15 August Ka Itihas in Hindi, Independence Day 2020 || 15 अगस्त का इतिहास {स्वतंत्रता दिवस}



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15 अगस्त का इतिहास {स्वतंत्रता दिवस का इतिहास } History of Independence Day of India


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 15 August Ka Itihas in Hindi, Independence Day in India

15 अगस्त को सम्पूर्ण भारत में स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है। साल 2020 में हम सब 74वा स्वतंत्रता दिवस मनाएंगे। इस शुभ अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री श्री मान नरेंद्र मोदी जी पुरे देश को सम्बोधित करेंगे। ऐसे में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने भी अब एक नया इतिहास बना दिया है। दरसल नरेंद्र मोदी भारत के चौथे ऐसे प्रधानमंत्री है जो अटल बिहारी वाजपयी से भी ज्यादा समय से प्रधानमंत्री पद को सभाले हुए है।


15 अगस्त 1947 भारत के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन था। इस दिन अंग्रजों की लगभग 200 वर्ष गुलामी के बाद हमारे देश को आज़ादी प्राप्त हुई थी। भारत को आज़ादी दिलाने के लिए कई स्वतंत्रता सेनानियों को अपनी जान गवानी पड़ी थी। स्वतंत्रता सेनानियों के कठिन संघर्ष के बाद भारत अंग्रजों की हुकूमत से आज़ाद हुआ था। तब से ले कर आज तक 15 अगस्त को हम स्वतंत्रता दिवस के रूप में मानते हैं।


15 August in Hindi


इस दिन पुरे भारत में स्कूल, कॉलेज और दफ्तरों में झंडा रोहण का कार्यक्रम होता है। तिरंगे को इस दिन सुबह से लेकर शाम तक फेहराया जाता है। सभी जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम होते है जिसके द्वारा हम उन वीर शहीदों को याद करते है एवं उनके परिवार के लोगो को नमन करते है जिन्होंने हस्ते - हस्ते अपने सपूतों को देश की रक्षा के लिए आगे किया। हम उन वीर जवानों को याद करते है जिनकी जवानी भारत के नाम हुई थी। जिन्होंने हमें अंग्रेजो से आजादी दिलवाई है।


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इस दिन दिल्ली में परेड का कार्यक्रम भी होता है जिसमे भारत के अलग - अलग राज्य अपनी संस्कृति और वेशभूषा का परिचय देते है साथ ही साथ भारत की वायु सेना, थल सेना एवं जल सेना भी अपना प्रदर्शन दिखाती है। हालाँकि इस बार साल 2020 में कोरोना वैश्विक महामारी के चलते बहुत से बड़े कार्यक्रम रद्द किये गए है। ताकि इस महामारी को फैलने से रोका जा सके। लेकिन भारत के प्रधानमंत्री इस मौके पर पुरे देश को जरूर सम्बोधित करेंगे। 


इस दिन हम सब परिवार के साथ मिलकर देश भक्ति की फिल्मे देखते है एवं भारत के उन शहीदों की जीवनियों के बारे में पढ़ते है। पुरे भारत में 15 अगस्त एक त्यौहार के रूप में मनाया जाता है जिसमे सभी धर्मो के लोग शमिल होते है। हम सभी इस दिन देश भक्ति गाने सुनते है एवं एक दूसरे को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के मेसेज भजते है। अगर आप भी अपने दोस्तों और परिवार को 15 अगस्त की हार्दिक शुभकामनाओं के संदेश देना चाहते है तो यहाँ क्लिक करें -  


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 15 अगस्त का इतिहास 15 August Ka Itihas in Hindi


17वी सदी में पश्चिमी देशो ने भारत में व्यापर हेतू अपना हस्तक्षेप शुरू कर दिया था। यह कम्पनियाँ भारत के साथ व्यापर करने आई थी। उस समय यहाँ राजाओं का शाषण काल था एवं भारत अलग - अलग राज्यों में बटा हुआ था। इसी का फायदा एक यूरोपियन कंपनी ईस्ट इण्डिया ने उठाया था। ईस्ट इण्डिया कम्पनी भारत में व्यापर के लिए आई थी लेकिन 18वी सदी आते - आते ईस्ट इण्डिया कम्पनी भारत के राजनीतिकी कार्यो में भी पूर्ण रूप से हस्तक्षेप करने लगी थी। धीरे - धीरे इस कंपनी ने भारत में अपने पाव चारों तरफ फैला लिए। ऐसे में यहाँ के राजाओं और शासकों के पास इनकी गुलामी करने के आलावा कोई और चारा ही नहीं बचा। 


