Global Warming and ClimateChange - हमारा अस्तित्व अब खतरे में है | Real Solutions to Plastic Pollution : Environmental Pollution in Hindi



Global Warming and ClimateChange - हमारा अस्तित्व अब खतरे में है | Real Solutions to Plastic Pollution : Environmental Pollution in Hindi - Global Warming Essay in Hindi  - Paryavaran Pradushan Par Nibandh in Hindi, Pradushan Ek Gambhir Samasya Nibandh - प्रदूषण : एक गंभीर समस्या - Pollution Essay in Hindi


इस समय इंसान अपनी बनाई हुई टेक्नॉलजी में इतना ज्यादा खो गया है की उसे अपने आस - पास क्या घटित हो रहा है इसके बारे में उसे कुछ भी लेना देना नहीं है। ऐसे में आने वाली पीढ़ियों के लिए हम कही मुसीबत का कारण तो नहीं बन रहे। हमारे द्वारा फेका गया एक प्लास्टिक का रेपर आज इस धरती को कितना नुकसान पहुंचा रहा है जिसका अंदाजा भी हम नहीं लगा सकते है। 


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 Global Warming and ClimateChange - हमारा अस्तित्व अब खतरे में है

वनों की कटाई के हानिकारक प्रभाव Effect of Deforestation on Environment in Hindi


तेजी से हो रही वनों की कटाई के कारण अब जल्द ही ऑक्सीजन के लिए अपने - अपने कंधो पर ऑक्सीजन सिलेंडर रखना पड़ सकता है। आने वाली इन भयंकर घटनाओ के कारण भी हम ही है जो इस और बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहे। धरती पे मौजूद 50% से भी ज्यादा जंगलो को हमने राख कर दिया है। इस समय भी पृथ्वी पर 5 बड़े जंगलो में आग लगी हुई है जिनका आधा भाग नष्ट हो चूका है। 


आज ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे है Glaciers Melting Faster Today


इधर दुनियाँ भर में 30% ग्लेशियर पिछले 20 सालों में ही पिघल गए है। 90 के दशक से ही प्लास्टिक का उपयोग बहुत ज्यादा होता आया है। ऐसे में मानव ने 20 सालो में धरती पर इतना प्लास्टिक फैला दिया है जिसे हम 200 सालो में भी नहीं हटा पाएंगे। आज भी प्लास्टिक बैग का अंधाधुन उपयोग हो रहा है। 


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प्लास्टिक का पहाड़ Plastic Mountain


प्लास्टिक के कारण भूमि को नुकसान उठाना पढ़ता ही है साथ ही साथ बड़ी - बड़ी नदिया समुद्र के जीव एवं अन्य पशु - पक्षियों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। अब हमारी धरती पर इतना ज्यादा प्लास्टिक मौजूद है की अगर उसका पहाड़ बना दिया जाए तो वह चाँद की जमी से भी साफ़ दिखेगा। पूरी दुनिया में अभी तक 1500 टन से भी अधिक अनयूज्ड प्लास्टिक मौजूद है। 


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सभी अपने - अपने धर्मो की लड़ाई में लगे है तो कोई अपनी राजनीतक रोटियाँ सेक रहे है। लेकिन कोई भी प्राकृतिक द्वारा आने वाली बड़ी तबाही से बिल्कुल भी अवगत नहीं है। पर्यावण की समस्या में मुख्य समस्या - जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, जंगल, जीव - जंतु और भूमि है हमे इन्हे बचाना होगा। इस समस्या का हल किसी एक देश के पास नहीं है अपितु इसके लिए सभी देशो को एक बड़ी समिति बनाने की आवश्यकता है ताकी आने वाले खतरे से बचा जा सके वरना हमारा अस्तित्व खतरे में है। 


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