Butati Dham, Rajasthan { lakwa ka ilaj ka mandir } Butati Dham Temple History in Hindi || बुटाटी धाम, नागौर (राजस्थान) की सम्पूर्ण जानकारी एवं इतिहास



 Butati Dham, Rajasthan { Lakwa Ka Ilaj Ka Mandir } Butati Dham Temple History in Hindi || बुटाटी धाम, नागौर (राजस्थान) की सम्पूर्ण जानकारी एवं इतिहास - Butati Dham In Rajasthan Is Famous For Paralysis Cure - लकवा का जादूई इलाज : राजस्थान का चमत्कारी मंदिर - अमेरिका से बुटाटी पहुंची लकवा पीड़ित ... मंदिर में सात दिन परिक्रमा लगाने से लकवा रोग ठीक


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Butati Dham Temple History in Hindi


यह मंदिर राजस्थान में 'चतुरदास जी महाराज के मंदिर' एवं लकवे के मंदरी के नाम से जाना जाता है। यह राजस्थान के नागौर जिले से 40 किलोमीटर दूर कुचेरा कस्बे के पास स्थित मंदिर है। यहाँ पर चतुरदास जी महाराज की समाधि है। 


Butati Dham Nagaur Rajasthan Contact Number and all Details in Hindi


नाम - चतुरदास जी महाराज का मंदिर, लकवे का मंदिर, बुटाटी धाम 


स्थान - राजस्थान, भारत


मंदिर की स्थापना कब हुई - 1600 ई की शुरूआत में 


बुटाटी मंदिर की स्थापना - बुरा लाल शर्मा (दायमा) नामक बाह्मण


पूरा पता - विनायक गेस्ट हॉउस नागौर बुटाटी धाम, बुटाटी, राजस्थान 341024


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Butati Dham Temple History in Hindi

Butati Dham Rajasthan Full Address : Lakwa Ka Ilaj Ka Mandir


- एक मान्यता के अनुसार कहा जाता है की संत "चतुरदास जी महाराज" करीब 500 साल पहले इस स्थान पर रहते थे।


- 500 साल पहले चतुरदास जी महाराज को एक महायोगी के रूप में जाना जाता था और वह दूर - दूर से आए लोगो का लकवे का इलाज करते थे और उन्हें रोगमुक्त कर देते थे। 


- वर्तमान में इस स्थान पर इनकी समाधि स्थल है और मान्यता है की अगर इनकी समाधि के 7 फेरी लगाई जाए तो व्यक्ति लकवे के रोग से मुक्त हो जाएगा। 


- यहाँ हर माह की शुक्ल पक्ष की द्वादशी को मेला लगता है।


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Lakwa Ka Ilaj Ka Mandir

राजस्थान का चमत्कारी मंदिर : बुटाटी धाम - Butati Dham in Rajasthan Hindi


- इस मंदिर का चमत्कार इतना अधिक है की यहाँ भारत के बाहर यानी विदेशो से भी रोगी लकवे का इलाज करवाने आते है और सही होकर जाते है। 


- डॉक्टर भी हैरान हैं कि आखिर बिना दवा और इलाज के कैसे लकवा ठीक हो सकता है। लेकिन यहाँ आए भक्तों की आस्था उनके सारे रोगो को हर लेती है और वह रोग मुक्त होकर घर जाते है।  


- यहाँ मरीज के परिजन नियमित लगातार 7 मन्दिर की परिक्रमा लगवाते हैं- हवन कुण्ड की भभूति लगाते हैं और बीमारी धीरे-धीरे अपना प्रभाव कम कर देती है। शरीर के अंग जो हिलते डुलते नहीं हैं वह धीरे-धीरे काम करने लगते हैं।


- यहाँ पर सभी के लिए मंदिर ट्रस्ट की और से उचित व्यवस्था भी की गई है। पीने के लिए गर्म और ठंडे पानी की व्यवस्था भी है साथ ही साथ नहाने धोने के लिए मंदिर परिसर में उचित व्यवस्था है। 


- यहाँ पर मंदिर के बाहर करीब 100 दुकाने भी है एवं उचित धर्मशालाओं की भी व्यवस्था है यात्रियों को जरुरत का सभी सामान बिस्तर , राशन , बर्तन, जलावन की लकड़ियाँ आदि निःशुल्क उपलब्ध करवाई जाती हैं।


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