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लेकिन उस समय भारत की धरती पर बहुत से ऐसे वीर पैदा हुए जिनको अंग्रेजो की गुलामी बिल्कुल भी स्वीकार नहीं थी। ऐसे में झांसी की रानी लक्ष्मी बाई का नाम सबसे ऊपर है। स्त्री होते हुए भी रानी लक्ष्मी बाई ने अग्रेजो की नींद उड़ा दी थी। 1857 की क्रांति जिसे सैनिक विद्रोह के नाम से भी जाना जाता है यह आजादी की पहली लड़ाई थी जिसमे मंगलपांडे जैसे योद्धा शामिल थे। 


Independence Day in Hindi


अब भारत में आजादी की पहली अलख जग चुकी थी धीरे - धीरे अलग - अलग राज्यों में आजादी को लेकर आंदोलन होने लगे थे। इधर भगत सिंह एवं चंद्रशेखर आजाद जैसे वीरो ने देश के लिए अपनी कुर्बानी तक दे दी थी। महात्मा गाँधी के प्रभाव में भी भारत की काफी जनता उस समय थी। भारत में अलग - अलग पार्टी का गठन भी होने लगा था। सभी अंग्रेजो के खिलाफ थे 1885 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आई० एन० सी०) निर्माण भी हो चूका था। 


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अब अंग्रेजो ने भारत को छोड़ना ही उचित समझा लेकिन भारत के नेताओ के सामने उस समय एक बहुत बड़ी समस्या थी की आखिर अंग्रेजो के जाने के बाद इतने बड़े भारत को सही ढंग से संभाले कैसे और कौन - कौन से नियम लागु किए जाये। ऐसे में भीमराव आम्बेडकर  को सविधान लिखने के लिए कहा गया ताकि भारत की सम्पूर्ण जनता अब अंग्रेजो के इशारों पर नहीं बल्कि भारत के सविधान पर चले। 


द्वितीय विश्व युद्ध में भारत की सहभागिता, कांग्रेस द्वारा असहयोग का अन्तिम फैसला और अखिल भारतीय मुस्लिम लीग द्वारा मुस्लिम राष्ट्रवाद का उदय। 1947 में स्वतंत्रता के समय तक राजनीतिक तनाव बढ़ता गया। इस उपमहाद्वीप के आनन्दोत्सव का अंत भारत और पाकिस्तान के विभाजन के रूप में हुआ।


स्वतंत्रता दिवस Swatantrata Diwas 


19वी सदी में आते - आते अंग्रेजो की जड़े भारत में कमजोर पड़ने लगी थी। 929 लाहौर सत्र में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज घोषणा की और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में घोषित किया। कांग्रेस ने भारत के लोगों से सविनय अवज्ञा करने के लिए स्वयं प्रतिज्ञा करने व पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्ति तक समय-समय पर जारी किए गए कांग्रेस के निर्देशों का पालन करने के लिए कहा।


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इस तरह के स्वतंत्रता दिवस समारोह का आयोजन भारतीय नागरिकों के बीच राष्ट्रवादी ईधन झोंकने के लिये किया गया व स्वतंत्रता देने पर विचार करने के लिए ब्रिटिश सरकार को मजबूर करने के लिए भी किया गया। कांग्रेस ने 1930 और 1950 के बीच 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया। इसमें लोग मिलकर स्वतंत्रता की शपथ लेते थे। जवाहरलाल नेहरू ने अपनी आत्मकथा में इनका वर्णन किया है कि ऐसी बैठकें किसी भी भाषण या उपदेश के बिना, शांतिपूर्ण व गंभीर होती थीं। गांधी जी ने कहा कि बैठकों के अलावा, इस दिन को, कुछ रचनात्मक काम करने में खर्च किया जाये जैसे कताई कातना या हिंदुओं और मुसलमानों का पुनर्मिलन या निषेध काम, या अछूतों की सेवा। 1947 में वास्तविक आजादी के बाद, भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को प्रभाव में आया, तब के बाद से 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।


15 अगस्‍त 1947 को सुबह 11:00 बजे संघटक सभा ने भारत की स्‍वतंत्रता का समारोह आरंभ किया, जिसमें अधिकारों का हस्‍तांतरण किया गया। जैसे ही मध्‍यरात्रि की घड़ी आई भारत ने अपनी स्‍वतंत्रता हासिल की और एक स्‍वतंत्र राष्‍ट्र बन गया।


आजादी के बाद जवाहरलाल नेहरु का प्रथम भाषण - जवाहरलाल नेहरू ट्रिस्ट विद डेस्टिनी भाषण देते हुए


