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Bikaneri Bhujia Kaise Banta Hai - बीकानेरी भुजिया कैसे बनता है एवं हल्दीराम भुजिया सफलता की कहानी | Bikaneri Bhujia Factory | Haldiram Bhujia Success Story in Hindi | Bikaji



Bikaneri Bhujia Kaise Banta Hai -  बीकानेरी भुजिया कैसे बनता है एवं हल्दीराम भुजिया सफलता की कहानी | Bikaneri Bhujia Factory | Haldiram Bhujia Success Story in Hindi | Bikaji


क्या आप जानते हो की बीकानेरी भुजियो के पीछे हल्दीराम का बहुत बड़ा योगदान है। नहीं ना। तो चलिए आज हम आपको इसके पीछे की कहानी बताते है और साथ ही साथ आज हम जानेगे की कैसे बीकानेर की फैक्ट्री में दुनियाँ भर के सुप्रसिद्ध भुंजिये बीकानेरी भुजिए तैयार किये जाते है। 


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 Haldiram Bhujia Success Story in Hindi


बीकानेर शहर की स्थापना 1482 में राजा राव बीका ने की थी। राव बीका बीकानेर रियासत के एक प्रसिद्ध राजा थे। महाराजा डूंगर के शासन काल में 1877 में पहली बार बीकानेरी भुजिया का निर्माण हुआ था। इसके बाद इसका स्वाद लोगों की ज़ुबान पर ऐसा चढ़ा कि यह पूरे भारत भर में प्रसिद्ध हो गया। 


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तेल में भुनने के कारण इसका नाम भुजिया पड़ा था। इसमें मुख्य सामग्री के रूप में मोठ दाल, बेसन, मूंगफली के तेल इस्तमाल किया जाता है।   


हर सफल कहानी के पीछे बहुत सारी मेहनत छुपी होती है और हर सफल व्यापार के पीछे भी किसी व्यक्ति विशेष का विशेष योगदान जुड़ा होता है। किसी भी बड़ी कंपनी की शुरुआत बहुत छोटे लेवल पर ही होती है और किसी परिवार का कोई व्यक्ति ही आने वाली पीढ़ियों को कोई खास विरासत देकर जाता है। इसी तरह की एक कहानी भारतीय प्रसिद्ध फूड ब्रांड हल्दीराम की भी है। 


बीकानेर में शुरू से ही भोजन में भुजिए का उपयोग होता आया है। सबसे पहले गंगाविशन अग्रवाल नामक एक व्यक्ति ने बीकानेर राजस्थान में एक नाश्ते की दुकान शुरू की थी। यह वास्तव में इनके पिता श्री तनसुखदास जी के द्वारा शुरू किया गया भुजियाँ सेव का व्यापार था इस व्यापार को आगे बढ़ाने का श्रेय तनसुख जी के छोटे बेटे रामेश्वर जी को जाता है। इन्होने ही इस भुजियाँ सेव के व्यापार को आगे बढ़ाते हुये दक्षिण भारत के कलकत्ता में हल्दीराम भुजिया वाला के नाम से एक दुकान शुरू की थी  और यह नाम और दुकान हल्दीराम की सफलता की कहानी के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ था। 


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वर्तमान में हल्दीराम के मैन्यूफेक्चरिंग प्लांट नागपुर, कोलकाता, दिल्ली और बीकानेर आदि जगह पर स्थित है। यहाँ से पुरे देश भर में बीकानेरी भुजिए फेमस होने लगे थे 


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बाद में शिवरत्न अग्रवाल जी कड़ी मेहनत के द्वारा इसे भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में प्रसिद्धि मिली। 1987 में इन्होने बीकानेरी भुजिया के नाम से बीकानेर मे ही अपना बिज़नेस शुरू किया था। हल्दीराम के कारण बीकानेर के भुजीयो को प्रसिद्धि तो पहले ही मिल चुकी थी लेकिन इसे घर - घर तक पहुंचाने का काम शिवरत्न जी द्वारा किया गया था। इनकी कंपनी भुजिया के अलवा और भी नमकीन और पापड़ भी बनाती है।अब आप टीवी पर भी बीकानेरी भुजीयो के काफी विज्ञापन देख सकते हो। 


बीकानेरी भुजिया की फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारी सभी बीकानेर के ही है और यह हाथ से ही भुजिया बनाते है एवं कुछ बड़ी मशीनों का इसमें यूज होता है। यह कर्मचारी पीढ़ी दर पीढ़ी यही काम करते आये है। एक और कमाल की बात यह है की इन भुजियो को अगर किसी और शहर में बनाया जाए तो इनका स्वाद पहले जैसा नहीं रहता है इसी कारण इन्हे केवल बीकानरे में ही तैयार किया जाता है और यही से ही पूरी दुनिया में इनकी सप्लाई की जाती है। 


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