Vaman Avatar in Hindi || वामन अवतार की कथा एवं सम्पूर्ण जानकारी : राजा बली की कथा { राजा बलि की परीक्षा }



 Vaman Avatar Ki Katha - भगवान विष्णु वामन अवतार कथा : राजा बली की कथा - राजा बलि की परीक्षा - Vaman Avatar Story of Lord Vishnu in Hindi, Vaman Jayanti 2020, Vaman Dwadashi in Hindi - भगवान विष्णु के 5वें अवतार की कथा 


त्रेता युग में भगवान श्री पशुराम एवं राम से पहले आए थे श्री हरी नारायण वामन अवतार के रूप में, वामन भगवान विष्णु के पहले ऐसे अवतार है जो पूर्ण मानव रूप में अवतरित हुए थे। भगवान ने यह अवतार एक बौने ब्राह्मण के रूप में लिया था। वामन अवतार को दक्षिण भारत में उपेन्द्र के नाम से जाना जाता है।   


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Vaman Avatar Story of Lord Vishnu in Hindi

नाम - वामन नारायण (उपेन्द्र)


माता का नाम - अदिति 


पिता का नाम - कश्यप ॠषि


अवतार - विष्णु के 


अवतार संख्या - 5वें 


धर्म - हिन्दू (ब्राह्मण)


युग - त्रेता युग 


शास्त्र - भागवत पुराण, विष्णु पुराण, वामन पुराण 



वामन अवतार का जन्म एवं बचपन Vaman Avatar of Vishnu in Hindi


भगवान वामन के पिता कश्यप ॠषि एवं माता अदिति है। पुराणों के अनुसार माता अदिति कश्यप ॠषि की दूसरी पत्नी थी। ऋग्वेद में इन्हें देवी एवं शक्ति का रूप माना गया है। इनके 12 पुत्र थे जो आदित्य कहलाए। उन्हें देवताओं के रूप में जाना जाता है इसी कारण माता अदिति को देव माता कहा जाता है। इन आदित्यों में बारहवें भगवान वामन थे। जिन्हें इंद्र के छोटे भाई के रूप में भी जाना जाता है।

   

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वामन अवतार की कथा  Vaman Avatar Ki Katha in Hindi


एक समय महान असुर राजा बली ने देवलोक पर अपना अधिकार कर लिया था और धीरे - धीरे तीनों लोकों पर उसका राज हो गया था। राजा बली के गुरु शुक्राचार्य थे जो की असुरों के गुरु कहलाते है। राजा बली से देवलोक लेने और इंद्र को दोबारा देवलोक का राजा बनाने के लिए वामन अवतार हुआ था। 


राजा बली एक दयालु असुर राजा के रूप में भी जाने जाते है यह प्रह्लाद के पौत्र थे। 


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एक समय राजा बली बहुत बड़ा यज्ञ करवा रहे थे। इस यज्ञ में शुक्राचार्य भी मौजूद थे। इस यज्ञ का उद्देश्य त्रिलोक का स्वामी बनना और सभी देवताओ को अपने अधीन करना था। इस समय भगवान विष्णु वामन अवतार के रूप में राजा बली के पास एक बौने ब्राह्मण के वेष में गए थे। भगवान वामन ने बली से कहा हे राजन तुम इतना बड़ा यज्ञ करवा रहे हो और एक ब्राह्मण तुम्हारे दर पर आया है क्या तुम मुझे खाली हाथ विदा करोगे। भगवान वामन आगे कहते है - हे राजन मेने तो तुम्हारी दयालुता की बहुत कहानियाँ सुनी है। इसी कारण आज में यहाँ आया हूँ। क्या तुम नहीं चाहते की तुम्हारा यज्ञ सफल हो। अगर चाहते हो तो मेरी एक छोटी सी मनसा पूरी करो। 


ऐसा शुभ अवसर जान राजा बली ने कहा हे ब्राह्मण देवता मेरे इस यज्ञ को सफल बनाओ और मांगो तुम्हे क्या चाहिए। ऐसे में वामन भगवान राजा बली से कहते है मेरे पास रहने के लिए भूमि नहीं है में कहा पर रहुँ कृप्या हे राजन मुझे तीन मेरे तीन कदम के बराबर भूमि देने का कष्ट करोगे। 


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Vaman Dwadashi in Hindi 

इस समय भगवान वामन का रूप बहुत अद्धभुत और निराला था हाथ में लकड़ी का छाता और छोटे - छोटे पैर एवं तेज चमकता हुआ उनका शरीर यह सब देख राजा बली से रहा नहीं गया और उसने अपने कमंडल में से वचन के लिए जल लेने की कोशिश की मगर बली के गुरु शुक्राचार्य कमंडल के अंदर जा कर बैठ गए और वचन के जल को रोक दिया ताकि बली इस समय कोई बड़ी गलती न कर बैठे। गुरु शुक्राचार्य जानते थे की यह देवताओ की चाल है और हमारे सामने कोई मामूली मानव नहीं बल्कि स्वम नारायण खड़े है। इसी कारण वह राजा बली की कमंडल में जा कर बैठ गए। लेकिन राजा बली ने सोचा कोई न कोई चीज इसके आगे आ गई जिसके कारण जल कमंडल से नहीं बाहर आ रहा है। 


ऐसे में राजा बली ने एक तिनका लिया और जोर से कमंडल के अंदर मारा इससे गुरु शुक्राचार्य की एक आँख फूट गई और वह चिलाते - चिलाते भाग खड़े हुए। अब राजा बली ने अपने हाथ में जल लेकर सभी के सामने उस ब्राह्मण को यह वचन दे दिया की तुम जो भी मांगना चाहते हो उसे में मेरी इच्छा से तुम्हे सौप दूंगा ये मेरा वचन है। तब भगवान ने कहा जहाँ तक मेरे कदम जाते है वहाँ तक की भूमि तुम मुझे दान में दोगे। 


वामन ने अपना आकार इतना बढ़ा लिया कि पहले ही कदम में पूरा भूलोक (पृथ्वी) नाप लिया। दूसरे कदम में देवलोक नाप लिया। इसके पश्चात् ब्रह्मा ने अपने कमण्डल के जल से वामन के पाँव धोये। इसी जल से गंगा उत्पन्न हुयीं। तीसरे कदम के लिए कोई भूमि बची ही नहीं। वचन के पक्के बली ने तब वामन को तीसरा कदम रखने के लिए अपना सिर प्रस्तुत कर दिया। वामन बली की वचनबद्धता से अति प्रसन्न हुये। चूँकि बली के दादा प्रह्लाद विष्णु के परम् भक्त थे, वामन (विष्णु) ने बाली को पाताल लोक देने का निश्चय किया और अपना तीसरा कदम बाली के सिर में रखा जिसके फलस्वरूप बली पाताल लोक में पहुँच गये साथ ही साथ भगवान वामन ने उन्हें अमरत्व का वरदान भी दिया था। जिस प्रकार कलयुग में हनुमान, वेदव्यास जी, अश्वथामा और विभीषण आदि 8 महापुरुष जिन्दा है इनमें से एक राजा बली भी है। जो भगवान विष्णु के परम् भक्त है।  


वामन अवतार से शिक्षा Vaman Avatar Ki Kahani 


वामनावतार के रूप में भगवान विष्णु ने बलि को यह पाठ दिया कि दंभ तथा अहंकार से जीवन में कुछ हासिल नहीं होता है और यह भी कि धन-सम्पदा क्षणभंगुर होती है। 


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