स्‍वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इस दिन ट्रिस्ट विद डेस्टिनी (नियति से वादा) नामक अपना प्रसिद्ध भाषण दिया। 


कई सालों पहले, हमने नियति से एक वादा किया था, और अब समय आ गया है कि हम अपना वादा निभायें, पूरी तरह न सही पर बहुत हद तक तो निभायें। आधी रात के समय, जब दुनिया सो रही होगी, भारत जीवन और स्वतंत्रता के लिए जाग जाएगा। ऐसा क्षण आता है, मगर इतिहास में विरले ही आता है, जब हम पुराने से बाहर निकल नए युग में कदम रखते हैं, जब एक युग समाप्त हो जाता है, जब एक देश की लम्बे समय से दबी हुई आत्मा मुक्त होती है। यह संयोग ही है कि इस पवित्र अवसर पर हम भारत और उसके लोगों की सेवा करने के लिए तथा सबसे बढ़कर मानवता की सेवा करने के लिए समर्पित होने की प्रतिज्ञा कर रहे हैं।... आज हम दुर्भाग्य के एक युग को समाप्त कर रहे हैं और भारत पुनः स्वयं को खोज पा रहा है। आज हम जिस उपलब्धि का उत्सव मना रहे हैं, वो केवल एक क़दम है, नए अवसरों के खुलने का। इससे भी बड़ी विजय और उपलब्धियां हमारी प्रतीक्षा कर रही हैं। 


भारत की सेवा का अर्थ है लाखों-करोड़ों पीड़ितों की सेवा करना। इसका अर्थ है निर्धनता, अज्ञानता, और अवसर की असमानता मिटाना। हमारी पीढ़ी के सबसे महान व्यक्ति की यही इच्छा है कि हर आँख से आंसू मिटे। संभवतः ये हमारे लिए संभव न हो पर जब तक लोगों कि आंखों में आंसू हैं, तब तक हमारा कार्य समाप्त नहीं होगा। आज एक बार फिर वर्षों के संघर्ष के बाद, भारत जागृत और स्वतंत्र है। भविष्य हमें बुला रहा है। हमें कहाँ जाना चाहिए और हमें क्या करना चाहिए, जिससे हम आम आदमी, किसानों और श्रमिकों के लिए स्वतंत्रता और अवसर ला सकें, हम निर्धनता मिटा, एक समृद्ध, लोकतान्त्रिक और प्रगतिशील देश बना सकें। हम ऐसी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संस्थाओं को बना सकें जो प्रत्येक स्त्री-पुरुष के लिए जीवन की परिपूर्णता और न्याय सुनिश्चित कर सके? कोई भी देश तब तक महान नहीं बन सकता जब तक उसके लोगों की सोच या कर्म संकीर्ण हैं।


— ट्रिस्ट विद डेस्टिनी भाषण के अंश, जवाहरलाल नेहरू


जानिए उस दिन 15 अगस्त 1947 के दिन किस समय क्या - क्या हुआ था 


सुबह 08.30 बजे – गवर्नमेंट हाउस पर गवर्नर जनरल और मंत्रियों का शपथ समारोह

सुबह 09.40 बजे – संवैधानिक सभा की और मंत्रियों का प्रस्थान

सुबह 09.50 बजे – संवैधानिक सभा तक स्टेट ड्राइव

सुबह 09.55 बजे – गवर्नर जनरल को शाही सलाम

सुबह 10.30 बजे – संवैधानिक सभा में राष्ट्रीय ध्वज को फहराना

सुबह 10.35 बजे – गवर्नमेंट हाउस तक स्टेट ड्राइव

सायं 06.00 बजे – इंडिया गेट पर झंडा समारोह

सायं 07.00 बजे – प्रकाश

सायं 07.45 बजे – आतिश बाज़ी प्रदर्शन

सायं 08.45 बजे – गवर्नमेंट हाउस पर आधिकारिक रात्रि भोज (डिनर)

रात्रि 10.15 बजे – गवर्नमेंट हाउस पर स्वागत समारोह


पुरे भारत में देशभक्ति की भावना को जगाने और शहीदों को नमन करने के लिए स्‍वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। भारत में 15 अगस्त और 26 जनवरी स्कूली बच्चों के लिए किसी त्यौहार से कम नहीं है। इस दिन का हमे काफी महीनों पहले से ही इंतजार रहता है ताकि इस दिन को हम और ज्यादा खुशियों के साथ मना सके। दोस्तों यह थी 15 अगस्त के बारे में सम्पूर्ण जानकारी, इस जानकारी को अपने दोस्तों में और परिवार के खास लोगों के साथ जरूर शेयर करे। 


"जय हिन्द जय भारत"


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