्जैन ज्ञान और कला का केंद्र था तथा अवन्ती की राजधानी।

अशोक का राज्य ईरान तक फैला हुआ था। अशोक का सम्राज्य हिंदुकश कहलाता था। अशोक ने अपने जीवन काल में एक ही युद्ध लड़ा था (कलिंग युद्ध) और इस युद्ध में भारी नर - संहार को देखते हुए उन्होंने अंत में बौद्ध धर्म को अपना लिया था। उनका मन इस युद्ध के बाद विचलित हो उठा और उन्होंने सभी राज्य को युद्ध न करने की सलाह दी यहाँ से महान सम्राट अशोक दुनियाँ के लिए शांति दूत बन गए। इस समय सम्राट अशोक एक संत और एक राजा दोनों रूपों में प्रजा के बिच मौजूद थे। जो सभी को शांति के मार्ग पर लाना चाहते थे। उन्होंने अपने सम्राज्य के सभी लोगो को एक - दूसरे की सेवा और मदद करने की बात कही थी। 

सम्राट अशोक ने कई नियम बनाए और उन नियमों और बौद्ध धर्म के प्रचार को ही अपना उद्देश्य माना। बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए इन्होने अपने पुत्र और पुत्री को श्री लंका तक भी भेजा ताकि सभी को भगवान गौतम बुद्ध की शिक्षाओ का लाभ मिल सके। 

अपने धर्म के प्रचार के लिए उन्होने धर्म ग्रंथो का सहारा लिया तथा पत्थर के खंबों गुफाओ तथा दीवारों पर चिन्ह और संदेश अंकित करवाये। अशोक सम्राट ने 84 स्तूपो का निर्माण कराया इसके लिए उन्हे केवल 3 वर्ष का समय लगा। वाराणसी के निकट सारनाथ स्तूप के अवशेष आज भी देखे जा सकते है। मध्य प्रदेश का साची का स्तूप भी बहुत प्रसिद्ध है । अशोकस्तम्भ का निर्माण करवाया। हमारे तिरंगे के बीच में जो चक्र है वो अशोक चक्र को देख कर ही बनाया गया है। हमारे भारतीय नोट में जो सिंह की फोटो है। जिसे  सिंहचतुर्मुख कहते हैं. वह भी इनके बनाए स्तम्भो से लिया गया है। भारत की भूमि पर जन्मे ऐसे राजाओं पर हमे गर्व है। दुनियाँ भर में इनका नाम हमेशा आदरपूर्वक लिया जाएगा। 

सम्राट अशोक ने 40 वर्ष तक शासन किया इसके बाद एक महान सम्राट इस दुनिया से विदा हो गया। अशोक की मृत्यु के बाद उनका सम्राज आगे 50 सालों तक ही चला। अशोक के बाद मौर्य राजवंश में 7 राजा और हुए थे जिनकी सूचि आप नीचे देख सकते हो। 

मौर्य शासकों की सूची (Mory Rajvansh List)
  1. चंद्रगुप्त मौर्य – 322-298 ईसा पूर्व (24 वर्ष)
  2. बिन्दुसार – 298-271 ईसा पूर्व (28 वर्ष)
  3. अशोक – 269-232 ईसा पूर्व (37 वर्ष)
  4. कुणाल – 232-228 ईसा पूर्व (4 वर्ष)
  5. दशरथ –228-224 ईसा पूर्व (4 वर्ष)
  6. सम्प्रति – 224-215 ईसा पूर्व (9 वर्ष)
  7. शालिसुक –215-202 ईसा पूर्व (13 वर्ष)
  8. देववर्मन– 202-195 ईसा पूर्व (7 वर्ष)
  9. शतधन्वन् – 195-187 ईसा पूर्व (8 वर्ष)
  10. बृहद्रथ 187-185 ईसा पूर्व (2 वर्ष)

इस राजवंश के बाद शुंग वंश आया था जिसकी जानकारी हम जल्द ही आपके लिए लाने वाले है। 

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